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Atiq Ahmed: अतीक के आगे नहीं झुके राजूपाल हत्याकांड के विवेचक, पाक से आता था धमकी भरा फोन, भाई को फंसाया तो...

Thu, 30 Mar 2023 10:30 AM IST
शाहरुख खान त्रिलोकी यादव, अमर उजाला, प्रयागराज
त्रिलोकी यादव, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: शाहरुख खान Updated Thu, 30 Mar 2023 10:30 AM IST
सार

विधायक राजू पाल हत्याकांड में चार विवेचक बदले गए। चौथे विवेचक अतीक के आतंक के आगे नहीं झुके। चौथे विवेचक के पास पाकिस्तान के नंबर से फोन आता था। उन्हें 50 लाख की पेशकश की गई। 

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Umesh Pal Case Investigator of Rajupal murder case received threatening calls from Pakistan
Atique Ahmed - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अतीक अहमद का खौफ एक समय न सिर्फ आम लोगों में, बल्कि पुलिस विभाग में भी व्याप्त था। पूरे देश को दहला देने वाले राजू पाल हत्याकांड में चार साल में चार विवेचक बदल गए। विवेचकों पर इतना दबाव था कि कोई भी इस घटना की विवेचना नहीं करना चाहता था। अब इस मामले की जांच सीबीआई कर रही है।
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राजू पाल हत्याकांड के चौथे विवेचक नारायण सिंह परिहार को 2008 में 50 लाख रुपये का ऑफर दिया गया। न मानने पर दुष्कर्म में फंसाने की धमकी भी दी गई लेकिन नारायण सिंह नहीं झुके। उन्होंने न सिर्फ अतीक-अशरफ और उनके गुर्गों के खिलाफ चार्जशीट लगाई, बल्कि छह और आरोपियों को भी एफआईआर में शामिल किया, जिसमें गुड्डू मुस्लिम भी था। 
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उनके मोबाइल पर कई बार पाकिस्तान के नंबरों से धमकी भरे फोन आए। विधायक राजू पाल को 25 जनवरी 2005 को दिनदहाड़े गोलियों से भून दिया गया था। इस मामले में पहली विवेचना तत्कालीन थानाध्यक्ष धूमनगंज परशुराम सिंह को मिली थी। इसके बाद इंस्पेक्टर कोतवाली रहे सुरेंद्र सिंह को इसकी विवेचना सौंपी गई। 
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सुरेंद्र सिंह ने महीनों मेहनत कर चार्जशीट तैयार की। चार्जशीट में अब्दुल कवि समेत दो और लोगों का नाम बढ़ाए लेकिन उनका ट्रांसफर कर दिया गया। इसके बाद इंस्पेक्टर कोतवाली रहे एचएस राय को विवेचना सौंपी गई। मामला चलता रहा। एचएस राय ने लिख दिया कि अब्दुल कवि नाम का कोई शख्स ही नहीं है। 2008 में चौथे विवेचक नारायण सिंह परिहार को विवेचना सौंपी गई, जोकि अब रिटायर हो चुके हैं।

कागज में लिख रखा था, मेरी मौत होने पर अतीक होगा जिम्मेदार

नारायण सिंह बताते हैं कि उनकी विवेचना में छह और लोगों के नाम जोड़े गए। इसमें गुड्डू मुस्लिम का भी था। जब वे विवेचना कर रहे थे तो उनके पास कई बार पाकिस्तान के नंबरों से धमकी भरे फोन आए। कहा गया कि ‘भाई’ को फंसाया तो बचोगे नहीं। उन्होंने पूरी जानकारी अधिकारियों को दी। डीजीपी को भी बताया। इसी के बाद वे अपनी जेब और घर के ब्रीफकेस में एक कागज रखने लगे, जिसमें लिखा था कि उनकी मौत किसी कारण से हुई तो इसकी जिम्मेदार अतीक अहमद ही होगा। एक बार तो उन्हें 50 लाख का ऑफर दिया गया। 

कहा गया कि चार्जशीट भी लगा दो लेकिन केस ऐसा बनाओ कि अदालत में टिक न पाए। एक बार दबी जुबान में धमकी दी गई कि अतीक जिसको चाहता है, उसे दुष्कर्म में फंसा देता है। राजू पाल हत्याकांड में नारायण सिंह परिहार के बाद विवेचना 2009 में सीबीसीआईडी को सौंपी गई। 2016 से जांच सीबीआई कर रही है।

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अशरफ की मोबाइल लोकेशन निकालने पर इंस्पेक्टर का रातोंरात हुआ था ट्रांसफर
राजू पाल हत्याकांड की विवेचना करने वाले दूसरे विवेचक सुरेंद्र सिंह का रातों रात सिर्फ इसलिए तबादला कर दिया गया था कि उन्होंने अशरफ की मोबाइल लोकेशन को विवेचना में शामिल कर लिया था।

अशरफ ने राजू पाल का पीछा किया था। राजू पाल के मोबाइल की लोकेशन जहां जहां थी, अशरफ के मोबाइल की लोकेशन भी वहीं ट्रेस हुई थी। जिस दिन यह तथ्य विवेचना में शामिल किया गया, उसी दिन सुरेंद्र सिंह के खिलाफ 13 मामलों में जांच के आदेश दिए गए। रात में उनका बांदा ट्रांसफर हो गया।

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