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High Court : पार्टियों में मतभेद खत्म तो ट्रायल का कोई मतलब नहीं, पॉक्सो मामले में मुकदमे की कार्रवाई रद्द
Wed, 25 Mar 2026 04:06 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 25 Mar 2026 04:06 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपी और पीड़िता ने मतभेद खत्म कर शादी कर ली तो ट्रायल का कोई मतलब नहीं रह जाता। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना की एकल पीठ ने आरोपी के खिलाफ मुरादाबाद के भोजपुर थाने में दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट में दर्ज मुकदमे की पूरी कार्यवाही रद्द कर दी।
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि आरोपी और पीड़िता ने मतभेद खत्म कर शादी कर ली तो ट्रायल का कोई मतलब नहीं रह जाता। इस टिप्पणी संग न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना की एकल पीठ ने आरोपी के खिलाफ मुरादाबाद के भोजपुर थाने में दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट में दर्ज मुकदमे की पूरी कार्यवाही रद्द कर दी।
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पीड़िता के पिता ने 20 मई 2020 को आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई थी। पुलिस ने मामले में जून 2020 को चार्जशीट भी दाखिल कर दी थी। मुकदमा ट्रायल कोर्ट में लंबित है। याची ने कार्यवाही रद्द करने की मांग कर हाईकोर्ट में अर्जी दायर की थी।
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याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि आरोपी और पीड़िता एक ही गांव के थे और उनके बीच प्रेम संबंध था। उस समय दोनों नाबालिग थे। बाद में दोनों ने शादी कर ली है। पीड़िता के पिता और आरोपी के बीच समझौता हो गया है, जिसे ट्रायल कोर्ट ने जनवरी 2026 को सत्यापित भी कर दिया है।
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