फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Treatment for Ayushman beneficiaries at private hospitals begins after a deposit of 10,000.

Prayagraj News: निजी अस्पतालों में 10 हजार जमा कराने के बाद शुरू होता है आयुष्मान लाभार्थियों का इलाज

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 16 Sep 2026 02:30 AM IST
विज्ञापन
Treatment for Ayushman beneficiaries at private hospitals begins after a deposit of 10,000.
आयुष्मान पैनल में शामिल होने के लिए निजी अस्पताल संचालक भले ही बेचैन हों लेकिन उन्हें इसपर विश्वास बिलकुल नहीं है। इसका खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ता है। आयुष्मान लाभार्थियों का उपचार शुरू करने से पहले निजी अस्पताल संचालक 10 से 15 हजार रुपये इलाज शुरू करने के नाम पर जमा करा लेते हैं।
विज्ञापन

अस्पताल संचालकों का कहना है कि कई बार मरीज का उपचार शुरू होने के बाद कार्ड सत्यापित नहीं होता है। जिसको देखते हुए यह व्यवस्था लागू की गई है। हालांकि अधिकांश मामलों में टोकेन मनी के रूप में जमा रुपये उपचार में इधर-उधर का खर्च दिखाकर वापस करने से मना कर दिया जाता है।
विज्ञापन



केस : 1
सहसों निवासी 60 वर्षीय सूर्यकांत मिश्रा को सांस लेने में तकलीफ थी। 26 अगस्त को रात करीब 8 बजे उन्हें जॉर्जटाउन के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराने लाया गया। जहां पर आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद मरीज के परिजनों से यह कहकर 10 हजार रुपये जमा कराए गए कि रात में आयुष्मान कार्ड चालू नहीं होगा जब तक कार्ड से इलाज शुरू नहीं होगा तब तक के लिए रुपये जमा करने होंगे। आयुष्मान कार्ड के शुरू होने पर आईसीयू में रखकर फोटो खीची जाती फिर वापस जनरल वार्ड में भर्ती कर दिया जाता। करीब दो से तीन दिनों तक यही खेल चला। जिसके बाद परिजनों ने मरीज को अस्पताल से निकाल लिया।
विज्ञापन
विज्ञापन

केस : 2

कौशाम्बी के मंझनपुर निवासी 70 वर्षीय परशुराम को हार्ट में समस्या के चलते 13 सितंबर को रामबाग स्थित एक निजी चिकित्सालय में भर्ती कराया गया। इस दौरान अस्पताल प्रबंधन ने आयुष्मान कार्ड लेने से मना कर दिया। उनका कहना था कि 15 हजार जमा करो, तभी उपचार शुरू होगा। वहीं, 15 हजार रुपये जमा कराने के बाद आयुष्मान कार्ड भी सत्यापित हो गया। मगर अस्पताल प्रबंधन ने बेड चार्ज के नाम पर प्रतिदिन पांच हजार रुपये अलग से जमा कराया। जिसके बाद परिजन 15 सितंबर को अस्पताल से डिस्चार्ज कराकर दूसरी जगह ले गए।


मुझे इसकी जानकारी नहीं है, अगर मेरे पास कोई शिकायत आएगी, तो मैं कार्रवाई करूंगा। हालांकि, इस जानकारी के बाद मैं अस्पताल प्रबंधन से इस संबंध में जवाब मांगूंगा। -डॉ. राजेश सिंह, नोडल, प्रधानमंत्री आयुष्मान योजना
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed