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Umesh Pal Hatyakand: हथियार चलाने में मास्टर था विजय, इसी काबिलियत पर ही उमेश की हत्या के लिए उसे चुना लेकिन..
Tue, 07 Mar 2023 12:47 PM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: शाहरुख खान
Updated Tue, 07 Mar 2023 12:47 PM IST
सार
प्रयागराज में पुलिस एनकाउंटर में मारे गए विजय उर्फ उस्मान की अतीक गिरोह में एंट्री शूटर गुलाम हसन के माध्यम से हुई थी। एक सीमेंट एजेंसी में गाड़ी चलाने वाले विजय को जल्द ही गिरोह का भौकाल भाने लगा। हथियार चलाने का भी वह मास्टर हो गया। असलहे चलाने की उसकी काबिलियत को देखकर ही उमेश पाल की हत्या के लिए उसे चुना गया।
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Umesh Pal Hatyakand
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
प्रयागराज के कौंधियारा थाना इलाके के भगोकर गांव का रहने वाला विजय चौधरी उर्फ उस्मान 24 फरवरी को दिन में घर से बाइक लेकर निकला था। इसके बाद वह तीन मार्च को गांव वापस लौटा। तीन दिन से वह गांव में ही छिपकर रह रहा था। पुलिस को विजय के बारे में रविवार को जानकारी मिली।
इसके बाद शाम को गांव में घेरेबंदी की गई। विजय को अतीक गिरोह में दो साल पहले गुलाम हसन के माध्यम से एंट्री मिली थी। शूटआउट में पांच लोगों को पहचान लिया गया था लेकिन विजय के बारे में रविवार तक किसी को कानोकान खबर नहीं थी। अगर होती तो डीजीपी रविवार को उस पर भी ढाई लाख इनाम की घोषणा कर चुके होते।
विजय चौधरी उर्फ उस्मान ऐसा नाम था जिसे सोमवार से पहले कोई नहीं जानता था। पुलिस ने भी शूटरों में असद, गुलाम, गुड्डू मुस्लिम, अरमान और साबिर को चिन्हित किया था। अरबाज को कार चालक के रूप में चिन्हित किया गया था। छठवे शूटर के बारे में रविवार तक किसी को भी भनक नहीं थी।
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रविवार को ही डीजीपी ने पांच आरोपियों पर ढाई ढाई लाख का इनाम घोषित किया था, उसमें विजय उर्फ उस्मान का नाम नहीं था। बहरहाल रविवार को ही पुलिस को विजय और उस्मान के बारे में पता चला। पुलिस को सर्विलांस से यह भी जानकारी मिल गई थी कि उसकी लोकेशन गांव में ही है। शाम को गांव में घेरबंदी कर ली गई।
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इसके बाद शाम को गांव में घेरेबंदी की गई। विजय को अतीक गिरोह में दो साल पहले गुलाम हसन के माध्यम से एंट्री मिली थी। शूटआउट में पांच लोगों को पहचान लिया गया था लेकिन विजय के बारे में रविवार तक किसी को कानोकान खबर नहीं थी। अगर होती तो डीजीपी रविवार को उस पर भी ढाई लाख इनाम की घोषणा कर चुके होते।
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विजय चौधरी उर्फ उस्मान ऐसा नाम था जिसे सोमवार से पहले कोई नहीं जानता था। पुलिस ने भी शूटरों में असद, गुलाम, गुड्डू मुस्लिम, अरमान और साबिर को चिन्हित किया था। अरबाज को कार चालक के रूप में चिन्हित किया गया था। छठवे शूटर के बारे में रविवार तक किसी को भी भनक नहीं थी।
