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UP: जनगणना में ड्यूटी के लिए निजी स्कूलकर्मियों की सूची मांगने पर कोर्ट की रोक, कहा-श्रेणी में नहीं आते
Sun, 24 May 2026 05:33 PM IST
Sharukh Khan
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: Sharukh Khan
Updated Sun, 24 May 2026 05:33 PM IST
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इलाहाबाद हाईकोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जनगणना कार्य के लिए निजी सहायता प्राप्त एवं वित्तविहीन स्कूलों के शिक्षकों और कर्मचारियों की सूची मांगने संबंधी गौतमबुद्ध नगर के जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) के आदेश पर रोक लगा दी है।
कहा है कि प्रथम दृष्टया ऐसे संस्थानों के कर्मचारियों को जनगणना अधिनियम-1948 के तहत ड्यूटी के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की एकल पीठ ने स्ववित्तपोषित स्कूल एसोसिएशन की ओर से दायर याचिका पर दिया।
एसोसिएशन ने डीआईओएस के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें सभी सहायता प्राप्त और वित्तविहीन स्कूलों के प्रधानाचार्यों, प्रबंधन से शिक्षकों व कर्मचारियों की सूची जनगणना में ड्यूटी के लिए मांगी थी।
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याचिका में कहा गया कि जनगणना अधिनियम-1948 की धारा-4ए के तहत केवल लोक प्राधिकरण को ही जनगणना कार्य के लिए कर्मचारी उपलब्ध कराने का दायित्व सौंपा गया है। निजी शिक्षण संस्थान न तो राज्य सरकार के नियंत्रण में हैं और न ही उनकी इकाई।
एसोसिएशन की ओर से अधिवक्ता ने दलील दी कि अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट की ओर से बेसिक शिक्षा अधिकारी, डीआईओएस और जिला पंचायत राज अधिकारी से केवल उनके कार्यालयों में उपलब्ध कर्मचारियों की सूची मांगी गई थी।
डीआईओएस ने इसके दायरे को बढ़ाते हुए निजी संस्थानों के शिक्षकों और कर्मचारियों की सूची भी मांग ली। राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता ने दलील दी कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 के तहत शिक्षकों को दशकीय जनगणना कार्य में लगाया जा सकता है। एसोसिएशन की ओर से अधिवक्ता ने दलील दी कि यह प्रावधान केवल सरकारी संस्थानों के शिक्षकों पर लागू होता है।
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कहा है कि प्रथम दृष्टया ऐसे संस्थानों के कर्मचारियों को जनगणना अधिनियम-1948 के तहत ड्यूटी के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की एकल पीठ ने स्ववित्तपोषित स्कूल एसोसिएशन की ओर से दायर याचिका पर दिया।
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एसोसिएशन ने डीआईओएस के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें सभी सहायता प्राप्त और वित्तविहीन स्कूलों के प्रधानाचार्यों, प्रबंधन से शिक्षकों व कर्मचारियों की सूची जनगणना में ड्यूटी के लिए मांगी थी।
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याचिका में कहा गया कि जनगणना अधिनियम-1948 की धारा-4ए के तहत केवल लोक प्राधिकरण को ही जनगणना कार्य के लिए कर्मचारी उपलब्ध कराने का दायित्व सौंपा गया है। निजी शिक्षण संस्थान न तो राज्य सरकार के नियंत्रण में हैं और न ही उनकी इकाई।
एसोसिएशन की ओर से अधिवक्ता ने दलील दी कि अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट की ओर से बेसिक शिक्षा अधिकारी, डीआईओएस और जिला पंचायत राज अधिकारी से केवल उनके कार्यालयों में उपलब्ध कर्मचारियों की सूची मांगी गई थी।
डीआईओएस ने इसके दायरे को बढ़ाते हुए निजी संस्थानों के शिक्षकों और कर्मचारियों की सूची भी मांग ली। राज्य सरकार की ओर से शासकीय अधिवक्ता ने दलील दी कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 के तहत शिक्षकों को दशकीय जनगणना कार्य में लगाया जा सकता है। एसोसिएशन की ओर से अधिवक्ता ने दलील दी कि यह प्रावधान केवल सरकारी संस्थानों के शिक्षकों पर लागू होता है।