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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   UP: High Court displeased over stay on CCTV inspection order; states committee approval not mandatory.

यूपी : सीसीटीवी जांच के आदेश को रोकने पर हाईकोर्ट नाराज, कहा- समिति की मंजूरी जरूरी नहीं

Sun, 11 Oct 2026 07:55 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 11 Oct 2026 07:55 PM IST
सार

थानों में सीसीटीवी कैमरों की निगरानी से जुड़े आदेश को प्रशासनिक समिति की मंजूरी के नाम पर रोकने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने साफ कहा कि न्यायिक आदेश के क्रियान्वयन को किसी प्रशासनिक समिति की अनुमति से नहीं बांधा जा सकता। आदेश में त्रुटि लगती है तो समिति उसे अदालत में चुनौती दे सकती है, लेकिन उसके अनुपालन में देरी करने का अधिकार नहीं है। कोर्ट ने अब आदेश की प्रति डीजीपी और ललितपुर के डीएम को भेजने का निर्देश दिया है।

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UP: High Court displeased over stay on CCTV inspection order; states committee approval not mandatory.
इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने थानों में सीसीटीवी कैमरों की कार्यशीलता की जांच के लिए न्यायिक मजिस्ट्रेटों को दिए गए आदेश को सभी जिला जजों तक पहुंचाने में देरी पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि आदेश को किसी प्रशासनिक समिति की मंजूरी के लिए नहीं रोका जा सकता। यदि समिति को आदेश में कोई त्रुटि समझ आती है तो वह उसे अदालत में चुनौती देने के लिए स्वतंत्र है, लेकिन इससे पहले उसके क्रियान्वयन को रोकने का कोई अधिकार नहीं है।
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यह टिप्पणी न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की एकल पीठ ने संदीप सिंह सोलंकी की ओर से दाखिल जमानत निरस्तीकरण अर्जी पर सुनवाई के दौरान की। कोर्ट ने चिंता जताते हुए कहा कि थानों में सीसीटीवी कैमरों का काम करना आपराधिक न्याय व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है।
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19 फरवरी 2026 को कोर्ट ने अदालती कामकाज के बाद प्रदेशभर में तैनात मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट या संबंधित मजिस्ट्रेट को संबंधित थानों में लगे सीसीटीवी कैमरों की कार्यप्रणाली का औचक निरीक्षण करने का आदेश दिया था। इसको अनुपालन के लिए सभी जिला जजों को भेजा जाना था।
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मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट के संयुक्त रजिस्ट्रार ने कोर्ट को बताया कि यह आदेश प्रशासनिक समिति के समक्ष मंजूरी के लिए लंबित होने के कारण अभी तक जिला जजों को भेजा नहीं जा सका है। इस पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई। कोर्ट ने अब आदेश की प्रति डीजीपी और ललितपुर के डीएम को अनुपालन के लिए भेजने का आदेश दिया। अगली सुनवाई 27 अक्तूबर को होगी।
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मुआवजे की अर्जी पर कार्रवाई न होना गंभीर मामला, डीजीपी से जवाब तलब

मूल मामले में याची के अधिवक्ता ने विपक्षी को मिली जमानत रद्द करने की मांग की। दलील दी कि विपक्षी को जमानत देते समय उसके पिता की ओर से 15 लाख रुपये जमा करने का आश्वासन दिया गया था। जबकि जमानत मिलने के बाद भी तय आश्वासन के अनुसार 15 लाख रुपये जमा नहीं किए। वहीं, विपक्षी के वकील ने दलील दी कि उसके पिता ने वास्तविक लेन-देन की पूरी जानकारी के बिना यह आश्वासन दिया था। इसलिए अब 15 लाख रुपये जमा करने की शर्त में बदलाव करने संबंधी संशोधन अर्जी दाखिल की गई है।

साथ ही यह आरोप लगाया कि पुलिस विपक्षी और उसके परिवार को परेशान कर रही है। उसे गैंगस्टर एक्ट के एक अन्य मामले में गिरफ्तार कर लिया। इस अवैध गिरफ्तारी के लिए कोर्ट की ओर से दिए गए एक लाख रुपये मुआवजे के आदेश का अनुपालन डीएम ने अब तक नहीं किया, जबकि मुआवजे की अर्जी दी जा चुकी है। कोर्ट ने कहा कि डीएम के समक्ष मुआवजे के लिए दिए गए आवेदन पर कार्रवाई नहीं होना गंभीर मामला है। कोर्ट ने पुलिस महानिदेशक से जवाब तलब किया है। पूछा है कि 19 फरवरी के आदेश के अनुपालन में संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है।

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