{"_id":"5da22b268ebc3e017941fe70","slug":"tv-mobile-is-giving-arthritis-disease-to-women-allahabad-news-ald257355862","type":"story","status":"publish","title_hn":"टीवी-मोबाइल महिलाओं को दे रहा गठिया रोग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
टीवी-मोबाइल महिलाओं को दे रहा गठिया रोग
विज्ञापन
TV-mobile is giving arthritis disease to women
झाड़ू-पोछा, बर्तन धोने के लिए बाई लगी है। कपडे़ धोने के लिए आटोमैटिक मशीन है। सिर्फ खाना ही पकाना है या सामने बनवाना है... ऐसी आरामतलब जिंदगी में लगातार टीवी या मोबाइल फोन देखने वाली महिलाएं आर्थराइटिस यानी गठिया की मरीज बन रही हैं। उन्हें बुढ़ापे का यह रोग 30 से 35 वर्ष की उम्र में ही घेर रहा है। शरीर के जोड़ों में दर्द, गठिया, मांसपेशियों में दर्द की शिकायत लेकर डॉक्टरों के पास पहुंची महिलाओं में एक बात लगभग एक सी रही कि वह सप्ताह में पांच दिन या अधिक टीवी के सामने रहीं या उनके हाथ में मोबाइल फोन रहा। साफ है टीवी और फोन महिलाओं को गठिया का रोगी बना रहा है।
केस एक- सिविल लाइंस के एक अपार्टमेंट में रहने वाली तूलिका (बदला नाम) के कमर में दर्द बना रहता है। अब नसों का खिंचाव गर्दन से सिर तक पहुंच गया है। हाथों की उंगलियों में सूजन है। पैथालॉजी जांच में यूरिक एसिड बढ़ा आया, कैल्शियम की कमी भी मिली। कारण बना टीवी, वह शाम छह से साढ़े नौ बजे तक सीरियल देखती हैं। दिन में मोबाइल फोन पर हाथ चलता है।
केस दो- बैंक कर्मी हर्षिता (बदला नाम) दिन में पांच घंटे कंप्यूटर पर काम करती हैं। बीच-बीच में मोबाइल पर भी नजर रहती है। मैसेज करने में उंगलियों का चलाना और गलत तरीके से कुर्सी पर बैठना उनकी मांसपेशियों में खिंचाव का कारण बना है। बारिश के बाद नमी बढ़ी तो दर्द से कराहने लगीं। डॉक्टरों ने दवाओं से दर्द कम किया फिर फिजियोथेरेपी कराने की सलाह दी।
विज्ञापन
केस तीन- गृहणी मंजरी (बदला नाम) गृहणी हैं। जार्जटाउन में उनका फ्लैट है, लेकिन घरेलू काम न के बराबर। शरीर का वजन तो बढ़ा ही, मांसपेशियों में खिंचाव के साथ घुटनों में सूजन आ गई। अब कमर से गर्दन तक दर्द परेशानी का कारण बना है। दो से तीन घंटे टीवी देखना और मोबाइल पर चैटिंग करना उनकी आदत में शामिल हैं। नतीजा आर्थराइटिस के रूप में सामने है।
महिलाएं ही नहीं युवा और बच्चे भी पीड़ित
अनियमित दिनचर्या, कंप्यूटर के सामने घंटों बैठना, मोबाइल पर चैटिंग, बाइक का चलाना युवाओं बुढ़ापे के रोग से पीड़ित कर रहा है। इस बदले मौसम में बुजुर्गों के साथ युवा भी उंगलियों में सूजन, मांसपेशियों में खिंचाव और दर्द की शिकायत लेकर डॉक्टरों के पास पहुंच रहे हैं। यही नहीं 63 फीसदी स्कूली बच्च्चे भी मांसपेशियों में दर्द की परेशानी बता रहे हैं। इसकी बड़ी वजह बस्ते का बोझ और मोबाइल का इस्तेमाल है। एम्स के डॉक्टरों ने स्कूली बच्चों पर किए गए एक अध्ययन के बाद यह चौंकाने वाला सच सामने आया। दस से 19 वर्ष तक के बच्चों में कई को कमर और कूल्हे के साथ गर्दन में भी दर्द की शिकायत रही। यहां भी स्थिति कुछ ऐसी ही है। बच्चों को लेकर डॉक्टरों के पास पहुंचे अभिभावकों ने भी इसी तरह की परेशानियां बताईं।
वर्जन
महिलाएं अपने स्वास्थ्य के प्रति लापरवाह रहती हैं। टीवी, मोबाइल के साथ खानपान में ध्यान नहीं देतीं। वहीं बच्चों को पौष्टिक आहार न मिलने और उनकी जीवनशैली संतुलित न होने के कारण तकलीफें बढ़ रही हैं। व्यायाम को दिनचर्या में शामिल करेंगे तो परेशानी पास नहीं फटकेगी।
