फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   UP government should implement its decisions in two months for a fair and fair discussion

हाईकोर्ट का आदेश : सही व निष्पक्ष विवेचना के लिए यूपी सरकार दो माह में लागू करे अपने निर्णय

Mon, 05 Sep 2022 11:39 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 05 Sep 2022 11:39 PM IST
सार

कोर्ट ने कहा कि हमारे न्याय शास्त्र में जब तक दोषी न साबित कर दिया जाए, हर अभियुक्त निर्दोष माना जाता है। इसलिए अभियुक्त को सही व निष्पक्ष विवेचना एवं स्वच्छ विचारण तथा संतुलित अभियोजन का अधिकार है।

विज्ञापन
UP government should implement its decisions in two months for a fair and fair discussion
Prayagraj News : इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आपराधिक मामलों की उचित एवं निष्पक्ष विवेचना को लेकर अपर मुख्य सचिव गृह की अध्यक्षता में गठित कमेटी के फैसलों को दो माह के भीतर प्रभावी रूप से लागू करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति संजय कुमार सिंह ने रामपुर के वसीम, अलीगढ़ के आकाश व नवाबगंज, प्रयागराज के विवेक सिंह की अपील व जमानत अर्जी की सुनवाई करते हुए दिया है। 

विज्ञापन



कोर्ट ने कहा कि हमारे न्याय शास्त्र में जब तक दोषी न साबित कर दिया जाए, हर अभियुक्त निर्दोष माना जाता है। इसलिए अभियुक्त को सही व निष्पक्ष विवेचना एवं स्वच्छ विचारण तथा संतुलित अभियोजन का अधिकार है।  कोर्ट ने कहा कि सही एवं पूर्वाग्रह रहित विवेचना आपराधिक न्यायशास्त्र का मूलभूत आधार है जो संविधान के अनुच्छेद 20 और 21 की अवधारणा के अनुरूप है। 

विज्ञापन

कोर्ट ने कहा हर अपराध की विवेचना कानून के मुताबिक पूरी की जानी चाहिए। सही विवेचना विवेचक का प्रथम दायित्व है। प्रत्येक सभ्य समाज में पुलिस को विवेचना कर अपराधियों को दंडित कराने का अधिकार है। समाज हित में जांच एजेंसी ईमानदार व निष्पक्ष होनी चाहिए। उसे झूठे सबूत इकट्ठा नहीं करना चाहिए अन्यथा आम लोगों का एजेंसी से भरोसा उठ जाएगा। 


कोर्ट ने अपर मुख्य सचिव गृह की कमेटी के फैसलों को अक्षरश: लागू करने का निर्देश देते हुए प्रदेश के सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों व सभी पुलिस अधीक्षकों को प्रेषित करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने पीड़िता के बयान महिला अधिकारी द्वारा आडियो वीडियो में कराये जाने का निर्देश दिया है।

10 अधिकारियों की कमेटी द्वारा लिए गए ये निर्णय
1. शव विच्छेदन व चोट की रिपोर्ट या पूरक चिकित्सा रिपोर्ट हस्त लिखित न होकर टाइप होगी।
2. शव विच्छेदन के दौरान शवों के डीएनए, फिंगर प्रिंट के सैंपल अनिवार्य रुप से लिए जाएंगे। साफ्टवेयर विकसित किया जाएगा।
3. बंदूक की गोली लगने की स्थिति में पूरे शरीर का नहीं, केवल जहां गोली लगी है, उसी अंग का एक्सरे किया जाएगा।
4. शव विच्छेदन के दौरान चोटों की रंगीन फोटोग्राफ ी की जाएगी। इसे केस डायरी का हिस्सा बनाया जाएगा।
5. केस डायरी में अनुक्रमणिका अंकित होगी।
6. चार्जशीट के साथ विवेचना का सारांश लिखा जाएगा।
7. अभियोगों के पर्यवेक्षक अधिकारी उचित व प्रभावी पर्यवेक्षण करेंगे। केवल डाकघर जैसा बर्ताव नहीं करेंगे।
8. पुलिस रिपोर्ट यथाशीघ्र अदालत में पेश होगी। अपने पास लंबे समय तक नहीं रखेंगे।
9. जिसमे आरोप पत्र दाखिल हो, आगे विवेचना अनुमति लेकर की जाएगी।
10. जहां गवाहों का बयान आडियो वीडियो इलेक्ट्रॉनिक माध्यम में दर्ज है, को केस डायरी का हिस्सा बनाया जाएगा। सीडी, पेन ड्राइव अदालत में पेश होगी।
11. केस डायरी का फॉंट साइज बढ़ाया जाएगा।
12. इलेक्ट्रानिक सबूत मामले में साक्ष्य अधिनियम की धारा 65 बी  का पालन होगा।
13. पर्यवेक्षकीय अधिकारी सघन पर्यवेक्षण करेंगे।
14. प्रत्येक जिले में संयुक्त निदेशक अभियोजन की अध्यक्षता में विधि प्रकोष्ठ स्थापित हो। जो विवेचकों को कानून की अद्यतन जानकारी देता रहे।
15. तकनीकी व अन्य विभागों की सहायता ली जाए।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed