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Prayagraj News: उमेश पाल के वकील को खतरा, नहीं मिली सुरक्षा
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उमेश पाल की ओर से दर्ज कराए गए मामलों व उनकी हत्या के मुकदमे की हाईकोर्ट में पैरवी कर रहे अधिवक्ता प्रवीण कुमार पांडेय को पांच महीने बाद भी सुरक्षा नहीं मिल सकी। खुद की जान को खतरा बाजार बताते हुए उन्हाेंने सुरक्षा की गुहार लगाई है। उनके आवेदन पर अब तक कोई निर्णय नहीं लिया जा सका है। इससे वह और उनका परिवार चिंतित है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता प्रवीण ने पिछले साल पांच अक्तूबर को सुरक्षा की गुहार लगाई थी। प्रार्थनापत्र में उन्होंने बताया था कि उमेश पाल अपहरण के मुकदमे में वह वादी पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे हैं। दरअसल उमेश पाल अपहरण कांड में दोषी करार दिए गए जाने के फैसले को दो अभियुक्तों दिनेश पासी और खान सौलत हनीफ की ओर से चुनौती दी गई है। इसके अलावा मुकदमे में छह अभियुक्ताें को बरी(कुल सात, जिनमें से अशरफ की मौत हाे चुकी है) किए जाने के ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय में उमेश पाल की पत्नी जया पाल की ओर से दाखिल केस में भी वह ही अधिवक्ता हैं। पूर्व विधायक राजू पाल के कुछ मुकदमों में भी वह अधिवक्ता रहे हैं।
उमेश पाल की ओर से 2019 तक के मुकदमों की पैरवी में भी वह शामिल रहे। उमेश पाल हत्याकांड में अभियुक्तों की ओर से दाखिल केस के विरोध में भी उमेश के परिजनों का पक्ष वह ही रख रहे हैं। इनमें से एक याचिका इकलाख अहमद और दूसरी जैनब फातिमा की ओर से दाखिल की गई है। उनका कहना है कि माफिया गैंग के खिलाफ दर्ज मुकदमों में पैरवी करने से उन्हें जान माल का खतरा बना हुआ है। उमेश पाल हत्या केस में भी अभी कुछ मुल्जिम पकड़े नहीं जा सके हैं। ऐसे में उन्हें जल्द से जल्द सुरक्षा प्रदान की जानी चाहिए। अक्टूबर में उन्होंने इस संबंध में आवेदन किया था और इसमें तमाम औपचारिकताएं पूरी भी हो चुकी हैं। इसके बाद भी उनका आवेदन लंबित है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट के अधिवक्ता प्रवीण ने पिछले साल पांच अक्तूबर को सुरक्षा की गुहार लगाई थी। प्रार्थनापत्र में उन्होंने बताया था कि उमेश पाल अपहरण के मुकदमे में वह वादी पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे हैं। दरअसल उमेश पाल अपहरण कांड में दोषी करार दिए गए जाने के फैसले को दो अभियुक्तों दिनेश पासी और खान सौलत हनीफ की ओर से चुनौती दी गई है। इसके अलावा मुकदमे में छह अभियुक्ताें को बरी(कुल सात, जिनमें से अशरफ की मौत हाे चुकी है) किए जाने के ट्रायल कोर्ट के फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय में उमेश पाल की पत्नी जया पाल की ओर से दाखिल केस में भी वह ही अधिवक्ता हैं। पूर्व विधायक राजू पाल के कुछ मुकदमों में भी वह अधिवक्ता रहे हैं।
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उमेश पाल की ओर से 2019 तक के मुकदमों की पैरवी में भी वह शामिल रहे। उमेश पाल हत्याकांड में अभियुक्तों की ओर से दाखिल केस के विरोध में भी उमेश के परिजनों का पक्ष वह ही रख रहे हैं। इनमें से एक याचिका इकलाख अहमद और दूसरी जैनब फातिमा की ओर से दाखिल की गई है। उनका कहना है कि माफिया गैंग के खिलाफ दर्ज मुकदमों में पैरवी करने से उन्हें जान माल का खतरा बना हुआ है। उमेश पाल हत्या केस में भी अभी कुछ मुल्जिम पकड़े नहीं जा सके हैं। ऐसे में उन्हें जल्द से जल्द सुरक्षा प्रदान की जानी चाहिए। अक्टूबर में उन्होंने इस संबंध में आवेदन किया था और इसमें तमाम औपचारिकताएं पूरी भी हो चुकी हैं। इसके बाद भी उनका आवेदन लंबित है।
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