डॉ. जितेंद्र जैन, हड्डी रोग और सेरेब्रल पालसी विशेषज्ञ
000000000
अनियमित दिनचर्या और मोबाइल की लत गठिया रोग बांट रही है। मांसपेशियों में खिंचाव, दर्द का कारगर इलाज दवा नहीं फिजियोथेरेपी है। शारीरिक श्रम में कमी, तनाव से बढ़ता वजन शरीर के भार वाले हिस्से के जोड़ों को जकड़ रहा है। पीड़ितों में महिलाओं का अनुपात पुरुषों के मुकाबले लगभग दोगुना है।
डॉ. राकेश चंद्रा, फिजियोथेरेपिस्ट
विज्ञापन
केस एक- सिविल लाइंस के एक अपार्टमेंट में रहने वाली तूलिका (बदला नाम) के कमर में दर्द बना रहता है। अब नसों का खिंचाव गर्दन से सिर तक पहुंच गया है। हाथों की उंगलियों में सूजन है। पैथालॉजी जांच में यूरिक एसिड बढ़ा आया, कैल्शियम की कमी भी मिली। कारण बना टीवी, वह शाम छह से साढ़े नौ बजे तक सीरियल देखती हैं। दिन में मोबाइल फोन पर हाथ चलता है।
विज्ञापन
केस दो- बैंक कर्मी हर्षिता (बदला नाम) दिन में पांच घंटे कंप्यूटर पर काम करती हैं। बीच-बीच में मोबाइल पर भी नजर रहती है। मैसेज करने में उंगलियों का चलाना और गलत तरीके से कुर्सी पर बैठना उनकी मांसपेशियों में खिंचाव का कारण बना है। बारिश के बाद नमी बढ़ी तो दर्द से कराहने लगीं। डॉक्टरों ने दवाओं से दर्द कम किया फिर फिजियोथेरेपी कराने की सलाह दी।
विज्ञापन
केस तीन- गृहणी मंजरी (बदला नाम) गृहणी हैं। जार्जटाउन में उनका फ्लैट है, लेकिन घरेलू काम न के बराबर। शरीर का वजन तो बढ़ा ही, मांसपेशियों में खिंचाव के साथ घुटनों में सूजन आ गई। अब कमर से गर्दन तक दर्द परेशानी का कारण बना है। दो से तीन घंटे टीवी देखना और मोबाइल पर चैटिंग करना उनकी आदत में शामिल हैं। नतीजा आर्थराइटिस के रूप में सामने है।
महिलाएं ही नहीं युवा और बच्चे भी पीड़ित
अनियमित दिनचर्या, कंप्यूटर के सामने घंटों बैठना, मोबाइल पर चैटिंग, बाइक का चलाना युवाओं बुढ़ापे के रोग से पीड़ित कर रहा है। इस बदले मौसम में बुजुर्गों के साथ युवा भी उंगलियों में सूजन, मांसपेशियों में खिंचाव और दर्द की शिकायत लेकर डॉक्टरों के पास पहुंच रहे हैं। यही नहीं 63 फीसदी स्कूली बच्च्चे भी मांसपेशियों में दर्द की परेशानी बता रहे हैं। इसकी बड़ी वजह बस्ते का बोझ और मोबाइल का इस्तेमाल है। एम्स के डॉक्टरों ने स्कूली बच्चों पर किए गए एक अध्ययन के बाद यह चौंकाने वाला सच सामने आया। दस से 19 वर्ष तक के बच्चों में कई को कमर और कूल्हे के साथ गर्दन में भी दर्द की शिकायत रही। यहां भी स्थिति कुछ ऐसी ही है। बच्चों को लेकर डॉक्टरों के पास पहुंचे अभिभावकों ने भी इसी तरह की परेशानियां बताईं।
वर्जन
महिलाएं अपने स्वास्थ्य के प्रति लापरवाह रहती हैं। टीवी, मोबाइल के साथ खानपान में ध्यान नहीं देतीं। वहीं बच्चों को पौष्टिक आहार न मिलने और उनकी जीवनशैली संतुलित न होने के कारण तकलीफें बढ़ रही हैं। व्यायाम को दिनचर्या में शामिल करेंगे तो परेशानी पास नहीं फटकेगी।
डॉ. जितेंद्र जैन, हड्डी रोग और सेरेब्रल पालसी विशेषज्ञ
000000000
अनियमित दिनचर्या और मोबाइल की लत गठिया रोग बांट रही है। मांसपेशियों में खिंचाव, दर्द का कारगर इलाज दवा नहीं फिजियोथेरेपी है। शारीरिक श्रम में कमी, तनाव से बढ़ता वजन शरीर के भार वाले हिस्से के जोड़ों को जकड़ रहा है। पीड़ितों में महिलाओं का अनुपात पुरुषों के मुकाबले लगभग दोगुना है।
डॉ. राकेश चंद्रा, फिजियोथेरेपिस्ट