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UPPSC : सीबीआई जांच के बावजूद हुई ज्वाइनिंग, स्थायीकरण व प्रमोशन भी कर दिया

Thu, 04 Sep 2025 12:45 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 04 Sep 2025 12:45 PM IST
सार

सीबीआई सात वर्षों तक अपर निजी सचिव (एपीएस भर्ती)-2010 की जांच करती रही और इस बीच सभी चयनित अभ्यर्थियों को ज्वाॅइन कराने के साथ उनका स्थायीकरण और प्रमोशन भी कर दिया गया।

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UPPSC Despite CBI investigation, joining, stabilization and promotions were also done
यूपीपीएससी। UPPSC - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सीबीआई सात वर्षों तक अपर निजी सचिव (एपीएस भर्ती)-2010 की जांच करती रही और इस बीच सभी चयनित अभ्यर्थियों को ज्वाॅइन कराने के साथ उनका स्थायीकरण और प्रमोशन भी कर दिया गया। एपीएस भर्ती-2010 में धांधली के सुबूत मिलने के बाद सीबीआई ने शुरुआती जांच में ही शासन से सिफारिश की थी कि नियुक्ति की प्रक्रिया तत्काल रोक दी जाए लेकिन प्रभावशाली लोगों के दबाव में शासन ने वर्ष 2023 में 26 अभ्यर्थियों को ज्वाॅइन कर दिया। वहीं, 221 चयनित अपर निजी सचिवों का स्थायीकरण कर दिया और वर्ष 2025 में 234 अपर निजी सचिवों की वरिष्ठता सूची तक जारी कर दी गई।

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प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के अध्यक्ष अवनीश पांडेय व मीडिया प्रभारी प्रशांत पांडेय ने सीबीआई, भारत सरकार व उत्तर प्रदेश सरकार को पत्र लिखकर भर्ती में धांधली से चयनित होने वाले 31 अपर निजी सचिवों के विवरण देते हुए इनके विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है और सीबीआई जांच पूरी होने तक एपीएस परीक्षा-2010 के चयनितों से काम न लेने का अनुरोध किया है। पत्र में यह आरोप लगाया गया है कि चयनितों में पूर्व मुख्यमंत्री के अपर निजी सचिव की पत्नी व सगा भांजा भी शामिल है, जिनके चयन में भ्रष्टाचार किया गया। यह भी दावा किया गया है कि अपर निजी सचिव की पत्नी अर्हकारी परीक्षा हिंदी टाइपिंग में अनुत्तीर्ण होने के कारण पात्र नहीं थीं।
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परीक्षक ने उत्तर पुस्तिका पर टिप्पणी अंकित कर फेल किया था लेकिन तत्कालीन अध्यक्ष के आदेश पर फर्जी तरीके से उत्तीर्ण किया गया। अपर निजी सचिव का भांजा भी हिंदी टाइपिंग में फेल था लेकिन मूल्यांकन में धांधली कर उसे उत्तीर्ण किया गया। अनारक्षित कोटे के तहत आवेदन करने वाले एक अभ्यर्थी को ओबीसी कोटे का लाभ देकर चयनित किया गया।

आरोप यह भी है कि आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष व तत्कालीन सचिव के निजी स्टाफ में कार्यरत रहे एक अपर निजी सचिव ने अति गोपन विभाग से अपनी सामान्य हिंदी की उत्तर पुस्तिका को निकलवाकर उसके भीतर पृष्ठ बदलकर व परीक्षक की राइटिंग की फूहड़ नकल करके 20 अंक अधिक लिखवा लिए जिसमें स्पष्ट रूप से भिन्नता है।

इसके अलावा एक चयनित अभ्यर्थी पर आरोप लगाया गया है कि मेडिकल कॉलेज में भर्ती में भ्रष्टाचार के आरोप बर्खास्त किए गए पूर्व अपर निजी सचिव के छोटे भाई ने हिंदी शॉर्टहैंड परीक्षा में लगभग 15 फीसदी गलतियां की थीं और उसे 105 अंक मिलने चाहिए थे लेकिन मूल्यांकन में धांधली की गई और त्रुटियों को छह फीसदी दिखाकर 122 अंक देकर पास कर दिया गया। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी कोटे में इनका चयन करने के लिए दूसरे पात्र अभ्यर्थी की आरक्षण श्रेणी बदल दी गई।

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एपीएस भर्ती में धांधली के कई दूसरे आरोप भी

  • कई अभ्यर्थियों ने फर्जी व कूटरचित कंप्यूटर प्रमाणपत्र लगाकर अपना चयन कराया।
  • कई अभ्यर्थियों ने मुख्य चिकित्साधिकारी की ओर से 40 फीसदी विकलांग होने कार फर्जी प्रमाणपत्र लगाया।
  • एक अभ्यर्थी ने प्राइवेट डिग्री कॉलेज से साठगांठ कर कंप्यूटर सर्टिफिकेट की मार्कशीट पर छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय कानपुर अंकित करा लिया जबकि विश्वविद्यालय ने संबंधित सर्टिफिकेट कोर्स कभी संचालित ही नहीं किया गया।
  • शॉर्टहैंड व टाइप टेस्ट में केवल आठ फीसदी गलती अनुमन्य थी लेकिन 15 फीसदी तक गलती करने वाले अभ्यर्थियों का भी चयन किया गया।
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