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रविवार को ही डीजीपी ने पांच आरोपियों पर ढाई ढाई लाख का इनाम घोषित किया था, उसमें विजय उर्फ उस्मान का नाम नहीं था। बहरहाल रविवार को ही पुलिस को विजय और उस्मान के बारे में पता चला। पुलिस को सर्विलांस से यह भी जानकारी मिल गई थी कि उसकी लोकेशन गांव में ही है। शाम को गांव में घेरबंदी कर ली गई।
सोमवार तड़के मुठभेड़ में पुलिस ने विजय उर्फ उस्मान को मार गिराया। पुलिस सूत्रों के मुताबिक गुलाम हसन के माध्यम से विजय की अतीक गिरोह में एंट्री हुई थी। एक सीमेंट एजेंसी में गाड़ी चलाने वाले विजय को जल्द ही गिरोह का भौकाल भाने लगा। गिरोह के संपर्क में आने के बाद उसने पैसा भी कमाया। हथियार चलाने का भी वह मास्टर हो गया।
काबिलियत देखकर ही उमेश पाल की हत्या के लिए विजय को चुना
असलहे चलाने की उसकी काबिलियत को देखकर ही उमेश पाल की हत्या के लिए उसे चुना गया। अगर उस दिन सब कुछ सही होता तो विजय ही उमेश और सिपाहियों को मारकर भाग जाता। अन्य किसी की जरूरत ही नहीं पड़ती लेकिन गोली लगने के बाद भी उमेश घर के अंदर की ओर भाग गया। इसके बाद गुलाम फिर असद और गुड्डू मुस्लिम ने मोर्चा संभाल लिया। साबिर और अरमान भी फायर करते हुए अंदर घुस गए।
असलहे चलाने की उसकी काबिलियत को देखकर ही उमेश पाल की हत्या के लिए उसे चुना गया। अगर उस दिन सब कुछ सही होता तो विजय ही उमेश और सिपाहियों को मारकर भाग जाता। अन्य किसी की जरूरत ही नहीं पड़ती लेकिन गोली लगने के बाद भी उमेश घर के अंदर की ओर भाग गया। इसके बाद गुलाम फिर असद और गुड्डू मुस्लिम ने मोर्चा संभाल लिया। साबिर और अरमान भी फायर करते हुए अंदर घुस गए।
हत्याकांड को अंजाम देने के बाद सभी चकिया पहुंचे। यहां के बाद विजय भी कहीं भाग निकला। सूत्र बताते हैं कि वह कुछ बुंदेलखंड के एक जिले में रह रहा था। उमेश पाल से जुड़े हर समाचार पर उसकी नजर थी लेकिन जब हफ्ते भर से ज्यादा समय तक उसका नाम कहीं नहीं आया तो उसे लगा कि वह बच गया। इसी कांफिडेंस में वह तीन फरवरी की रात अपने गांव चला आया। हालांकि वह मोबाइल का प्रयोग नहीं कर रहा था। न ही अपने घर में रह रहा था। गांव में ही एक घर में उसने पनाह ले रखी थी लेकिन पुलिस उस तक पहंच गई।
गुलाम हसन की सीडीआर से पुलिस पहुंच गई विजय तक
प्रयागराज। गुलाम हसन की सीडीआर ( कॉल डीटेल्स रिकार्ड) से पुलिस विजय उर्फ उस्मान तक पहुंच गई। घटना से पहले गुलाम और विजय के बीच काफी बात हुई थी। विजय का मोबाइल बंद था। तब पुलिस ने उसकी भी सीडीआर निकलवाई। घर वालों के नंबर मिलने के बाद पुलिस ने गांव में घेरेबंदी कर दी।
प्रयागराज। गुलाम हसन की सीडीआर ( कॉल डीटेल्स रिकार्ड) से पुलिस विजय उर्फ उस्मान तक पहुंच गई। घटना से पहले गुलाम और विजय के बीच काफी बात हुई थी। विजय का मोबाइल बंद था। तब पुलिस ने उसकी भी सीडीआर निकलवाई। घर वालों के नंबर मिलने के बाद पुलिस ने गांव में घेरेबंदी कर दी।