{"_id":"6f9dd42109497091cd630bb2e1a1af8d","slug":"ugc-net-change-paper-format-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"यूजीसी नेट के पेपर का बदला प्रारूप","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
यूजीसी नेट के पेपर का बदला प्रारूप
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
Updated Sun, 28 Dec 2014 11:39 PM IST
विज्ञापन
रविवार को आयोजित यूजीसी की राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (नेट) के पेपर प्रारूप में बड़ा बदलाव देखने को मिला। इस बार सवालों को पढ़ने और समझने में काफी वक्त लग रहा था। इसके अलावा पेपर कठिन भी रहा। मानक के अनुसार पेपर नहीं होने की लगातार शिकायतों के मद्देनजर सीबीएसई ने यह बदलाव किया। हालांकि इसके बावजूद बड़ी संख्या में अभ्यर्थी निर्धारित अवधि से पहले ही पेपर हल कर चुके थे। यूजीसी ने दो साल पहले नेट का परीक्षा प्रारूप बदल दिया। इसके तहत तीसरा पेपर भी वस्तुनिष्ठ आधारित हो गया है। पहले विस्तृत उत्तरीय सवाल पूछे जाते थे। इस बदलाव के बाद अभ्यर्थियाें की संख्या में तीन गुना से भी अधिक की बढ़ोतरी हो गई है। इस बार भी इलाहाबाद में 31 हजार से अधिक अभ्यर्थी पंजीकृत रहे। इतना ही नहीं जेआरएफ और नेट क्वालीफाई करने वालों की संख्या भी 10 गुना तक बढ़ गई है। अकेले इलाहाबाद में पिछली परीक्षा में तकरीबन तीन हजार अभ्यर्थियों ने नेट क्वालीफाई किया। इसका मुख्य कारण पेपर काफी आसान रहना तथा इसका प्रारूप भी है। तीसरे पेपर में 75 सवाल पूछे जाते हैं। इसके लिए ढाई घंटे निर्धारित हैं। पिछली कई परीक्षाओं में यह आलम रहा कि एक घंटे में पेपर हल करके अभ्यर्थी बाहर निकलने लगते। 75 फीसदी से अधिक अभ्यर्थी डेढ़ घंटे में ही बाहर हो जाते। इसकी वजह से व्यापक नकल की भी शिकायत रही। इसे लेकर परीक्षा संचालकों और विशेषज्ञों ने कड़ी आपत्ति उठाई। इस तरह की शिकायतें यूजीसी को लगातार मिलीं।
इन परेशानी के मद्देनजर अभ्यर्थियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए यूजीसी ने परीक्षा कराने के लिए सीबीएसई से करार किया। इसके तहत यह पहली परीक्षा रही। हालांकि परीक्षा के प्रारूप में कोई बदलाव नहीं किया गया है लेकिन लगातार शिकायतों को देखते हुए सीबीएसई ने लेंदी पेपर बनाया। बिशप जानसन स्कूल केंद्र से परीक्षा देकर निकले अमित माथुर, आलोक सिंह ने बताया कि पेपर पिछले वर्षों की तुलना में काफी कठिन पेपर रहा। अनामिका मिश्रा ने बताया कि पेपर में सीटैट का असर भी दिखा तथा टीचर्स एप्टीट्यूट से कई सवाल पूछे गए थे। हालांकि इन बदलावों के बावजूद ज्यादातर अभ्यर्थी समय से पहले पेपर हल कर चुके थे। इसकी वजह से परीक्षा कक्ष में एक-दूसरे से जवाब पूछे जाने की शिकायत आम रही। परीक्षा में कुल 26360 अभ्यर्थी शामिल हुए। हालांकि पहली पाली में 26616 अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी। कोऑर्डिनेटर प्रोफेसर एके श्रीवास्तव ने बताया कि परीक्षा में किसी प्रकार की गड़बड़ी की सूचना नहीं है।
सिविल सर्विसेज के सीसैट के पेपर की तरह यूजीसी ने में भी हिन्दी वर्जन को लेकर अभ्यर्थियों को परेशानी उठानी पड़ी। हिन्दी के काफी कठिन शब्द उपयोग किए गए थे। अभ्यर्थियों का कहना था कि इसमें भी अंग्रेजी के कई शब्दों का अक्षरश: ट्रासंलेट किया गया था। इससे अभ्यर्थियों में नाराजगी रही।
विज्ञापन
विज्ञापन
इन परेशानी के मद्देनजर अभ्यर्थियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए यूजीसी ने परीक्षा कराने के लिए सीबीएसई से करार किया। इसके तहत यह पहली परीक्षा रही। हालांकि परीक्षा के प्रारूप में कोई बदलाव नहीं किया गया है लेकिन लगातार शिकायतों को देखते हुए सीबीएसई ने लेंदी पेपर बनाया। बिशप जानसन स्कूल केंद्र से परीक्षा देकर निकले अमित माथुर, आलोक सिंह ने बताया कि पेपर पिछले वर्षों की तुलना में काफी कठिन पेपर रहा। अनामिका मिश्रा ने बताया कि पेपर में सीटैट का असर भी दिखा तथा टीचर्स एप्टीट्यूट से कई सवाल पूछे गए थे। हालांकि इन बदलावों के बावजूद ज्यादातर अभ्यर्थी समय से पहले पेपर हल कर चुके थे। इसकी वजह से परीक्षा कक्ष में एक-दूसरे से जवाब पूछे जाने की शिकायत आम रही। परीक्षा में कुल 26360 अभ्यर्थी शामिल हुए। हालांकि पहली पाली में 26616 अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी। कोऑर्डिनेटर प्रोफेसर एके श्रीवास्तव ने बताया कि परीक्षा में किसी प्रकार की गड़बड़ी की सूचना नहीं है।
विज्ञापन
सिविल सर्विसेज के सीसैट के पेपर की तरह यूजीसी ने में भी हिन्दी वर्जन को लेकर अभ्यर्थियों को परेशानी उठानी पड़ी। हिन्दी के काफी कठिन शब्द उपयोग किए गए थे। अभ्यर्थियों का कहना था कि इसमें भी अंग्रेजी के कई शब्दों का अक्षरश: ट्रासंलेट किया गया था। इससे अभ्यर्थियों में नाराजगी रही।
विज्ञापन