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यूपी विधानसभा चुनाव 2022 :  प्रयागराज में आधा दर्जन सीटों पर प्रत्याशी बदल सकती है भाजपा 

Sun, 09 Jan 2022 01:24 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 09 Jan 2022 01:24 AM IST
सार

पिछले चुनाव में भाजपा ने प्रयागराज में अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए नौ सीटें जीती थीं। इसमें यमुनापार की चार में से तीन, प्रयागराज महानगर की सभी तीन एवं गंगापार की पांच में से तीन सीट (एक अपना दल) पार्टी के खाते में आई।

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UP Assembly Election 2022: BJP can change candidate on half a dozen seats in Prayagraj
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विस्तार

पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव की घोषणा होने के बाद अब सवाल यही है कि भाजपा प्रयागराज की 12 सीटों में किसे उम्मीदवार बनाएगी। जिले में 12 में से नौ सीटें भाजपा (एक अपना दल) के पास होने के बावजूद चर्चा यही है कि पार्टी आधा दर्जन सीटों पर नए प्रत्याशी खड़ा कर सकती है। पिछले दिनों राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और भाजपा द्वारा किए गए सर्वे के बाद तकरीबन तय हो गया है पार्टी जिले की आधा दर्जन सीटों पर इस बार नए उम्मीदवार उतारने के मूड में है। गंगापार की तीन, यमुनापार की दो और महानगर की एक विधानसभा सीट से प्रत्याशी बदले जाने की चर्चा ज्यादा है।

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पिछले चुनाव में भाजपा ने प्रयागराज में अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए नौ सीटें जीती थीं। इसमें यमुनापार की चार में से तीन, प्रयागराज महानगर की सभी तीन एवं गंगापार की पांच में से तीन सीट (एक अपना दल) पार्टी के खाते में आई। अच्छे परिणाम की वजह से ही प्रयागराज की दो सीटों पर जीते विधायक सिद्धार्थ नाथ सिंह और नंद गोपाल गुप्ता नंदी को योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री भी बनाया गया। इस बार के चुनाव में भाजपा सपा को ही अपना प्रमुख विरोधी मानकर चल रही है। इसी वजह से पार्टी कुछ सीटों पर नए प्रत्याशी उतारने पर विचार कर रही है। 

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अपना दल बदली हुई दो सीट देने की चर्चा
पिछले चुनाव में भाजपा ने सोरांव, प्रतापपुर और हंडिया सीट अपना दल को दी थी। इसमें से अपना दल ने एक सीट ही जीती। इस वजह से इस बार पार्टी अपना दल को तीन की जगह दो बदली हुई सीट दे सकती है। शहर उत्तरी सीट की बात करें तो यहां से ब्राह्मण या क्षत्रिय उम्मीदवार में से किसी एक बिरादरी के नेता को टिकट मिलना तय है। टिकट वितरण में पार्टी सामाजिक समीकरण का भी पूरा ध्यान रखेगी। इसी वजह से कायस्थ और वैश्य बिरादरी के नेता भी शहर की किन्हीं दो विधानसभा सीट से चुनाव लड़ते इस बार भी दिख सकते हैं। 

नीलम करवरिया को  उत्तरी विधानसभा से लड़ाने की मांग
पिछले कुछ दिनों से भाजपा में चर्चा है कि मेजा विधायक नीलम करवरिया को उत्तरी विधानसभा से लड़ाया जा सकता है। कुछ कार्यकर्ताओं ने उन्हें उत्तरी विधानसभा चुनाव से लड़ाने की मांग की है। भाजपा नेता देवेंद्र नाथ मिश्र कहते हैं कि पार्टी नीलम को मेजा से ही टिकट देगी। शहर उत्तरी से हर्षवर्धन बाजपेयी ब्राहमण प्रत्याशी है। अगर उन पर विचार न हुआ तो अन्य ब्राह्मण नेता भी इस सीट से प्रबल दावेदार हैं॥  बारा, कोरांव सीट भी वर्तमान में भाजपा के पास है। इन दोनों ही सीटों को लेकर पार्टी में मंथन चल रहा है कि दोनों ही विधायकों को बरकरार रखा जाए या किसी नए चेहरे को मौका दिया जाए। यही तस्वीर गंगापार की फाफामऊ और फूलपुर विधानसभा सीट भी है।  

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चुनौती बनी हुई है करछना विधानसभा सीट 
करछना सीट भी पार्टी के लिए बड़ी चुनौती है। यहां आज तक कमल नहीं खिल सका है। सपा का गढ़ माने जाने वाले इस विधान सभा क्षेत्र में भाजपा इस बार सेंध लगाने की तैयारी कर रही है। पार्टी को इस सीट से सिर्फ जिताऊ उम्मीदवार की ही तलाश है।  पिछले चुनाव की तरह इस बार हंडिया, प्रतापपुर सीट से भाजपा खुद चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। अगर ऐसा हुआ तो अपना दल को पार्टी गंगापार और यमुनापार की एक-एक सीट दे सकती है। भाजपा महानगर अध्यक्ष गणेश केसरवानी कहते हैं कि टिकट किसे मिलेगा यह निर्णय संगठन का है। लेकिन इतना जरूर है कि भाजपा जिताऊ उम्मीदवारों को ही टिकट देगी। 

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