फैसले की घड़ी : उमेश पाल अपहरण केस में अतीक तीनों दोषियों को आजीवन कारावास, अशरफ समेत सात आरोपी बरी
सत्रह वर्ष पुराने उमेश पाल अपहरण केस में मंगलवार को माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ सहित 10 आरोपियों को एमपीएमएलए कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने अतीक अहमद, खान शौकत हनीफ अधिवक्ता और दिनेश पासी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
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विस्तार
राजू पाल हत्याकांड के गवाह रहे उमेश पाल अपहरणकांड में एमपीएमएलए कोर्ट ने माफिया अतीक, दिनेश पासी व अधिवक्ता खान शौलत हनीफ को उम्रकैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने आरोपियों पर 9300 रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। इसके साथ ही एक-एक लाख रुपये क्षतिपूर्ति देने का भी आदेश दिया है। यह क्षतिपूर्ति पीडि़त परिवार को दी जाएगी। सबूत के अभाव में अदालत ने अतीक के भाई खालिद अजीम उर्फ अशरफ समेत सात आरोपियों को बरी कर दिया।
अतीक के खिलाफ 101 मामले दर्ज हैं। उसके 44 साल के अब तक के आपराधिक इतिहास में वह किसी अन्य मामले में दोषी साबित नहीं हुआ था। पहली बार किसी मामले में उसे सजा सुनाई गई है। उसके साथ खान शौलत हनीफ और दिनेश पासी भी पहली बार दोषी ठहराए गए हैं। इन दोनों के खिलाफ भी कई अन्य मामले दर्ज हैं। सजा के साथ ही अतीक अब कभी चुनाव भी नहीं लड़ पाएगा।
अदालत के फैसले से असंतुष्ट दोनों पक्षों ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती देने की बात कही है।विशेष न्यायाधीश (एमपीएमएलए कोर्ट) डॉ. दिनेश चंद्र शुक्ला ने अपने 142 पन्ने के फैसले में यह भी कहा कि अभियुक्तगण फरहान एवं खालिद अजीम उर्फ अशरफ, जावेद उर्फ हनीफ, आबिद, इसरार, आशिक उर्फ मल्ली, एजाज अख्तर, अंसार बाबा (मृतक) किसी और मामले में वांछित न हो तो उन्हें अविलंब रिहा किया जाए।
इसके साथ ही तीनों दोषियों को सजायाबी वारंट जारी बनाकर कारागार भेजने का आदेश दिया। हालांकि, अशरफ अभी राजू पाल हत्याकांड सहित कई अन्य मामलों में आरोपी है। जिसमें जांच सहित ट्रायल कोर्ट में सुनवाई जारी है। इस वजह से वह अभी जेल में ही रहेगा।
रना पड़ा। अधिवक्ताओं ने अतीक के खिलाफ उमेश पाल के समर्थन में नारेबाजी भी की। कोर्ट ने अपनी कार्यवाही दोपहर 12.30 बजे शुरू की। दोपहर दो बजे उसने तीनों आरोपियों के खिलाफ सजा सुनाई। सजा सुनाते वक्त अतीक कोर्ट परिसर में मौजूद रहा। इस दौरान अशरफ से गले मिला तो दोनों भाई भावुक भी हो उठे। सुनवाई शुरू होते ही अतीक ने कोर्ट के सामने अपना पक्ष भी रखा।
उसकेबाद कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया।मंगलवार को कोर्ट परिसर छावनी में तब्दील रहा। अदालत में अतीक और अभियोजन के अधिवक्ताओं के अलावा किसी को भी प्रवेश नहीं करने दिया गया। हर जगह पुलिस, पीएसी, आरएएफ तैनात की गई थी। इस दौरान अतीक, अशरफ को अधिवक्ताओं के आक्रोश का सामना भी कवकीलों ने आरोपियों के खिलाफ की नारेबाजी
उमेश पाल ने धूमनगंज थाने में दर्ज कराई थी रिपोर्ट
हाल ही में मारे गए उमेश पाल ने पांच जुलाई 2007 को धूमनगंज थाने में माफिया अतीक अहमद, उसके भाई खालिद अजीम उर्फ अशरफ, दिनेश पासी, खान शौलत हनीफ, अंसार बाबा के खिलाफ अपहरण कर विधायक राजूपाल हत्याकांड मामले में अपने पक्ष में गवाही करने का आरोप लगाया था। धूमनगंज पुलिस ने आईपीसी की धारा 147, 148, 149, 364, 323, 341, 342, 504, 506, 34, 120बी और सेवन सीएल अमेंडमेंट एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान जावेद उर्फ बज्जू, फरहान, आबिद, इसरार, आसिफ उर्फ मल्ली, एजाज अख्तर का नाम सामने आया था।
