Umesh Pal Murder : खुद के अपहरण केस की आखिरी सुनवाई के लिए कोर्ट गए थे उमेश, शीघ्र आने वाला था फैसला
राजू पाल हत्याकांड के चश्मदीद गवाह उमेश पाल को खुद के अपहरण के मामले में अदालत के फैसले का इंतजार बाकी रह गया। शुक्रवार को इस मामले की अंतिम सुनवाई में वह सत्र न्यायालय आए थे।
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राजू पाल हत्याकांड के चश्मदीद गवाह उमेश पाल को खुद के अपहरण के मामले में अदालत के फैसले का इंतजार बाकी रह गया। शुक्रवार को इस मामले की अंतिम सुनवाई में वह सत्र न्यायालय आए थे। विरोधी पक्ष की बहस पूरी न होने पर कोर्ट ने इस मामले में 27 फरवरी अगली तिथि तय कर दी। इसके बाद अपनी क्रेटा कार से वह घर के लिए रवाना हुए थे।
अपनी हत्या से पूर्व उमेश पाल अपहरण के इस मामले में आखिरी सुनवाई के लिए जिला न्यायालय गए थे। अगली तारीख लगने के बाद वह अपने अधिवक्ता से घर जाने के बात कहकर निकले थे। घटना की जानकारी होने पर उनके अधिवक्ता हतप्रभ रह गए।
अधिवक्ता विक्रम सिन्हा ने बताया कि अपहरण कांड में सत्र न्यायालय ने शुक्रवार को अंतिम सुनवाई का दिन रखा था। उनकी तरफ से जिरह पूरी हो चुकी थी। विरोधी पक्ष (अतीक अहमद) की ओर से की गई बहस का जवाब दिया जा रहा था। अपहरण केस की सुनवाई दोपहर सवा दो बजे के बाद शुरू हुई तो सवा चार बजे तक चली।
विरोधी पक्ष की ओर से जिरह बाकी रह गई तो अदालत ने सुनवाई के लिए सोमवार यानी 27 फरवरी का दिन तय किया था। वकील ने बताया कि शुक्रवार की सुनवाई पूरी होने के बाद उमेश पाल ने कहा कि वह घर जा रहे हैं। थोड़ी देर बाद ही उनको गोली लगने की जानकारी मिली, तो वह स्वरूपरानी नेहरू चिकित्सालय गए।
उल्लेखनीय है कि राजू पाल हत्याकांड के चश्मदीद गवाह रहे उमेश पाल का अपहरण कर लिया गया था। इसके बाद अतीक अहमद ने अपने पक्ष में बयान कराया था। जब स्थितियां बदली तो अपहरण कांड के मामले में 2006 में अतीक अहमद, मोहम्मद अशरफ सहित नौ लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई। तबसे यह केस चल रहा है। उमेश पाल की याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कुछ दिनों पहले ट्रायल जल्दी पूरा करने का निर्देश दिया था। हाईकोर्ट के इस निर्देश के बाद सुनवाई तेज हो गई थी। जल्दी ही फैसला आने वाला था।
राजू पाल हत्याकांड के पांच गवाह सभी का किया गया था अपहरण
राजू पाल हत्याकांड के गवाहों ने अतीक गिरोह का कहर जिस तरह झेला है, उसकी बानगी शायद ही कहीं देखने को मिले। राजू पाल के साथ चल रहे चार लोगों का अपहरण किया गया। रुखसाना के पति का बाद में अपहरण कर गवाही से मुकर जाने के लिए धमकाया गया। सभी ने अतीक गिरोह के खिलाफ रिपोर्ट लिखाई थी।
घटना के समय राजू पाल के साथ उमेश पाल, सैफुल्ला, रुखसाना, महेंद्र पटेल और ओम प्रकाश पाल मौजूद थे। जब ताबड़तोड़ गोलियां बरसाईं गईं। रुखसाना, महेंद्र पटेल, और ओम प्रकाश को भी गोलियां लगी थीं। मुकदमा दर्ज होने के बाद सभी लोग प्रत्यक्षदर्शी गवाह बने थे। इसके बाद ही अतीक गिरोह ने सबसे पहले उमेश पाल का अपहरण कराया। फिर सैफुल्ला का। कुछ दिन बाद महेंद्र पटेल का।
फिर ओम प्रकाश पाल का अपहरण हुआ। सभी को अतीक गिरोह ने हत्या की धमकी देकर कहा था कि राजू पाल हत्याकांड में गवाही न दें। नहीं तो उन्हें तो मारा ही जाएगा। परिवार वालों को भी नहीं छोड़ा जाएगा। रुखसाना के पति सादिक निवासी बख्शी मोढ़ा को भी अतीक गिरोह के लोग उठा ले गए थे। उसे धमकाया कि रुखसाना को समझा लो। एक बार उसे गोली लग चुकी है। गवाही दी तो दूसरी बार वह बचेगी नहीं।