{"_id":"5da21be88ebc3e93a9533453","slug":"up-madarsa-board-allahabad-news-ald257345730","type":"story","status":"publish","title_hn":"मदरसों में कौऩ पढ़ाएगा एनसीईआरटी की किताबें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मदरसों में कौऩ पढ़ाएगा एनसीईआरटी की किताबें
विज्ञापन
UP Madarsa Board
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ज्यादातर पुस्तकें हिंदी और अंग्रेजी में, विषय विशेषज्ञों की भी कमी
प्रयागराज। मदरसों में एनसीईआरटी की पुस्तकें लागू कर दी गई हैं, लेकिन समस्या उन्हें पढ़ाने को लेकर खड़ी हो गई है। ज्यादातर किताबें हिंदी और अंग्रेजी भाषा में हैं। विज्ञान विषयों की पुस्तकें तो सिर्फ अंग्रेजी में ही हैं। इसके विपरीत अधिकतर अध्यापक उर्दू माध्यम के हैं। मदरसों में कई विषयों के विशेषज्ञ अध्यापक भी नहीं हैं। ऐसे में सवाल खड़ा हो गया है कि एनसीईआरटी की पुस्तकें पढ़ाएगा कौन?
मदरसों में भी एनसीईआरटी की किताबें लागू करने के साथ उपलब्ध भी करा दी गईं हैं। हाईस्कूल और इंटर के समकक्ष पाठ्यक्रमों की भौतिकी, रसायन, गणित समेत कई विषयों की किताबें तो सिर्फ अंग्रेजी माध्यम में हैं। केंद्र और प्रदेश सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत मदरसों में हिंदी और अंग्रेजी माध्यम वाले अधिकतम तीन अध्यापकों की नियुक्ति की जा सकती है। केंद्र की योजना में स्नातक करने वाले शिक्षकों को छह हजार तथा परास्नातक वालों को 12 हजार रुपये प्रति महीने मानदेय देने का प्रावधान है। इसके अलावा प्रदेश सरकार की ओर से क्रमश: दो और तीन हजार रुपये दिए जाते हैं, लेकिन ज्यादातर मदरसों में एक या दो शिक्षकों की ही नियुक्ति है और उन्हें भी 42 महीनों से वेतन नहीं मिला है। केंद्र सरकार से इस मद में बजट ही नहीं आया। ऐसे में मानदेय पर शिक्षकों की संख्या भी गिनती की है। तेलियरगंज के सदिकुल उलूम मेंहदौरी के प्रधानाचार्य शफीक का कहना है कि आठवीं तक की पढ़ाई तो हो जाती है, लेकिन इसके आगे की पढ़ाई को लेकर समस्या है। कई विषयों की सिर्फ अंग्रेजी में पुस्तकें आने से समस्या और बढ़ गई है। इस बाबत बोर्ड को अवगत कराया गया है।
छात्रों को नहीं मिल पाएंगी किताबें
सरकार ने अनुदानित मदरसों के छात्र-छात्राआें को एनसीईआरटी की किताबें मुफ्त वितरित करने की घोषणा की है। लंबे इंतजार के बाद सरकार से मदरसों को किताबें उपलब्ध करा दी गईं हैं, लेकिन छात्र-छात्राओं को नहीं मिल पाएंगी। हर विषय की मात्र नौ-नौ किताबें उपलब्ध कराई गईं हैं, जो लाइब्रेरी में रखी जाएंगी। हालांकि, विद्यार्थी लाइब्रेरी से किताबें ले सकेंगे।
विज्ञापन
विज्ञापन
प्रयागराज। मदरसों में एनसीईआरटी की पुस्तकें लागू कर दी गई हैं, लेकिन समस्या उन्हें पढ़ाने को लेकर खड़ी हो गई है। ज्यादातर किताबें हिंदी और अंग्रेजी भाषा में हैं। विज्ञान विषयों की पुस्तकें तो सिर्फ अंग्रेजी में ही हैं। इसके विपरीत अधिकतर अध्यापक उर्दू माध्यम के हैं। मदरसों में कई विषयों के विशेषज्ञ अध्यापक भी नहीं हैं। ऐसे में सवाल खड़ा हो गया है कि एनसीईआरटी की पुस्तकें पढ़ाएगा कौन?
मदरसों में भी एनसीईआरटी की किताबें लागू करने के साथ उपलब्ध भी करा दी गईं हैं। हाईस्कूल और इंटर के समकक्ष पाठ्यक्रमों की भौतिकी, रसायन, गणित समेत कई विषयों की किताबें तो सिर्फ अंग्रेजी माध्यम में हैं। केंद्र और प्रदेश सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत मदरसों में हिंदी और अंग्रेजी माध्यम वाले अधिकतम तीन अध्यापकों की नियुक्ति की जा सकती है। केंद्र की योजना में स्नातक करने वाले शिक्षकों को छह हजार तथा परास्नातक वालों को 12 हजार रुपये प्रति महीने मानदेय देने का प्रावधान है। इसके अलावा प्रदेश सरकार की ओर से क्रमश: दो और तीन हजार रुपये दिए जाते हैं, लेकिन ज्यादातर मदरसों में एक या दो शिक्षकों की ही नियुक्ति है और उन्हें भी 42 महीनों से वेतन नहीं मिला है। केंद्र सरकार से इस मद में बजट ही नहीं आया। ऐसे में मानदेय पर शिक्षकों की संख्या भी गिनती की है। तेलियरगंज के सदिकुल उलूम मेंहदौरी के प्रधानाचार्य शफीक का कहना है कि आठवीं तक की पढ़ाई तो हो जाती है, लेकिन इसके आगे की पढ़ाई को लेकर समस्या है। कई विषयों की सिर्फ अंग्रेजी में पुस्तकें आने से समस्या और बढ़ गई है। इस बाबत बोर्ड को अवगत कराया गया है।
विज्ञापन
छात्रों को नहीं मिल पाएंगी किताबें
सरकार ने अनुदानित मदरसों के छात्र-छात्राआें को एनसीईआरटी की किताबें मुफ्त वितरित करने की घोषणा की है। लंबे इंतजार के बाद सरकार से मदरसों को किताबें उपलब्ध करा दी गईं हैं, लेकिन छात्र-छात्राओं को नहीं मिल पाएंगी। हर विषय की मात्र नौ-नौ किताबें उपलब्ध कराई गईं हैं, जो लाइब्रेरी में रखी जाएंगी। हालांकि, विद्यार्थी लाइब्रेरी से किताबें ले सकेंगे।
विज्ञापन