फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   UP Board: Toppers will also be able to become assistants to disabled candidates

यूपी बोर्ड : टॉपर भी बन सकेंगे दिव्यांग परीक्षार्थियों के सहायक, श्रुति लेखक रखने के नियमों में दी ढील

Mon, 19 Feb 2024 12:44 PM IST
विनोद सिंह श्रीकांत मिश्र, प्रयागराज
श्रीकांत मिश्र, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 19 Feb 2024 12:44 PM IST
सार

माध्यमिक शिक्षा परिषद यूपी बोर्ड ने दिव्यांग परीक्षार्थियों को परीक्षा के दौरान लेखक रखने के मामले में कई और छूट प्रदान की है। दिव्यांग छात्र अब किसी टॉपर्स को भी अपना सहायक रख सकेंगे। 

विज्ञापन
UP Board: Toppers will also be able to become assistants to disabled candidates
यूपी बोर्ड। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

अब टॉपर भी दिव्यांग परीक्षार्थियों के सहायक बन सकेंगे। यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाएं 22 फरवरी से शुरू हो रही हैं। सामान्य परीक्षार्थियों के साथ-साथ दिव्यांग भी परीक्षा में शामिल होते हैं। बोर्ड ने दृष्टिबाधित परीक्षार्थियों के लिए चले आ रहे परीक्षा के नियमों में संशोधन किया है। माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव दिब्यकांत शुक्ल ने आदेश जारी कर दृष्टिबाधित परीक्षार्थियों को सहायक के रूप में मिलने वाले श्रुति लेखक की योग्यता में परिवर्तन करते हुए, दिव्यांगों को बड़ी राहत दी है।

विज्ञापन


साल 2,001 में परिषद ने दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को सुविधा देते हुए आदेश पारित किया था कि कक्षा 10 और कक्षा 12 के परीक्षार्थियों को श्रुति लेखक की सहायता दी जाएगी। इस आदेश के तहत नियम बनाया गया था कि श्रुति लेखक (सुनकर लिखने वाला) सहायता लेने वाले विद्यार्थी से एक कक्षा पीछे का हो और उसने अपनी कक्षा में अधिकतम 45 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हों। अब इस अंकों के प्रतिशत की सीमा को समाप्त कर दिया गया है।
विज्ञापन


 

लंबे समय से परीक्षार्थी कर रहे थे मांग

अयोध्या स्थित दृष्टि बाधित, दिव्यांग समिति के राष्ट्रीय महासचिव विवेकमणि त्रिपाठी ने बताया कि हमारी समिति पिछले 10 वर्षों से इसके लिए संघर्ष कर रही थी। श्रुति लेखक के अधिकतम 45 प्रतिशत अंक वाले नियम की वजह से हर वर्ष बहुत से दृष्टिबाधित परीक्षार्थी परीक्षा से वंचित हो जाते थे। यह समझना सामान्य बात है कि कक्षा नौ और कक्षा 11 में 45 प्रतिशत अंक पाने वाले विद्यार्थी कम ही होते हैं। इस वजह से बहुत से परीक्षार्थी परीक्षा में नहीं शामिल हो पाते थे। प्रदेश में हर साल लगभग आठ हजार दृष्टिबाधित परीक्षार्थी बोर्ड की परीक्षा में शामिल होते हैं।

एक कक्षा में एक ही श्रुति लेखक रहेगा

माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव दिब्यकांत शुक्ल ने इन नियमों में ढील देते हुए श्रुति लेखक के अधिकतम 45 प्रतिशत अंक होने के नियम को बदल दिया है। 16 फरवरी को बोर्ड की तरफ से जारी आदेश में कहा गया है कि अब अपनी कक्षा में अधिकतम अंक पाने वाला भी दृष्टि बाधित परीक्षार्थी की श्रुति लेखक के रूप में सहायता कर सकता है। हालांकि, श्रुति लेखक जिसकी मदद कर रहा है, उससे एक कक्षा पीछे का विद्यार्थी होगा इस नियम को बरकरार रखा गया है। सचिव ने इस नियम को तत्काल प्रभाव से लागू करने के लिए प्रदेश के सभी विद्यालय निरीक्षकों को आदेश दिया है। जिससे समय रहते दिव्यांग परीक्षार्थी अपने लिए श्रुति लेखक का नाम केंद्रों को दे सकें।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed