फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Up: Disproportionate assets complaints to be investigated after confirmation of allegations: HC

यूपी : आरोप की पुष्टि के बाद की जाए आय से अधिक संपत्ति की शिकायतों की जांच - हाईकोर्ट

Thu, 07 Oct 2021 11:15 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 07 Oct 2021 11:15 PM IST
सार

जांच के लिए जारी शासनादेशों का पालन जरूरी, हेड कांसटेबिल के खिलाफ शिकायत पर एडीजी को निर्णय लेने का निर्देश

विज्ञापन
Up: Disproportionate assets complaints to be investigated after confirmation of allegations: HC
allahabad high court - फोटो : social media

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि सरकारी सेवकों के खिलाफ प्राप्त शिकायतों की जांच व उसके निस्तारण के लिए प्रदेश सरकार द्वारा जारी शासनादेशों का कड़ाई से पालन किया जाए। कोर्ट ने कहा कि प्राप्त शिकायतों पर कार्रवाई करने से पूर्व शिकायतकर्ता से यह पुष्टि की जाए कि शिकायत पर उसी के हस्ताक्षर हैं और उससे समुचित साक्ष्य लेने के बाद ही कार्रवाई शुरू की जाए।
विज्ञापन


हाईकोर्ट ने इसी के साथ आय से अधिक संपत्ति को लेकर जारी जांच के मामले में इटावा में तैनात हेड कांसटेबिल महेश कुमार पाठक की याचिका को निस्तारित करते हुए एडीजी (लोक शिकायत) पुलिस मुख्यालय, महानिदेशक लखनऊ को दो माह में निर्णय लेने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति पंकज भाटिया ने दिया है।
विज्ञापन


कोर्ट ने कहा कि शिकायतों की जांच के लिए सरकार द्वारा जारी शासनादेश 9 मई 1997, 1 अगस्त 1997, 19 अप्रैल 2012 व 6 अगस्त 2016 पर विचार कर जांच को निरस्त करने के संबंध में निर्णय लिया जाए। आय से अधिक संपत्ति को लेकर याची के खिलाफ जांच डिप्टी एसपी आगरा, भ्रष्टाचार निवारण संगठन, अपराध अनुसंधान विभाग, आगरा द्वारा की जा रही है। इस जांच को याचिका दाखिल कर चुनौती दी गई थी। याची के वरिष्ठ अधिवक्ता विजय गौतम का तर्क था कि हाईकोर्ट के कुमदेश कुमार शर्मा केस में दिए निर्णय के आधार पर राज्य सरकार ने शासनादेश जारी कर समूह क, ख, ग, घ के सरकारी कर्मचारियों के विरुद्ध  प्राप्त शिकायतों के निस्तारण के लिए शासनादेशों के अनुसार ही कार्रवाई करने का निर्देश दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन


अधिवक्ता का कहना था कि शासनादेशों में दी गई प्रक्रिया का पालन किए बगैर याची के खिलाफ जांच जारी है, जो गलत व गैरकानूनी है। सरकार ने शासनादेश 9 मई 1997 व 1 अगस्त  1997 जारी कर निर्देश दिया है कि शिकायतों के संबंध में कार्रवाई करने से पूर्व शिकायतकर्ता को पत्र भेज कर यह पुष्टि की जाए कि शिकायत पर उसी के हस्ताक्षर हैं और शिकायत पर संतोष हो गया है कि शिकायत तथ्यों पर आधारित है। यही नहीं, शासनादेश के मुताबिक शिकायतकर्ता से शपथ पत्र मुहैया कराने व शिकायत की पुष्टि हेतु साक्ष्य उपलब्ध कराए जाने के बाद जांच की कार्रवाई आगे बढ़ाई जाए। 


याची का कहना था कि वह 1989 में नियुक्त हुआ। उसने दर्जनों एनकाउंटर किए और उसे अधिकारियों ने दर्जनों प्रशस्ति-पत्र भी दिए हैं। कहा गया था कि याची को बगैर शिकायत की कॉपी दिए उसके खिलाफ जांच की कार्रवाई शासनादेशों में विहित प्रक्रिया को दरकिनार कर की जा रही है। कोर्ट ने याची के मामले में नियमानुसार निर्णय लेने का अधिकारी को निर्देश दिया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed