यूपी : सीबीएसई की तर्ज पर चला यूपी बोर्ड, नई मान्यता लेने की डगर होगी कठिन
यूपी बोर्ड ने विद्यालय की नई मान्यता के लिए भूमि के क्षेत्रफल का दायरा काफी बढ़ा दिया है। पहले जहां शहरी क्षेत्र यानी नगर निगम, नगरपालिका, कैंटोनमेंट या टाउन एरिया में विद्यालय खोलने के लिए 650 वर्ग मीटर जमीन आवश्यक थी।
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उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद भी सीबीएसई की तर्ज पर चल पड़ा है। यूपी बोर्ड की ओर से विद्यालयों को मान्यता देने की शर्तों में किए गए बदलावों में नए प्रावधान यह बात साफ झलकती है। यूपी बोर्ड ने नए विद्यालय खोलने के लिए जो नए मानक निर्धारित किए हैं, वह लगभग सीबीएसई के बराबर हैं। ऐसे में यूपी बोर्ड से विद्यालय खोलने के लिए नई मान्यता लेना टेढ़ी खीर हो गया है। इसके चलते आने वाले सालों में नई मान्यता की संख्या की काफी कमी आएगी।
यूपी बोर्ड ने विद्यालय की नई मान्यता के लिए भूमि के क्षेत्रफल का दायरा काफी बढ़ा दिया है। पहले जहां शहरी क्षेत्र यानी नगर निगम, नगरपालिका, कैंटोनमेंट या टाउन एरिया में विद्यालय खोलने के लिए 650 वर्ग मीटर जमीन आवश्यक थी। इसमें से 162 वर्ग मीटर में क्रीड़ाक्षेत्र होना आवश्यक था। यह विद्यालय की दो सौ मीटर दूरी की परिधि में भी हो सकता था। बशर्ते की विद्यालय का गेट और क्रीड़ास्थल सड़क के एक ही तरफ स्थित हों। वहीं अब शहरी क्षेत्र में विद्यालय के लिए भूमि का क्षेत्रफल बढ़ाकर न्यूनतम 3 हजार वर्गमीटर कर दिया गया है। इसमें एक हजार वर्गमीटर का क्रीड़ा स्थल होगा।
तेजी से हो रहे शहरीकरण के दौर में किसी भी शहर में एक साथ तीन हजार वर्ग मीटर जमीन मिलना मुश्किल ही है। वहीं ग्रामीण इलाके में पहले 02 हजार वर्ग मीटर भूमि का क्षेत्रफल निर्धारित था। अब इसे बढ़ाकर न्यूनतम छह हजार वर्ग मीटर कर दिया गया है।
वहीं अब सीबीएसई की तरह विद्यालय भवन के निरीक्षण के दौरान जनपदीय समिति विद्यालय भवन, प्रयोगशाला, खेल के मैदान, बाउंड्रीवॉल, पुस्तकालय की वीडियोग्राफी करेगी, जिसे परिषद की वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा। साथ ही पेनड्राइव में संरक्षित कर निरीक्षण आख्या के साथ संलग्न की जाएगी। इसके साथ ही हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के लिए मान्यता सर्वप्रथम तीन वर्ष के लिए प्रदान की जाएगी। इसके बाद स्थलीय निरीक्षण में उपयुक्त पाए जाने पर परिषद द्वारा पांच वर्ष के लिए नवीनीकरण किया जाएगा।
आउटडोर-इनडोर गेम के साथ जिम भी होना अनिवार्य
वहीं मान्यता की नई शर्तों में क्रीड़ास्थल पर भी काफी ध्यान दिया गया है। इसके तहत नई मान्यता लेने वाले विद्यालयों को एथलेटिक्स, कबड्डी, खो-खो, वॉलीबाल, बास्केटबॉल, बैंडमिंटन, लॉन टेनिस, ओपन जिमभनेजियम एवं अन्य आउटडोर के साथ इनडोर गेम की व्यवस्था अनिवार्य की गई है।