{"_id":"653c19657ae79e0cdc051c2a","slug":"university-friends-met-after-years-refreshed-memories-and-laughed-allahabad-news-c-3-1-ald1023-249665-2023-10-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"Prayagraj News: वर्षों बाद मिले विवि के साथी, यादें ताजा कर लगाए ठहाके","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Prayagraj News: वर्षों बाद मिले विवि के साथी, यादें ताजा कर लगाए ठहाके
विज्ञापन
इलाहाबाद मेडिकल एसोसिएशन के सभागार में शुक्रवार को इविवि के वनस्पति विज्ञान विभाग के 100 वर्ष पूरे होने पर आयोजित पुराछात्र सम्मेलन में बड़ी संख्या में पुराछात्र शामिल हुए। इस दौरान पुराछात्रों में पुराने दिनों की यादें साझा कीं। कॉलेज के किस्सों को यादकर खूब ठहाके भी लगाए।
पुराछात्रों की ओर से ही आयोजित इस तीन दिवसीय सम्मेलन के पहले दिन मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा, मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, डीएम नवनीत सिंह चहल समेत अन्य अफसरों संग शामिल हुए। मुख्य सचिव ने जीवन और प्रकृति में वनस्पति विज्ञान के महत्व पर प्रकाश डाला। साथ ही विभाग के 100 वर्ष पूरे होने पर एलुमिनाई बैलून पुस्तक का विमोचन किया।
इस दौरान मुख्य सचिव ने नई शिक्षा नीति पर प्रकाश डाला। कहा कि 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य रखा गया है जो पूरा होगा। उन्होंने महाकुंभ के आयोजन में तकनीकी के इस्तेमाल पर भी चर्चा की।
विज्ञापन
1952 बैच के प्रोफेसर गोविंद ने अमेरिका से ऑनलाइन माध्यम से कार्यक्रम को संबोधित किया और आयोजन के महत्व पर प्रकाश डाला। 1956 में बीएससी में दाखिला लेने वाले प्रोफेसर देवाशीष चटर्जी भी मध्य प्रदेश से समारोह में शामिल होने आए। विभाग में प्रोफेसर रहे देवेश चंद्र पांडेय की पत्नी शांति पांडेय भी कार्यक्रम में पहुंचीं। शांति पांडेय को कुछ याद नहीं रहता। विभाग की ही छात्रा रहीं इनकी बेटी रंजना शांति को लेकर आई थीं। रंजना ने कहा, यह पूरे परिवार के लिए काफी भावुक करने वाला आयोजन है।
1979 बैच के प्रोफेसर दिवाकर बहुखंडी, अश्वनी कुमार पुस्करन, डॉ. अर्चना कपूर, डॉ. रश्मी, 1980 बैच के डॉ. आरके तिवारी, डॉ. अनिल कुमार आदि भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
समारोह में शामिल अहमदाबाद की ज्योति सिंह, दिल्ली से आईं 1968 बैच की एससी चटर्जी, डॉ. प्रीति, नागालैंड के प्रोफेसर सुनील कुमार चतुर्वेदी, मोहम्मद रिजवान आदि ने भी भावनाएं प्रकट कीं। सेवानिवृत्त आईएएस संजय श्रीवास्तव, एलुमिनाई एसोसिएशन के उपाध्यक्ष डॉ. सुचित आशीष जॉन, महासचिव प्रोफेसर हरबंश कौर केहरी ने सम्मेलन और इसके महत्व पर प्रकाश डाला।
विज्ञापन
पुराछात्रों की ओर से ही आयोजित इस तीन दिवसीय सम्मेलन के पहले दिन मुख्य सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा, मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, डीएम नवनीत सिंह चहल समेत अन्य अफसरों संग शामिल हुए। मुख्य सचिव ने जीवन और प्रकृति में वनस्पति विज्ञान के महत्व पर प्रकाश डाला। साथ ही विभाग के 100 वर्ष पूरे होने पर एलुमिनाई बैलून पुस्तक का विमोचन किया।
विज्ञापन
इस दौरान मुख्य सचिव ने नई शिक्षा नीति पर प्रकाश डाला। कहा कि 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य रखा गया है जो पूरा होगा। उन्होंने महाकुंभ के आयोजन में तकनीकी के इस्तेमाल पर भी चर्चा की।
विज्ञापन
1952 बैच के प्रोफेसर गोविंद ने अमेरिका से ऑनलाइन माध्यम से कार्यक्रम को संबोधित किया और आयोजन के महत्व पर प्रकाश डाला। 1956 में बीएससी में दाखिला लेने वाले प्रोफेसर देवाशीष चटर्जी भी मध्य प्रदेश से समारोह में शामिल होने आए। विभाग में प्रोफेसर रहे देवेश चंद्र पांडेय की पत्नी शांति पांडेय भी कार्यक्रम में पहुंचीं। शांति पांडेय को कुछ याद नहीं रहता। विभाग की ही छात्रा रहीं इनकी बेटी रंजना शांति को लेकर आई थीं। रंजना ने कहा, यह पूरे परिवार के लिए काफी भावुक करने वाला आयोजन है।
1979 बैच के प्रोफेसर दिवाकर बहुखंडी, अश्वनी कुमार पुस्करन, डॉ. अर्चना कपूर, डॉ. रश्मी, 1980 बैच के डॉ. आरके तिवारी, डॉ. अनिल कुमार आदि भी कार्यक्रम में शामिल हुए।
समारोह में शामिल अहमदाबाद की ज्योति सिंह, दिल्ली से आईं 1968 बैच की एससी चटर्जी, डॉ. प्रीति, नागालैंड के प्रोफेसर सुनील कुमार चतुर्वेदी, मोहम्मद रिजवान आदि ने भी भावनाएं प्रकट कीं। सेवानिवृत्त आईएएस संजय श्रीवास्तव, एलुमिनाई एसोसिएशन के उपाध्यक्ष डॉ. सुचित आशीष जॉन, महासचिव प्रोफेसर हरबंश कौर केहरी ने सम्मेलन और इसके महत्व पर प्रकाश डाला।