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आयोग ने निरस्त की आरओ/एआरओ 2016 की परीक्षा

Tue, 14 Jan 2020 11:03 PM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 14 Jan 2020 11:03 PM IST
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UPPSC cancelled ro aro 2016 exam
UPPSC cancelled ro aro 2016 exam
तीन मई को दोबारा आयोजित की जाएगी प्रारंभिक परीक्षा
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पुनर्परीक्षा में पहले से पंजीकृत अभ्यर्थी ही हो सकेंगे शामिल
27 नवंबर 2016 को हुई थी परीक्षा, 385191 अभ्यर्थी थे पंजीकृत
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) ने तीन साल पहले हुई समीक्षा अधिकारी (आरओ)/सहायक समीक्षा अधिकारी (एआरओ)-2016 की प्रारंभिक परीक्षा निरस्त कर दी है। पेपर आउट होने के विवाद में तीन वर्षों से प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम फंसा हुआ था। आयोग ने पुनर्परीक्षा कराने का निर्णय लिया है, जो इस साल तीन मई को आयोजित की जाएगी। इस परीक्षा में सिर्फ पुराने अभ्यर्थी शामिल हो सकेंगे। इसके लिए न तो कोई विज्ञापन जारी किया जाएगा और न ही कोई आवेदन लिया जाएगा।
आरओ/एआरओ-2016 की प्रारंभिक परीक्षा 27 नवंबर 2016 को आयोजित की गई थी। आरओ/एआरओ के 361 पदों पर भर्ती के लिए 21 जिलों के 827 केंद्रों में परीक्षा आयोजित की गई थी। परीक्षा के लिए 385191 अभ्यर्थी पंजीकृत थे। परीक्षा दो पालियों में हुई थी। पहली पाली में 204907 (53.20 फीसदी) और दूसरी पाली में 203261 (52.77) फीसदी अभ्यर्थी शामिल हुए थे। परीक्षा के दौरान लखनऊ के एक केंद्र से व्हाट्सएप पर पेपर वायरल हो गया था और इस मामले में आईपीएस अमिताभ ठाकुर की ओर से लखनऊ के हजरतगंज थाने में रिपोर्ट दर्ज करा दी थी। मामला न्यायालय में चल रहा है और अब तक अंतिम रूप से इसका निस्तारण नहीं हो सका है। ऐसे में आयोग ने परीक्षा निरस्त करने का निर्णय लिया है। परीक्षा नियंत्रक अरविंद कुमार मिश्र के अनुसार आरओ/एआरओ-2016 की परीक्षा के लिए पंजीकृत अभ्यर्थियों को पुनर्परीक्षा में शामिल होने की अनुमति होगी। इसके लिए अलग से कोई विज्ञापन जारी नहीं किया जाएगा।
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जांच के जाल में फंसा रहा कॅरियर, मिली राहत
-अनिश्चितता से बचने को निरस्त की गई परीक्षा
-मामले में दोबारा जांच कराने का हुआ था आदेश
प्रयागराज। आरओ/एआरओ-2016 की प्रारंभिक परीक्षा में पेपर आउट होने के मामले में तीन साल तक जांच चलती रही और परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों का कॅरियर दांव पर लगा रहा। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) ने आखिर तीन साल के लंबे इंतजार के बाद अनिश्चितता से बचने के लिए परीक्षा का टालने का निर्णय लिया। प्रतियोगी छात्रों ने आयोग के इस निर्णय का स्वागत किया है।
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27 नवंबर 2016 को हुई प्रारंभिक परीक्षा में पेपर आउट होने के मामले में आईपीएस अफसर अमिताभ ठाकुर की ओर से रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। मामले की जांच सीबीसीआईडी को सौंपी गई। सीबीसीआईडी ने जांच पूरी होने के बाद अंतिम रिपोर्ट 21 सितंबर 2018 को न्यायालय में प्रस्तुत की गई, जिसमें सीबीसीआईडी की ओर से बताया गया कि परीक्षा में पेपर आउट होने के कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिले हैं। सीबीसीआईडी की अंतिम रिपोर्ट पर अमिताभ ठाकुर ने आपत्ति दाखिल कर दी। विशेष न्यायाधीश सीसीबीआईडी, लखनऊ ने एक जनवरी 2020 को जारी आदेश के तहत सीबीसीआईडी की ओर से दाखिल अंतिम रिपोर्ट निरस्त कर दी और मामले की पुन: जांच कराने के आदेश दिए।
मामले में आयोग की दो सदस्यीय जांच समिति की संस्तुति और न्यायिक मजिस्ट्रेट सीबीसीआईडी लखनऊ के आदेश को संज्ञान में लेते आयोग ने विचार किया कि पुन: जांच कराई जाने से प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम अनिश्चितकाल तक अधर में लटक जाएगा, क्योंकि जब तक आपराधिक वाद निस्तारित नहीं होता, तब तक प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम घोषित नहीं किया जा सकेगा। ऐसे में अनिश्चितता की स्थिति बनी रहेगी। आयोग के सचिव जगदीश का कहना है कि इन तमाम परिस्थितियों को देखते हुए प्रारंभिक परीक्षा निरस्त करने का निर्णय लिया गया है। भ्रष्टाचार मुक्ति मोर्चा के कौशल सिंह ने आयोग के इस निर्णय का स्वागत किया। कौशल इस मुद्दे पर लगातार आंदोलन कर रहे थे और परीक्षा निरस्त किए जाने की मांग को लेकर आयोग में कई बार ज्ञापन भी दे चुके थे।

छह माह पहले आयोग ने जारी की थी उत्तरकुंजी
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग ने पिछले साल 22 जुलाई को आरओ/एआरओ की अनंतिम उत्तरकुंजी जारी कर दी थी और उत्तरकुंजी पर 26 जुलाई तक आपत्तियां आमंत्रित की थीं। ऐसे में अभ्यर्थियों को लगा कि आयोग जल्द ही आपत्तियों का निस्तारण करते हुए अंतिम उत्तरकुंजी और प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम जारी कर देगा, लेकिन पेपर आउट होने का विवाद उस समय तक बरकरार था और मामला न्यायालय में लंबित था। आयोग ने अनंतिम उत्तरकुंजी में सामान्य अध्ययन के चार सवाल हटाए थे और दो सवालों के दो-दो विकल्पों को सही माना था।
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