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यूपी सरकार ने हाईकोर्ट को बताई मजदूरों के पुनर्वास की नीति
Mon, 01 Jun 2020 07:16 PM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Mon, 01 Jun 2020 07:16 PM IST
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prayagraj news
- फोटो : prayagraj
प्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट को प्रवासी मजदूरों के पुनर्वास तथा कोरोना संक्रमण रोकने को लेकर किए जा रहे उपायों की जानकारी दी। राज्य सरकार के श्रम विभाग तथा चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर अब तक उठाए गए कदमों के बारे में बताया। कोर्ट ने याची से सरकार की ओर से दी गई जानकारी पर जवाब मांगा है। याचिका की सुनवाई नौ जून को होगी।
अधिवक्ता रितेश श्रीवास्वत और गौरव त्रिपाठी की जनहित याचिका पर मुख्य न्यायाधीश गोविन्द माथुर तथा न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा की खंडपीठ ने सुनवाई की। कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा था कि दूसरे राज्यों से आ रहे मजदूरों एवं उनके परिवार के इलाज एवं, पुनर्वास सहित ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना वायरस फैलने से रोकने की नीति व मानक क्या हैं।
कोर्ट ने यह भी पूछा था कि बाहर से लौट कर आए मजदूरों को जीविकोपार्जन के लिए दूसरे राज्यों में जाने में कमी लाने के लिए प्रदेश में पुनर्वास की क्या योजना है। इसके जवाब मे मुख्य स्थायी अधिवक्ता ने दस्तावेज दाखिल किए हैं।
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याचिका में कहा गया है कि प्रत्येक नागरिक को देश के किसी कोने में जीविकोपार्जन के लिए जाने और निवास का संवैधानिक अधिकार है। मजदूरों की मेहनत के बल पर विकास करने वाले राज्यों का वैधानिक दायित्व है कि वे उन्हें भूखे बेहाल होकर राज्य छोडने को विवश न करें। उनके रहने खाने का इंतजाम करें।
याची का कहना है कि मजदूर सडकों पर भूखे प्यासे परिवार सहित अपने राज्य के लिए निकल पड़े हैं। ट्रेनों में उनके खाने का इंतजाम नहीं है। खाने को लेकर स्टेशनों पर अफरातफरी मचाने की घटनाएं हुई हैं। याचिका में मजदूरों के मानव गरिमा के साथ भोजन की व्यवस्था करने का समादेश जारी करने की मांग की गई है।
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अधिवक्ता रितेश श्रीवास्वत और गौरव त्रिपाठी की जनहित याचिका पर मुख्य न्यायाधीश गोविन्द माथुर तथा न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा की खंडपीठ ने सुनवाई की। कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा था कि दूसरे राज्यों से आ रहे मजदूरों एवं उनके परिवार के इलाज एवं, पुनर्वास सहित ग्रामीण क्षेत्रों में कोरोना वायरस फैलने से रोकने की नीति व मानक क्या हैं।
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कोर्ट ने यह भी पूछा था कि बाहर से लौट कर आए मजदूरों को जीविकोपार्जन के लिए दूसरे राज्यों में जाने में कमी लाने के लिए प्रदेश में पुनर्वास की क्या योजना है। इसके जवाब मे मुख्य स्थायी अधिवक्ता ने दस्तावेज दाखिल किए हैं।
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याचिका में कहा गया है कि प्रत्येक नागरिक को देश के किसी कोने में जीविकोपार्जन के लिए जाने और निवास का संवैधानिक अधिकार है। मजदूरों की मेहनत के बल पर विकास करने वाले राज्यों का वैधानिक दायित्व है कि वे उन्हें भूखे बेहाल होकर राज्य छोडने को विवश न करें। उनके रहने खाने का इंतजाम करें।
याची का कहना है कि मजदूर सडकों पर भूखे प्यासे परिवार सहित अपने राज्य के लिए निकल पड़े हैं। ट्रेनों में उनके खाने का इंतजाम नहीं है। खाने को लेकर स्टेशनों पर अफरातफरी मचाने की घटनाएं हुई हैं। याचिका में मजदूरों के मानव गरिमा के साथ भोजन की व्यवस्था करने का समादेश जारी करने की मांग की गई है।