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उच्चीकृत माध्यमिक विद्यालयों की नहीं सुधरी दशा
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sat, 11 Jun 2016 12:50 AM IST
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निजी स्कूलों की आई शामत
- फोटो : concept photo
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प्रदेश के राजकीय इंटर कॉलेजों में पिछले 12 वर्ष से प्रमोशन प्रक्रिया ठप होने और नए शिक्षकों और प्रधानाचार्यों की नियुक्ति नहीं होने से हजारों की संख्या में शिक्षकों के पद खाली हैं। राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत उच्चीकृत विद्यालयों की स्थिति सबसे अधिक खराब है। राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत जूनियर हाईस्कूलों को राजकीय उच्च माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालयों राजकीय इंटर कॉलेज के रूप में उच्चीकृत तो कर दिया गया, परंतु संसाधन नहीं बढ़ाने से स्कूलों में शिक्षा के स्तर में कोई बदलाव नहीं आया है। यही कारण है कि इस बार यूपी बोर्ड के रिजल्ट में शासकीय विद्यालयों के मुकाबले मान्यता प्राप्त एवं वित्तविहीन विद्यालयों का रिजल्ट अच्छा रहा।
प्रदेश सरकार की ओर से बीते शैक्षिक सत्र के दौरान बड़ी संख्या में सरकारी जूनियर हाईस्कूलों को उच्चीकृत करके हाईस्कूल और इंटरमीडिएट स्तर का दर्जा दिया गया था। इन विद्यालयों में शिक्षकों केसाथ प्रधानाचार्य के बड़ी संख्या में पद खाली होने से पढ़ाई-लिखाई का स्तर नहीं सुधर रहा है। इन विद्यालयों को उच्चीकृत करने के बाद भी प्रदेश में शिक्षकों की नई भर्ती नहीं हुई। प्रदेश में इस समय 565 जीआईसी-जीजीआईसी एवं 811 राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षण कार्य चल रहा है। इन विद्यालयों में संस्था प्रमुख के 80 फीसदी पद खाली चल रहे हैं।
राजकीय शिक्षक संघ से जुड़े एक पदाधिकारी ने बताया कि पिछले 10 वर्ष से राजकीय कॉलेजों में शिक्षकों केपदों पर नियुक्ति नहीं होने और विभागीय प्रोन्नति नहीं होने से बड़ी संख्या में कॉलेजों में प्रधानाचार्य केपद खाली हैं। जिन माध्यमिक विद्यालयों को उच्चीकृत करके इंटर कॉलेज में बदला गया है, वहां प्रधानाचार्य के पद पर अभी पूर्व माध्यमिक स्कूलों के दौरान कार्यरत प्रधानाध्यापक ही काम कर रहे हैं।
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प्रदेश सरकार की ओर से बीते शैक्षिक सत्र के दौरान बड़ी संख्या में सरकारी जूनियर हाईस्कूलों को उच्चीकृत करके हाईस्कूल और इंटरमीडिएट स्तर का दर्जा दिया गया था। इन विद्यालयों में शिक्षकों केसाथ प्रधानाचार्य के बड़ी संख्या में पद खाली होने से पढ़ाई-लिखाई का स्तर नहीं सुधर रहा है। इन विद्यालयों को उच्चीकृत करने के बाद भी प्रदेश में शिक्षकों की नई भर्ती नहीं हुई। प्रदेश में इस समय 565 जीआईसी-जीजीआईसी एवं 811 राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षण कार्य चल रहा है। इन विद्यालयों में संस्था प्रमुख के 80 फीसदी पद खाली चल रहे हैं।
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राजकीय शिक्षक संघ से जुड़े एक पदाधिकारी ने बताया कि पिछले 10 वर्ष से राजकीय कॉलेजों में शिक्षकों केपदों पर नियुक्ति नहीं होने और विभागीय प्रोन्नति नहीं होने से बड़ी संख्या में कॉलेजों में प्रधानाचार्य केपद खाली हैं। जिन माध्यमिक विद्यालयों को उच्चीकृत करके इंटर कॉलेज में बदला गया है, वहां प्रधानाचार्य के पद पर अभी पूर्व माध्यमिक स्कूलों के दौरान कार्यरत प्रधानाध्यापक ही काम कर रहे हैं।
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