{"_id":"6121458d8ebc3e799f4ad3e7","slug":"tragic-corona-broke-snatched-brother-sister-love","type":"story","status":"publish","title_hn":"दुखद : कोरोना ने तोड़ा नेह का बंधन, छीना भाई-बहन का प्यार, महामारी से किसी के भाई तो किसी की बहन हमेशा के लिए हुई जुदा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दुखद : कोरोना ने तोड़ा नेह का बंधन, छीना भाई-बहन का प्यार, महामारी से किसी के भाई तो किसी की बहन हमेशा के लिए हुई जुदा
Sun, 22 Aug 2021 09:01 AM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Sun, 22 Aug 2021 09:01 AM IST
सार
मेजा के परानीपुर निवासी वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला की इकलौती बहन रीता मिश्रा कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में उनसे हमेशा के लिए जुदा हो गईं। पश्चिम बंगाल के हासीमारा में एयरफोर्स में तैनात वीरेंद्र की कलाई इस रक्षाबंधन में सूनी रह जाएगी।
विज्ञापन
tears
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
कोरोना संक्रमण की वजह से इस बार कई भाइयों की कलाई सूनी रह जाएगी। भाइयों को खोने वाली बहनों की आंखों में आंसुओं का सैलाब उमड़ रहा है। तो भाई भी जुदा होने वाली बहनों की यादों में खोए हुए हैं। ऐसे में इस बार रक्षाबंधन पर कई भाइयों की कलाई पर बहन का प्यार नहीं सजेगा। रक्षाबंधन की पूर्व संध्या पर ऐसे भाई-बहन अपनी पीड़ा बयां कर फफक पड़े।
मेजा के परानीपुर निवासी वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला की इकलौती बहन रीता मिश्रा कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में उनसे हमेशा के लिए जुदा हो गईं। पश्चिम बंगाल के हासीमारा में एयरफोर्स में तैनात वीरेंद्र की कलाई इस रक्षाबंधन में सूनी रह जाएगी। इस घटना को साझा करते हुए शनिवार को उनका गला रुंध गया। वीरेंद्र के मुताबिक बीते अप्रैल महीने में रीता अपनी पुत्री के पास दिल्ली गई थीं। वहीं वह संक्रमित हो गईं।
उग्रसेनपुर स्थित घर आने पर उनकी सांस फूलने लगी। परिवार के लोग अस्पताल ले गए, लेकिन आक्सीजन लेबल घटने लगा और 48 घंटे के अंदर ही उनकी मौत हो गई। अब उनके साथ सिर्फ बहन की यादें शेष हैं। वह बताते हैं कि हर वर्ष रक्षाबंधन से पहले ही स्पीड पोस्ट से बहन की राखी और मिठाई उन्हें मिल जाती थी। वह भी बहन को मन पसंद उपहार भेजते थे। लेकिन, अब बहन का प्यार और हंसी-ठिठोली अब गुजरे दिनों की बात हो कर रह गई है। इन्होंने अपने छोटे भाई धीरेंद्र प्रसाद शुक्ला को भी खो दिया है। इस घर में रक्षाबंधन से पहले कभी न भुलाने वाला दर्द छा गया है।
विज्ञापन
इसी तरह चौक के आशीष लखनऊ में केंट प्यूरीफायर कंपनी में सेल्स मैनेजर थे। रक्षाबंधन पर उनकी बहन हमेशा उनके लिए राखी भेजती थीं। इस बार कोरोना संक्रमण ने उनके भाई को छीन लिया। भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक पहला पर्व है, जब उनका भाई इस दुनिया में नहीं है। वह पुराने शहर के एक स्कूल में शिक्षिका हैं। हर साल रक्षाबंधन का उन्हें इंतजार रहता था, लेकिन उनके लिए भाई की लो कलाई ही नहीं है, जिसे वह अपने नेह के धागे से सजा पाएंगी।
