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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Umesh Pal was abducted and thrashed overnight by Atiq and henchmen, got him to testify in his favor

प्रयागराज : अतीक और गुर्गों ने अपहरण कर रात भर पीटा था उमेश पाल को, अपने पक्ष में दिलवाई थी गवाही

Mon, 27 Mar 2023 05:03 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 27 Mar 2023 05:03 AM IST
सार

राजू पाल हत्याकांड में गवाह बनने के बाद उमेश पाल के ऊपर खतरा मंडराने लगा था। अतीक ने कई लोगों से कहलवाया कि वह केस से हट जाए नहीं तो उसे दुनिया से हटा दिया जाएगा। उमेश नहीं माने तो 28 फरवरी 2006 को उसका अपहरण कर लिया गया। उसे करबला स्थित कार्यालय में ले जाकर अतीक ने रात भर पीटा था। उससे हलफनामा पर दस्तखत भी करवा लिए थे।

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Umesh Pal was abducted and thrashed overnight by Atiq and henchmen, got him to testify in his favor
साबरमती जेल से बाहर आया अतीक अहमद - फोटो : ANI

विस्तार

राजू पाल हत्याकांड में गवाह बनने के बाद उमेश पाल के ऊपर खतरा मंडराने लगा था। अतीक ने कई लोगों से कहलवाया कि वह केस से हट जाए नहीं तो उसे दुनिया से हटा दिया जाएगा। उमेश नहीं माने तो 28 फरवरी 2006 को उसका अपहरण कर लिया गया। उसे करबला स्थित कार्यालय में ले जाकर अतीक ने रात भर पीटा था। उससे हलफनामा पर दस्तखत भी करवा लिए थे।

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अगले दिन उमेश ने अतीक के पक्ष में अदालत में गवाही भी दे दी। हालांकि वह समय बदलने का इंतजार कर रहे थे। जब 2007 में बसपा सरकार बनी तो उमेश ने अपने अपहरण का मुकदमा दर्ज कराया। इसी मुकदमे में पैरवी कर 24 फरवरी को उमेश घर लौट रहे थे, तभी उनकी हत्या कर दी गई। अब अदालत ने इस मामले में फैसले की तारीख 28 मार्च मुकर्रर की है।
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25 जनवरी 2005 को सुलेमसराय में तत्कालीन विधायक राजू पाल की हत्या हुई तो उमेश पाल मुख्य गवाहों में से एक थे। अतीक ने अपने लोगों से कई बार उमेश को धमकाया कि वह राजू पाल केस की गवाही से हट जाए नहीं तो मार दिया जाएगा। लेकिन उमेश नहीं माने। 28 फरवरी 2006 को उमेश का अपहरण कर लिया गया। उसे करबला स्थित कार्यालय लाया गया। उमेश की रात भर पिटाई की गई।

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उमेश को उस समय लगा था कि यह उसकी आखिरी रात है। अतीक ने उससे हलफनामा पर दस्तखत करा लिए। हलफनामा पर लिखा था कि वह घटनास्थल पर मौजूद नहीं था। न ही उसने किसी को वहां देखा था। अगले दिन यानी एक मार्च को अतीक ने अदालत में उमेश के हलफनामा को प्रस्तुत कर अदालत के सामने गवाही भी दिलवा दी थी। उस समय शासन प्रशासन में अतीक की तूती बोलती थी।

2007 में जब बसपा सरकार बनी तो स्थिति बदलने लगी। अतीक के खिलाफ कार्रवाई शुरू हो गई। पांच जुलाई 2007 को उमेश ने अतीक, अशरफ और उनके गुर्गों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दिया। उमेश ने लगकर अपने केस में पैरवी की। उसे मुकाम तक लगभग पहुंचा ही दिया था, लेकिन फैसला आने से तकरीबन एक महीने पहले ही उमेश की हत्या कर दी गई। 28 मार्च को उमेश अपहरण कांड में सजा का ऐलान होगा। कटघरे में उसे रात भर पीटने वाले अतीक, अशरफ समेत अन्य गुर्गे होंगे।

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