UP : भूमि कब्जाने के मामले में आजम खान के करीबी सेवानिवृत्त डिप्टी एसपी को हाईकोर्ट से राहत
इसके पहले वरिष्ठ अधिवक्ता एनआई जाफरी ने याची की ओर से पक्ष रखा। कहा कि सेवानिवृत्त के पांच साल बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। जबकि, याची की उसमें कोई भूमिका नहीं रही है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रामपुर के अजीमनगर थाने में किसानों की भूमि कब्जाने के मामले में सेवानिवृत्त सीओ आले हसन को राहत दे दी है। हाईकोर्ट उन्हें अंतरित राहत देते हुए 12 जुलाई तक गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। साथ ही मामले में सरकार से जानकारी मांगी है। मामले की सुनवाई के लिए पांच जुलाई की तिथि तय की है। यह आदेश न्यायमूर्ति राहुल चतुर्वेदी की खंडपीठ ने आले हसन की 27 अग्रिम जमानत अर्जियों पर सुनवाई करते हुए दिया है।
इसके पहले वरिष्ठ अधिवक्ता एनआई जाफरी ने याची की ओर से पक्ष रखा। कहा कि सेवानिवृत्त के पांच साल बाद उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। जबकि, याची की उसमें कोई भूमिका नहीं रही है। न ही उसने जबरदस्ती किसी भी किसान की भूमि का बैनामा मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय के लिए कराया। अपर महाधिवक्ता एमसी चतुर्वेदी ने अग्रिम जमानत अर्जी का विरोध किया।
किसानों को धमकाकर जमीन पर कब्जे का आरोप
कहा कि वह सपा शासन के दौरान अजीमनगर थाना सहित अन्य थानों में थानेदार सहित सेवानिवृत्त के अंतिम दिनों में सीओ रहे और उन्होंने किसानों को धमकाकर उनकी भूमि पर बिना पैसा दिए जबरन कब्जा करा दिया। किसानों का उत्पीड़न किया और रंजिशन झूठे मुकदमों में फंसाया। पुलिस पर उनके साथ मारपीट करने का भी आरोप लगाया गया था।
इन आरोपों के साथ आलियागंज के किसानों ने अजीमनगर थाने में 27 मुकदमे दर्ज कराए थे। इस मुकदमे में आजम खां, उनकी पत्नी तंजीन फातमा, बेटा अब्दुल्ला आजम भी सह आरोपी हैं। मामले में पुलिस ने आरोप पत्र दाखिल कर दिया है। कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने केबाद तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए उनकी गिरफ्तारी पर 12 जुलाई तक रोक लगा दी है।
अवैध रूप से जमीन खरीदने के आरोपियों की राहत बरकरार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मौलाना जौहर अली ट्रस्ट के रजिस्ट्रार अदीब आजम, निफत अफलाख, जकीउर्रहमान सिद्दीकी, मोहम्मद फसीह जैदी, सलीम कासिम, नसीर अहमद खां, मुश्ताक अहमद सिद्दीकी के खिलाफ रामपुर की विशेष अदालत में चल रहे आपराधिक मामलों की सुनवाई पर अंतरिम रोक बरकरार रखी है। साथ ही मामले की सुनवाई के लिए पांच जुलाई की तिथि तय की है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति राहुल चतुर्वेदी की पीठ कर रही थी। प्रकरण में कानून का उल्लंघन कर जबरन बैनामा कराने के आरोप में 70 से अधिक मुकदमे दर्ज किए गए हैं। हाईकोर्ट में सभी एक साथ सुनवाई चल रही है।