इसी तरह ध्रुव की इकलौती बहन अंजू त्रिपाठी को भी कोरोना के क्रूर पंजों ने हमेशा के लिए छीन लिया। प्रतापगढ़ स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय में तैनात रहे पति शैलेंद्र कुमार त्रिपाठी की कोविड संक्रमण से हुई मौत का सदमा वह बर्दाश्त नहीं कर सकी थीं। ध्रुव बताते हैं कि रक्षाबंधन से पहले ही तैयारी शुरू हो जाती थी। दीदी का फोन आने लगता था। कभी वो घर आ जाती थी, तो कभी बुला लेती थीं। इस बार वह नहीं हैं। ध्रुव और उनके परिवार के सदस्य अब एलबम के पन्ने पलट कर उनकी तस्वीरों को रात-रात भर निहार रहे हैं।
विज्ञापन
मेजा के परानीपुर निवासी वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला की इकलौती बहन रीता मिश्रा कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर में उनसे हमेशा के लिए जुदा हो गईं। पश्चिम बंगाल के हासीमारा में एयरफोर्स में तैनात वीरेंद्र की कलाई इस रक्षाबंधन में सूनी रह जाएगी। इस घटना को साझा करते हुए शनिवार को उनका गला रुंध गया। वीरेंद्र के मुताबिक बीते अप्रैल महीने में रीता अपनी पुत्री के पास दिल्ली गई थीं। वहीं वह संक्रमित हो गईं।
विज्ञापन
उग्रसेनपुर स्थित घर आने पर उनकी सांस फूलने लगी। परिवार के लोग अस्पताल ले गए, लेकिन आक्सीजन लेबल घटने लगा और 48 घंटे के अंदर ही उनकी मौत हो गई। अब उनके साथ सिर्फ बहन की यादें शेष हैं। वह बताते हैं कि हर वर्ष रक्षाबंधन से पहले ही स्पीड पोस्ट से बहन की राखी और मिठाई उन्हें मिल जाती थी। वह भी बहन को मन पसंद उपहार भेजते थे। लेकिन, अब बहन का प्यार और हंसी-ठिठोली अब गुजरे दिनों की बात हो कर रह गई है। इन्होंने अपने छोटे भाई धीरेंद्र प्रसाद शुक्ला को भी खो दिया है। इस घर में रक्षाबंधन से पहले कभी न भुलाने वाला दर्द छा गया है।
विज्ञापन
इसी तरह चौक के आशीष लखनऊ में केंट प्यूरीफायर कंपनी में सेल्स मैनेजर थे। रक्षाबंधन पर उनकी बहन हमेशा उनके लिए राखी भेजती थीं। इस बार कोरोना संक्रमण ने उनके भाई को छीन लिया। भाई-बहन के प्रेम का प्रतीक पहला पर्व है, जब उनका भाई इस दुनिया में नहीं है। वह पुराने शहर के एक स्कूल में शिक्षिका हैं। हर साल रक्षाबंधन का उन्हें इंतजार रहता था, लेकिन उनके लिए भाई की लो कलाई ही नहीं है, जिसे वह अपने नेह के धागे से सजा पाएंगी।
इसी तरह ध्रुव की इकलौती बहन अंजू त्रिपाठी को भी कोरोना के क्रूर पंजों ने हमेशा के लिए छीन लिया। प्रतापगढ़ स्थित जवाहर नवोदय विद्यालय में तैनात रहे पति शैलेंद्र कुमार त्रिपाठी की कोविड संक्रमण से हुई मौत का सदमा वह बर्दाश्त नहीं कर सकी थीं। ध्रुव बताते हैं कि रक्षाबंधन से पहले ही तैयारी शुरू हो जाती थी। दीदी का फोन आने लगता था। कभी वो घर आ जाती थी, तो कभी बुला लेती थीं। इस बार वह नहीं हैं। ध्रुव और उनके परिवार के सदस्य अब एलबम के पन्ने पलट कर उनकी तस्वीरों को रात-रात भर निहार रहे हैं।