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विवि, कॉलेज में किताबों की खरीद में नहीं चलेगी मनमानी
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Thu, 25 Aug 2016 02:18 AM IST
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय
- फोटो : Getty
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इलाहाबाद। इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय और संघटक कॉलेजों में किताबों की खरीद में अब मनमानी नहीं चलेगी। विश्वविद्यालय ने नई नियमावली बनाने के साथ पुस्तक खरीद की सेंट्रलाइज्ड व्यवस्था लागू कर दी है। प्रकाशकाें तथा जरनल के लिए पैनल भी निर्धारित कर दिया गया है। इन्हीं से पुस्तकें खरीदी जा सकेंगी। खास यह कि शिक्षक भी इस नियम से बंधे होंगे। चाहे उन्हें किसी भी मद से फंड मिला हो।
विश्वविद्यालय की सेंट्रल लाइब्रेरी के लिए नियमावली बनी हुई है लेकिन विभाग, संस्थान और कॉलेज इससे नहीं बंधे थे। खुद के स्तर पर पुस्तकें और जरनल खरीदते रहे हैं। इसके अलावा अध्यापकों के पास यूजीसी, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग समेत कई संस्थाओं के प्रोजेक्ट होते हैं। इसके तहत मिले फंड से पुस्तकें और जरनल खरीदने के लिए वह स्वतंत्र होते थे लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। अब उन्हें भी नई नियमावली के दायरे में लाया गया है। नई नियमावली में प्रकाशकों और जरनल का पैनल निर्धारित करने के अलावा कई अन्य पाबंदियां लगाई गई हैं। इसके तहत 25 हजार रुपये तक की पुस्तक की खरीद पर प्रकाशक से 15 प्रतिशत छूट लेनी होगी। पहले यह 10 फीसदी थी। 25 हजार से अधिक मूल्य की किताब पर प्रकाशक को 20 फीसदी छूट देनी होगी। विदेशों में प्रकाशित विज्ञान की तीन साल पुरानी पुस्तक अब नहीं खरीदी जा सकेगी। यदि किसी तरह की मजबूरी है तो उसे बताना होगा। इसके बाद कमेटी तय करेगी कि पुस्तक खरीदी जाए या नहीं। लाइब्रेरियन डॉ.बीके सिंह ने बताया कि नई नियमावली लागू कर दी गई है। इसमें 18 बिंदु हैं। इसके तहत पुस्तकों और जरनल की खरीद की जा सकेगी।
प्रकाशकाें से मांगा आवेदन
विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से प्रकाशकों के नए पैनल के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अभी विश्वविद्यालय के केंद्रीय पुस्तकालय के पैनल में 23 वेंडर तथा 10 ई-जरनल शामिल हैं। इनका कांटैक्ट नवंबर में खत्म हो जाएगा। लाइब्रेरियन डॉ.बीके सिंह ने बताया कि नए पैनल के लिए नोटिफिकेशन विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर अपलोड कर दिया गया है। 23 सितंबर तक उनसे आवेदन मांगा गया है। विश्वविद्यालय के मानक को पूरा करने वाले प्रकाशकों को पैनल में शामिल किया जाएगा।
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विश्वविद्यालय की सेंट्रल लाइब्रेरी के लिए नियमावली बनी हुई है लेकिन विभाग, संस्थान और कॉलेज इससे नहीं बंधे थे। खुद के स्तर पर पुस्तकें और जरनल खरीदते रहे हैं। इसके अलावा अध्यापकों के पास यूजीसी, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग समेत कई संस्थाओं के प्रोजेक्ट होते हैं। इसके तहत मिले फंड से पुस्तकें और जरनल खरीदने के लिए वह स्वतंत्र होते थे लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। अब उन्हें भी नई नियमावली के दायरे में लाया गया है। नई नियमावली में प्रकाशकों और जरनल का पैनल निर्धारित करने के अलावा कई अन्य पाबंदियां लगाई गई हैं। इसके तहत 25 हजार रुपये तक की पुस्तक की खरीद पर प्रकाशक से 15 प्रतिशत छूट लेनी होगी। पहले यह 10 फीसदी थी। 25 हजार से अधिक मूल्य की किताब पर प्रकाशक को 20 फीसदी छूट देनी होगी। विदेशों में प्रकाशित विज्ञान की तीन साल पुरानी पुस्तक अब नहीं खरीदी जा सकेगी। यदि किसी तरह की मजबूरी है तो उसे बताना होगा। इसके बाद कमेटी तय करेगी कि पुस्तक खरीदी जाए या नहीं। लाइब्रेरियन डॉ.बीके सिंह ने बताया कि नई नियमावली लागू कर दी गई है। इसमें 18 बिंदु हैं। इसके तहत पुस्तकों और जरनल की खरीद की जा सकेगी।
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प्रकाशकाें से मांगा आवेदन
विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से प्रकाशकों के नए पैनल के लिए प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अभी विश्वविद्यालय के केंद्रीय पुस्तकालय के पैनल में 23 वेंडर तथा 10 ई-जरनल शामिल हैं। इनका कांटैक्ट नवंबर में खत्म हो जाएगा। लाइब्रेरियन डॉ.बीके सिंह ने बताया कि नए पैनल के लिए नोटिफिकेशन विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर अपलोड कर दिया गया है। 23 सितंबर तक उनसे आवेदन मांगा गया है। विश्वविद्यालय के मानक को पूरा करने वाले प्रकाशकों को पैनल में शामिल किया जाएगा।
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