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Fraud Case : करोड़ों की ठगी में फर्म के खाते से होता था लेनदेन, पुलिस की पूछताछ में हुए अहम खुलासे

Mon, 14 Nov 2022 06:18 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 14 Nov 2022 06:18 AM IST
सार

Fraud Case : दरअसल अजहर ने जेल भेजे जाने से पहले पूछताछ में कई अहम बातें पुलिस को बताईं। उन जानकारियों के आधार पर जांच आगे बढ़ी तो पता चला कि आरोपी अजहर ने कुछ लोगों संग मिलकर एक फर्म बनाई थी। रेलवे स्क्रैप का ठेका दिलाने के नाम पर रकम का लेनदेन इसी खाते से होता था। 

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transactions were done from the firm account in Fraud case
Prayagraj News : पुलिस के हत्थे चढ़ा ठगी का आरोपी अजहर उस्मानी। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

रेलवे स्क्रैप का ठेका दिलाने के नाम पर करोड़ों की ठगी का खेल एक फर्म के माध्यम से होता था। रकम का लेनदेन फर्म के खाते से ही होता था। फर्म आरोपी अजहर अनीस उस्मानी ने अपने नाम से बनाई थी। फर्म के खाते से रकम निकालकर ही वह आगे पहुंचाता था। पुलिस की जांच में यह बात सामने आई है। 

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दरअसल अजहर ने जेल भेजे जाने से पहले पूछताछ में कई अहम बातें पुलिस को बताईं। उन जानकारियों के आधार पर जांच आगे बढ़ी तो पता चला कि आरोपी अजहर ने कुछ लोगों संग मिलकर एक फर्म बनाई थी। रेलवे स्क्रैप का ठेका दिलाने के नाम पर रकम का लेनदेन इसी खाते से होता था। 
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अजहर पहले फर्म के खाते में रकम लेता था। इसके बाद नकद निकालकर धोखाधड़ी में शामिल अन्य लोगों तक पहुंचाता था। पुलिस इस बात की भी जांच में जुटी है कि फर्म के पार्टनर में अजहर के अलावा अन्य कौन लोग शामिल थे। नाम-पते की जानकारी के बाद उनसे भी पूछताछ की जाएगी। 

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डॉक्टर के नाम पर ही लेता था रकम
सूत्रों का कहना है कि ठगी के इस खेल का मुख्य किरदार अजहर रेलवे डॉक्टर के नाम पर ही रकम लेता था। दरअसल वह हर कारोबारी को डॉक्टर से मिलवाता था। डॉक्टर से मिलने के बाद ही कारोबारी रकम देने को तैयार हो जाते थे। ऐसे में अब यह पता लगाया जा रहा है कि इस पूरे खेल में डॉक्टर की भूमिका क्या थी। उधर, उस चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के खाते की जानकारी भी जुटाई जाएगी, जिसका नाम आरोपी अजहर ने बताया है। जार्जटाउन थानाध्यक्ष धीरेंद्र सिंह ने बताया कि सभी बिंदुओं को ध्यान में रखकर जांच पड़ताल की जा रही है। 

एक बड़ा सवाल यह भी 
इस मामले में एक बड़ा सवाल यह भी है कि बिना जांचे परखे आखिर कैसे कारोबारी करोड़ों की रकम अजहर को दे देते थे। दरअसल जिन भी व्यापारियों ने रकम देने की बात पुलिस को बताई है, उन्होंने लाखों की रकम हड़पने का आरोप लगाया है। कानपुर के तीन कारोबारियों ने 17 करोड़ रुपये देने की बात बताई है। इसी तरह मऊआइमा के एक व्यापारी ने बताया है कि उसने अजहर को 80 लाख रुपये दिए। मुकदमा दर्ज कराने वाले रजत केशरवानी ने भी 1.95 करोड़ रुपये देने की बात तहरीर में बताई है।

यह है मामला
बुलेट एजेंसी संचालक रजत ने 1.95 करोड़ की ठगी का आरोप लगाते हुए केस दर्ज कराया था। जिसमें अजहर अनीस उस्मानी को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। आरोप है कि रेलवे स्क्रैप का ठेका दिलाने का झांसा देकर आरोपी ने रेलवे बोर्ड डायरेक्टर का फर्जी दस्तखत व मुहर लगाकर जाली आदेश तैयार किया और उनसे रकम ले ली। बाद में ठेका न मिलने पर रुपये वापस मांगने पर जान से मारने की धमकी दी। 

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