2009 में आरोप दाखिल होने के बाद अभियोजन की ओर से कुल उमेश पाल सहित आठ गवाह पेश किए गए। जबकि, बचाव पक्ष की ओर से कुल 54 गवाह पेश किए गए। कोर्ट ने 17 फरवरी को सुनवाई पूरी कर 28 फरवरी को फैसला सुनाने की तिथि निर्धारित की थी। कोर्ट ने अतीक अहमद, दिनेश पासी और खान शौलत हनीफ को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। कोर्ट के आदेश के बाद तीनों को जेल भेज दिया गया। तीनों दोषियों की सजाएं एक साथ चलेंगी।
54 गवाह किए गए थे पेश
पक्षकारों की तरफ से (अतीक अहमद, अशरफ सहित अन्य आरोपियों) अपने बचाव के लिए कुल 54 गवाह पेश किए गए। केस की सुनवाई में देरी होने पर वादी उमेश पाल ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर केस की सुनवाई जल्दी पूरी करने की मांग की। कोर्ट ने तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए ट्रायल कोर्ट को दो महीने में सुनवाई पूरी करने का आदेश दिया था। उसके बाद से ही उमेश पाल अपहरण कांड में रोजाना सुनवाई होने लगी।
24 फरवरी को जिस दिन उमेश पाल की हत्या हुई, इसी केस के सिलसिले में वह कोर्ट से ही लौटे थे। उस दिन बचाव पक्ष की ओर से बहस हो रही थी। उमेश सुनवाई के बाद तकरीबन साढ़े चार बजे जैसे ही घर पहुंचे, बदमाशों ने उनकी हत्या कर दी। इस मामले में भी अतीक, अशरफ, अतीक के बेटे सहित उसकी पत्नी को आरोपी बनाया गया।
इस मामले में कोर्ट ने 17 फरवरी को सुनवाई पूरी कर ली थी और 28 फरवरी को फैसला सुनाने की तिथि निर्धारित की गई थी।
तीनों को इन धाराओं में मिली सजा
खान शौलत हनीफ
364ए, 120बी सश्रम आजीवन कारावास, पांच हजार रुपये का अर्थदंड
अतीक और दिनेश पासी
364ए/34 में सश्रम आजीवन कारावास, पांच हजार- पांच हजार रुपये का अर्थदंड
147 में एक वर्ष, एक-एक हजार रुपये का अर्थदंड
323/149 में छह माह पांच सौ-पांच सौ रुपये का अर्थदंड
341 में 15 दिन तीन-तीन सौ रुपये का अर्थदंड
342 छह माह पांच-पांच सौ रुपये का अर्थदंड
504 एक वर्ष पांच-पांच रुपये का अर्थदंड
506(2) तीन वर्ष एक-एक हजार रुपये का अर्थदंड7 सीएलए एक्ट में छह-छह माह कारावास व पांच सौ पांच सौ रुपये का अर्थदंड
उमेश पाल का अपहरण कर किया था टॉर्चर
उमेश पाल ने पांच जुलाई 2007 को धूमनगंज थाने में उस समय सांसद रहे अतीक अहमद, उसके भाई खालिद अजीम उर्फ अशरफ, दिनेश पासी, खान सौकत हनीफ, अंसार बाबा के खिलाफ अपहरण कर विधायक राजू पाल हत्याकांड मामले में अपने पक्ष में बयान करने का आरोप लगाया था। धूमनगंज पुलिस ने उमेश पाल की तहरीर पर आईपीसी की धारा 147, 148, 149, 364, 323, 341, 342, 504, 506, 34, 120बी और सेवन सीएल अमेंडमेंट एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की।
अतीक के वकील बोले- फैसले को हाईकोर्ट में देंगे चुनौती
माफिया अतीक अहमद के वकील दयाशंकर ने कहा कि वह स्पेशल कोर्ट के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती देंगे।
उमेश के वकील बोले- फैसले से संतुष्ट नहीं
उमेश पाल के वकील राजेश का कहना है कि वह फैसले से संतुष्ट नहीं हैं। आर्डर का अध्ययन करने के बाद आगे का निर्णय लिया जाएगा। कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने अतीक अहमद को साबरमती जेल में शिफ्ट करने का आदेश दिया है।
केशव ने फैसले को बताया स्वागत योग्य
प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने अतीक और अन्य को उम्रकैद की सजा का स्वागत किया है। केशव ने ट्वीट करके कहा है कि प्रयागराज के कोर्ट से अतीक और अन्य को उम्रकैद की सजा का स्वागत है। कोई अपराधी कान से न बड़ा है न बच सकता है।
उमेश की पत्नी ने कहा- फांसी की सजा से कम कुछ भी मंजूर नहीं
फैसला आने के बाद उमेश पाल की पत्नी जया पाल ने सात लोगों को बरी किए जाने पर नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि फांसी की सजा से कम कुछ भी मंजूर नहीं है।