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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Umesh pal murder atiq shooter abdul qavi was protected by Kaushambi police for 18 years weapon license issued

पुलिस की इतनी मेहरबानी क्यों: राजू पाल की हत्या में वांछित था अतीक का शूटर, फिर भी जारी किया रायफल का लाइसेंस

Sun, 09 Apr 2023 01:08 PM IST
पूजा त्रिपाठी आदर्श श्रीवास्तव/अरुण पांडेय, अमर उजाला, मंझनपुर(यूपी)
आदर्श श्रीवास्तव/अरुण पांडेय, अमर उजाला, मंझनपुर(यूपी) Published by: पूजा त्रिपाठी Updated Sun, 09 Apr 2023 01:08 PM IST
सार

28 अगस्त 2006 को तत्कालीन जिलाधिकारी ने शस्त्र लाइसेंस जारी कर दिया। कोतवाली के शस्त्र रजिस्टर में क्रमांक 10,508 पर अब्दुल कवि का नाम दर्ज है।

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Umesh pal murder atiq shooter abdul qavi was protected by Kaushambi police for 18 years weapon license issued
Kaushambi : अब्दुल कवि। फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

माफिया अतीक अहमद के शूटर अब्दुल कवि पर कौशाम्बी पुलिस की 18 साल तक मेहरबानी की बानगी देखिए कि राजू पाल हत्याकांड में आरोपी बनाए जाने के बावजूद उसे रायफल का लाइसेंस दे दिया गया।

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2009 में इसका नवीनीकरण भी कर दिया गया। इंतहा यह कि 2015 में भगोड़ा अब्दुल लाइसेंस की कॉपी पर कलेक्ट्रेट स्थित शस्त्र अनुभाग आकर यूनिक आईडी भी दर्ज करा गया और पुलिस ताकती रह गई। यह रायफल अभी तक बरामद भी नहीं हो सकी है।
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बसपा के विधायक राजू पाल को 25 जनवरी 2005 को प्रयागराज में दौड़ा-दौड़ाकर गोलियों से छलनी किया गया था। एफआईआर में धूल झोंकने में कामयाब रहे अब्दुल कवि के खिलाफ नवंबर 2005 में चार्जशीट दाखिल हुई।
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पाया गया कि अब्दुल कवि ने भी गोलियां बरसाई थीं। गोली लगने से उसका भी हाथ जख्मी हुआ था। उसे अस्पताल में भी भर्ती कराया गया था। हालांकि, शुरुआत में हत्याकांड के विवेचक व धूमनगंज कोतवाली के दरोगा परशुराम सिंह ने उसे क्लीनचिट देते हुए कह दिया कि अब्दुल कवि नाम का कोई शख्स है ही नहीं।

फिर, दरोगा सुरेंद्र सिंह ने उसका नाम जोड़ा। चौथे विवेचक एनएस परिहार ने सरायअकिल कोतवाली के भखंदा गांव स्थित अब्दुल कवि का पता-ठिकाना खोजा।

बिना जांच पड़ताल मिली थी लाइसेंस को स्वीकृति

इस बीच, अब्दुल कवि ने सरकारी तंत्र पर रुतबे और साठ-गांठ की बदौलत वर्ष 2006 में गांव के पते से रायफल के लाइसेंस के लिए आवेदन किया। देशव्यापी चर्चा का मुद्दा होने के बावजूद सरायअकिल कोतवाली के तत्कालीन प्रभारी तरुण पांडेय ने बिना जांच-पड़ताल के शस्त्र आवेदन पर अपनी स्वीकृति दे दी।

28 अगस्त 2006 को तत्कालीन जिलाधिकारी ने शस्त्र लाइसेंस जारी कर दिया। कोतवाली के शस्त्र रजिस्टर में क्रमांक 10,508 पर अब्दुल कवि का नाम दर्ज है। राजू पाल हत्याकांड में फरारी के कारण 2008 में उसके घर की कुर्की तक हुई, लेकिन 28 नवंबर 2009 को उसके शस्त्र लाइसेंस का नवीनीकरण कर दिया गया।

यही नहीं, वर्ष 2014-15 में तत्कालीन शस्त्र लिपिक रहे सुभाष जायसवाल ने लाइसेंस की यूनिक आईडी (6120054412015) भी जारी कर दी।

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