एक ही भर्ती में दो परीक्षा पर असमंजस

अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Sat, 10 Dec 2016 02:10 AM IST
पीसीएस प्री का रिजल्ट
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पीसीएस-2016 प्रारंभिक परीक्षा के संशोधित रिजल्ट में शामिल नए अभ्यर्थियों की मुख्य परीक्षा कराए जाने पर अभी से सवाल खड़े हो गए हैं। मुख्य परीक्षा 20 सितंबर से अक्तूबर के बीच हुई थी। ऐसे में संशोधित परिणाम में सफल नए अभ्यर्थियों की परीक्षा कराए जाने से प्रश्नपत्र के स्तर को लेकर सवाल खड़ा होने की आशंका है। आयोग के अफसर भी इसे लेकर आशंकित हैं। आयोग के चेयरमैन डॉ.अनुरूद्ध यादव का कहना है कि हाईकोर्ट के आदेश की जानकारी हुई है। एक ही परीक्षा दो बार कराने से स्टैंडर्ड को लेकर सवाल उठेगा। आयोग में ऐसा पहले नहीं हुआ है। उनका कहना है कि हाईकोर्ट के आदेश पर हर पहलू को ध्यान में रखकर विशेषज्ञों की राय ली जाएगी। इसके बाद ही आगे का निर्णय लिया जाएगा।
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मुख्य परीक्षा कराने की जल्दबाजी और प्रतियोगियों की मांग को नकारना लोकसेवा आयोग पर अब भारी पड़ने जा रहा है। गलत जवाब को लेकर याचिका दाखिल करने वाले पीसीएस-2016 के अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का आदेश आने के बाद मुख्य परीक्षा कराने की मांग की थी। मांग के समर्थन में ज्ञापन सौंपने के अलावा उन्होंने बेमियादी अनशन तक किया, लेकिन आयोग ने पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार परीक्षा कराई। अब हाईकोर्ट का आदेश आने के बाद आयोग के सामने चुनौती है कि संशोधित परिणाम में शामिल नए अभ्यर्थियों की ही मुख्य परीक्षा कराई जाए या नए सिरे से पूरा एग्जाम कराने के अलावा कोई और विकल्प चुना जाए।


गलत जवाब को लेकर अभ्यर्थियों की आपत्ति की जांच के लिए हाईकोर्ट के निर्देशन में विशेषज्ञों के पैनल का गठन हुआ था। इसके लिए न्यायालय के आदेश पर आयोग को एक लाख रुपये जमा करना पड़ा था।

पीसीएस-2016 प्रारंभिक परीक्षा में गलत जवाब को लेकर हाईकोर्ट के आदेश के बाद आयोग की कार्यपद्धति के साथ उसके विशेषज्ञों के पैनल पर भी सवाल खड़े हुए हैं। आयोग भी अब इस मामले में गंभीर होता दिख रहा है। अध्यक्ष डॉ.अनुरूद्ध यादव का साफतौर पर कहना है कि दोषी लोग अब विशेषज्ञों के पैनल में नहीं रह पाएंगे।

गलत जवाब तथा कई अन्य बिंदुओं को लेकर आयोग के विशेषज्ञों पर लगातार सवाल उठते रहे हैं। इसके मद्देनजर डॉ.अनुरूद्ध ने अध्यक्ष का पदभार ग्रहण करने के बाद ही पैनल में बदलाव की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अब इसमें और सख्ती की बात कही जा रही है। डॉ.यादव का कहना है कि प्रश्नपत्र तैयार करने और सवालों के जवाब तय करने का काम एक्सपर्ट करते हैं। इस तरह से उनके फैसले पर सवाल उठना गंभीर है। इससे आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल उठने के साथ प्रतियोगियों को भी काफी परेशानी उठानी पड़ती है। अफसरों को आदेश दिया गया है कि इस तरह की गलतियाें के लिए जिम्मेदार लोगों को पैनल से बाहर किया जाए। पीसीएस-2016 के मामले में दोषी विशेषज्ञों को भी बाहर किया जाएगा।

प्रतियोगियों को आशंका है कि पीसीएस-2016 प्रारंभिक परीक्षा के रिजल्ट पर हाईकोर्ट के आदेश के परिप्रेक्ष्य में आयोग सुप्रीम कोर्ट जा सकता है। ऐसे में प्रतियोगियों ने भी सुप्रीमकोर्ट में कैविएट दाखिल करने का निर्णय लिया है। ताकि, आयोग की किसी रिट पर उनका पक्ष भी सुना जा सके।

जिन तीन प्रश्नों को न्यायालय ने हटाया है
1. शहरी अधोसंरचना से संबंधित प्रश्न 
2. कौन सुमेलित नहीं है-
विटिकल्चर-सब्जी
वेगीकल्चर-मत्स्य
पिसिकल्चर-बागवानी
ओलरीकल्चर- अंगूर
3.विश्व में अब तक खोजी गई सबसे महंगी धातु
000
प्रश्न जिसके दो उत्तर सही माने गए हैं
1.कौन सुमेलित नहीं है-
फान - आल्प्स
बोरा - पोलैंड
मिस्ट्रल - राइन घाटी
खमसीन -  मिस्र


पेपर आउट होने का आरोप लगाते हुए अभ्यर्थियों ने समीक्षा अधिकारी-सहायक समीक्षा अधिकारी (आरओ-एआरओ) प्रारंभिक परीक्षा-2016 निरस्त करने की मांग की है। भ्रष्टाचार मुक्ति मोर्चा की ओर से मांग के समर्थन में शुक्रवार को कलेक्ट्रेट में राष्ट्रपति, राज्यपाल और मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपा गया। प्रतियोगियों का कहना था कि 27 नवंबर को हुई परीक्षा के दोनों पेपर आउट हो गए थे।

मोर्चा के पदाधिकारियों ने पीसीएस-2016 प्रारंभिक परीक्षा के मामले में हाईकोर्ट के आदेश के परिप्रेक्ष्य में प्रतियोगियों को बधाई दी। आरओ-एआरओ की परीक्षा निरस्त करने तथा जागरूकता के मद्देनजर मोर्चा की ओर से शनिवार को इलाहाबाद विश्वविद्यालय से कैंडल मार्च निकाले जाने की भी घोषणा की गई है। ज्ञापन सौंपने वालों में कौशल सिंह, अनिल उपाध्याय, हर्षवर्धन पाठक, प्रवीण सिंह, मंसूर आलम आदि शामिल रहे।

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