up assembly election 2022 : आरएसएस व विहिप के इस नारे ने बदल दी केशव प्रसाद मौर्य के जीवन की दिशा व दशा
डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य का जन्म सात मई 1969 को सिराथू में हुआ था। उनके पिता श्यामलाल किसान थे। मां धनपत्ती देवी गृहिणी हैं। किसानी के साथ ही उनके पिता सिराथू रेलवे स्टेशन के पास चाय की दुकान चलाते थे। बचपन से ही महत्वाकांक्षी केशव ने अपनी पढ़ाई के साथ पिता के कारोबार में हाथ बंटाना शुरू किया।
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किसी ने शायद ही सोचा होगा कि सिराथू जैसे छोटे से गांव (अब नगर पंचायत) के किसान परिवार में जन्मे केशव प्रसाद मौर्य कभी भाजपा के लिए संकट मोचक बनेंगे। कभी पिता संग चाय की दुकान में हाथ बंटाने के साथ वह घर से नौ किलोमीटर की परिधि में अखबार तक बांटने का काम करते थे।
आरएसएस और विहिप से जुड़ने के बाद मिले गुरुमंत्र ‘संगठन तुम बढ़े चलो, पंथ पर चले चलो, भला हो जिसमें देश का, वह काम किए चलो’ के मंत्र ने केशव के जीवन की दिशा व दशा बदल दी। हिंदुत्व के प्रचार-प्रसार के साथ पिछड़ों के अगुवा बनकर उभरे केशव बेहद कम समय में सूबे की सियासत का एक चमकता सितारा बन गए।
डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य का जन्म सात मई 1969 को सिराथू में हुआ था। उनके पिता श्यामलाल किसान थे। मां धनपत्ती देवी गृहिणी हैं। किसानी के साथ ही उनके पिता सिराथू रेलवे स्टेशन के पास चाय की दुकान चलाते थे। बचपन से ही महत्वाकांक्षी केशव ने अपनी पढ़ाई के साथ पिता के कारोबार में हाथ बंटाना शुरू किया।
दुर्गा देवी इंटर कॉलेज से उन्होंने इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके बाद वह आरएसएस की शाखा में पहुंचने लगे। अयोध्या में राममंदिर आंदोलन का केशव पर व्यापक प्रभाव पड़ा। सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़ी जातियों के लिए बने मंडल कमीशन की
सिफारिशें लागू होने तथा 1986 में फैजाबाद की जिला अदालत द्वारा बाबरी मस्जिद का दरवाजा खोलने का आदेश होने के बाद केशव सक्रिय राजनीति में उतर आए। विहिप के अशोक सिंघल का सानिध्य मिलने के बाद उन्होंने फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा। संगठन के साथ जुड़कर धर्म संसद के कामों में हिस्सा लेना तेज कर दिया।
पहली बार अशरफ के खिलाफ लड़े चुनाव
भाजपा ने उन्हें 2004 में प्रयागराज की शहर पश्चिमी विधानसभा सीट से माफिया अतीक अहमद के भाई अशरफ के खिलाफ चुनाव लड़ाया। यह उपचुनाव था। अतीक अहमद के फूलपुर से सांसद चुने जाने पर यह सीट रिक्त हुई थी। इस चुनाव में केशव को पराजय का सामना करना पड़ा और राजू पाल के सिर जीत का सेहरा बंधा। वर्ष 2007 में भी शहर पश्चिमी से उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने सिराथू से जीत हासिल की। इससे पहले यहां कभी भाजपा का कमल नहीं खिला था। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में केशव इलाहाबाद जनपद (अब प्रयागराज) की फूलपुर सीट से सांसद बने।
विधायकी छोड़कर इस चुनाव में उतरे केशव ने फूलपुर लोकसभा सीट पर भी पहली बार भाजपा का परचम लहराया। इसके ठीक दो साल बाद भाजपा ने केशव का कद बढ़ाते हुए उन्हें प्रदेश अध्यक्ष का दायित्व सौंपा। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में सूबे में प्रचंड बहुमत की सरकार बनने पर उन्हें डिप्टी सीएम बनाया गया। इस पद के लिए पार्टी ने उन्हें विधान परिषद का सदस्य बनाया। अब 2022 में भाजपा ने उन्हें फिर से सिराथू विधानसभा सीट से प्रत्याशी घोषित किया है।
सिराथू से रहा है केशव का गहरा लगाव
केशव प्रसाद मौर्य की शादी सिराथू क्षेत्र के ही खूजा गांव की राजकुमारी से हुई है। उनके बड़े भाई सुखलाल समेत परिवार के सभी सदस्य आज भी सिराथू में ही रहते हैं। राजनीति में भी उन्हें सिराथू से ही मुकाम मिला है।