उमेश पाल हत्याकांड : नफीस बिरयानी का दाहिना हाथ था पांच लाख का इनामी शूटर अरमान, नौ महीने से चल रहा है फरार
उमेश पाल हत्याकांड में पांच लाख के तीन इनामी शूटर फरार चल रहे हैं जिनमें अरमान भी शामिल है। मूल रूप से बिहार के गया का रहने वाला अरमान सिविल लाइंस में पैलेस सिनेमा के पीछे स्थित बस्ती में अपनी बुआ रुखसार के घर रहता था।
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दो दिन पहले मुठभेड़ में गिरफ्तार 50 हजार के इनामी नफीस बिरयानी के बारे में बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। उमेश पाल हत्याकांड में फरार चल रहा पांच लाख का इनामी शूटर अरमान उसका दाहिना हाथ था। दोनों छह साल पहले दर्ज हत्या के प्रयास के मुकदमे में साथ नामजद हुए थे। इस घटना में नफीस के कहने पर ही शूटर ने सिविल लाइंस में दिनदहाड़े गोली चलाकर सनसनी फैलाई थी।
उमेश पाल हत्याकांड में पांच लाख के तीन इनामी शूटर फरार चल रहे हैं जिनमें अरमान भी शामिल है। मूल रूप से बिहार के गया का रहने वाला अरमान सिविल लाइंस में पैलेस सिनेमा के पीछे स्थित बस्ती में अपनी बुआ रुखसार के घर रहता था।
पुख्ता सूत्रों का कहना है कि अरमान जब बिहार से आया तो सबसे पहले उसका संपर्क नफीस से हुआ। वह बेहद मनबढ़ प्रवृत्ति का था और दबंगई करते फिरा करता था। तब सिविल लाइंस में ही एमजी मार्ग के पास नफीस बिरयानी की दुकान चलाता था। ऐसे में नफीस ने उसे अपना गुर्गा बना लिया। वह उसकी रुपयों से मदद करता था। बदले में अरमान उसके लिए कुछ भी करने को तैयार रहता था।
17 सितंबर 2017 को उसने नफीस के इशारे पर ही एक दुस्साहसिक वारदात की थी। उसने सिविल लाइंस में दिनदहाड़े हत्या की नीयत से सोडा पानी विक्रेता रंजीत कुमार सोनकर पर गोली चला दी थी। बहुगुणा मार्केट निवासी रंजीत दोपहर एक बजे के करीब कामधेनु स्वीट्स के पास अपनी दुकान पर था। आरोप है कि तभी वहां अरमान व 5-6 अन्य लोगों संग पहुंचे नफीस ने कट्टा सटाकर गालीगलौज करते हुए पहले उसे जमकर पीटा। इसके बाद अरमान ने गोली चला दी। दिनदहाड़े हुई इस घटना से सनसनी फैल गई थी।
इस मामले में भुक्तभोगी की पत्नी प्रीति की तहरीर पर सिविल लाइंस पुलिस ने हत्या के प्रयास व एससी एसटी एक्ट समेत अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज कर दोनों को गिरफ्तार किया। बाद में तत्कालीन सीओ सिविल लाइंस श्रीश्चंद ने इस मामले में दोनों के खिलाफ चार्जशीट भी लगाई।
नफीस ने ही शामिल कराया अतीक गैंग में
सूत्रों का कहना है कि शूटर अरमान को नफीस ने ही अतीक गैंग में शामिल कराया। उसने ही उसे पहले अशरफ से मिलवाया। धीरे-धीरे वह अशरफ का भरोसा जीतकर उसका खास बन गया। अशरफ ने ही अतीक से अरमान की पैरवी की और यही वजह थी कि विधानसभा चुनाव के दौरान प्रचार के लिए जाने के दौरान अरमान अतीक की पत्नी शाइस्ता परवीन के साथ हर जगह मौजूद रहता था।
अपने साथ साए की तरह रखता था शूटर को
सूत्रों का कहना है कि अरमान को नफीस अपने साथ साए की तरह रखता था। एमजी मार्ग पर बिरयानी की दुकान चलाने के दौरान वह अक्सर आसपास ही रहता था। नफीस के कहीं जाने पर उसके साथ ही जाता था। पीडी टंडन रोड पर रेस्टोरेंट खोलने के बाद भी काफी दिनों तक वह नफीस का गुर्गा बना रहा। उमेश पाल हत्याकांड के बाद वह फरार हो गया।
अरमान के जरिए ही दोनों पहुंचाते थे बात
सूत्र बताते हैं कि जेल जाने के बाद अरमान के जरिए ही अशरफ व नफीस एक-दूसरे तक अपनी बात पहुंचाते थे। अरमान न सिर्फ नैनी बल्कि कई बार बरेली जेल में जाकर अशरफ से मिला। उसकी हर पेशी के दौरान भी वह उससे मिलने पहुंचता था। अरमान के जरिए ही अशरफ नफीस को जमीन के धंधों के बारे में हुक्म देता था। अरमान के जरिए ही नफीस जैनब तक रुपये पहुंचाता था।