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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   UP: Court dismisses petition in fake degree case of Deputy CM Keshav Prasad Maurya

यूपी : डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य को बड़ी राहत, फर्जी डिग्री मामले में न्यायालय ने खारिज की याचिका

Sat, 04 Sep 2021 10:15 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sat, 04 Sep 2021 10:15 PM IST
सार

डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य को न्यायालय से बड़ी राहत मिली है। फर्जी डिग्री के केस में एसीजेएम कोर्ट ने आरटीआई एक्टिविस्ट दिवाकर त्रिपाठी की याचिका खारिज कर दी। 

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UP: Court dismisses petition in fake degree case of Deputy CM Keshav Prasad Maurya
समारोह में उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य पर फर्जी डिग्री का प्रयोग करने का आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज कराने के लिए दी गई अर्जी को मजिस्ट्रेट कोर्ट ने खारिज कर दिया है। यह आदेश अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट नम्रता सिंह ने आरटीआई कार्यकर्ता दिवाकर नाथ त्रिपाठी के द्वारा दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 156 (3) के अंतर्गत प्रस्तुत प्रार्थना पत्र पर उनके अधिवक्ता के तर्कों को सुनने एवं कैंट थाने की आख्या का अवलोकन करने के बाद दिया है।

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अदालत ने याचिका को नहीं माना पोषणीय
अदालत ने कहा कि प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करने का आदेश रूटीन तौर पर नहीं दिया जाना चाहिए। संज्ञेय अपराध का होना प्रथम दृष्टया जब तक स्पष्ट न हो,  मुकदमा पंजीकृत करने का आदेश नहीं दिया जाना चाहिए। अदालत ने प्रार्थना पत्र में केशव प्रसाद मौर्य के विरुद्ध लगाए गए आरोपों पर विचार के बाद प्रार्थना पत्र को पोषणीय नहीं माना।

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आरटीआई एक्टिविस्ट का दावा फर्जी डिग्री के माध्यम से हासिल किया पेट्रोल पंप
दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 156 (3) के अंतर्गत प्रयागराज के कर्बला निवासी आरटीआई कार्यकर्ता दिवाकर नाथ त्रिपाठी ने अदालत से मांग की थी  कि इस प्रकरण में कैंट थाना के प्रभारी को आदेशित किया जाए कि प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कर विधि अनुसार विवेचना करें। केशव प्रसाद मौर्य पर आरोप लगाया गया था कि वर्ष 2007 में शहर के पश्चिम विधानसभा क्षेत्र से उन्होंने विधानसभा का चुनाव और उसके बाद  कई चुनाव में अपने शैक्षणिक प्रमाण पत्र में हिंदी साहित्य सम्मेलन द्वारा जारी कागजात का उपयोग किया। इन्हीं कागजात को इंडियन आयल कारपोरेशन में लगाकर पेट्रोल पंप भी प्राप्त किया गया है। प्रार्थना पत्र में यह भी आरोप लगाया गया कि शैक्षणिक प्रमाण पत्र में अलग-अलग वर्ष अंकित हैं तथा इनकी मान्यता नहीं है । स्थानीय थाना व वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से लेकर उत्तर प्रदेश सरकार, भारत सरकार के विभिन्न अधिकारियों मंत्रालयों को प्रार्थना पत्र दिए गए, परंतु मुकदमा दर्ज नहीं होने के कारण अदालत में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया गया।
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