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पासवर्ड को जीएसटीएन समझ रहे व्यापारी
विजय सक्सेना, अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Fri, 30 Dec 2016 02:05 AM IST
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गुड्स एंड सर्विस टैक्स लागू होने में अभी पूरे तीन माह बाकी हैं लेकिन व्यापारियों के सामने इसके पहले ही बड़ी मुसीबत खड़ी हो गई है। जीएसटी में रजिस्ट्रेशन के लिए वाणिज्य कर विभाग व्यापारियों को पासवर्ड उपलब्ध करा रहा है लेकिन अभी करीब 60 फीसदी व्यापारियों को यह मिला ही नहीं। दूसरे, जिन्हें मिला उनमें से ज्यादातर व्यापारी पासवर्ड को ही जीएसटीएन मानकर अपने पास सुरक्षित रख ले रहे हैं। उन्हें यह तक नहीं पता कि इस पासवर्ड के जरिए ही जीएसटी में रजिस्ट्रेशन होना है और उसके बाद जीएसटीएन आवंटित होगा। जीएसटी में रजिस्ट्रेशन 31 दिसंबर तक होना है लेकिन जानकारी के अभाव में ज्यादातर व्यापारी अब तक रजिस्ट्रेशन नहीं करा सके हैं।
वाणिज्य कर विभाग इलाहाबाद में 26000 से ज्यादा व्यापारी रजिस्टर्ड हैं। इन सबको जीएसटी में ट्रांसफर किया जाना है। जीएसटी में रजिस्ट्रेशन के लिए विभाग हर व्यापारी को प्रोविजनल पासवर्ड जारी कर रहा है। यह पासवर्ड उनके मोबाइल पर मैसेज के जरिए भेजे जा रहे हैं। मुख्यालय ने पासवर्ड के जरिए जीएसटी में रजिस्ट्रेशन की समय सीमा 16 से 31 दिसंबर निर्धारित की। पासवर्ड के आधार पर व्यापारियों को स्वयं ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन भी करना है। समय बेहद कम होने के कारण विभाग में आनन-फानन में व्यापारियों को पासवर्ड भेजना शुरू किया। अब अंतिम समय खत्म होने में दो दिन शेष हैं और करीब 60 फीसदी व्यापारियों को पासवर्ड अब तक नहीं मिले हैं।
विभाग की ओर से इसके लिए प्रचार-प्रसार न होने का नतीजा यह कि करीब 35 फीसदी व्यापारियों ने पासवर्ड को ही जीएसटीएन मान लिया। ऐसा होने के कारण विभाग के सामने नई समस्या खड़ी हो गई। ऐसे में व्यापारियों को जानकारी देने के लिए विभाग को शिविर लगाने पड़ रहे हैं। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार कल्याण समिति के संयोजक संतोष पनामा का कहना है कि वैट लागू होने पर जिस तरह व्यापारियों को समस्या झेलनी पड़ी थी, वैसी ही समस्या जीएसटी में होने वाली है। पासवर्ड के संबंध में विभाग को करीब माहभर पहले से प्रचार-प्रसार करना चाहिए, जो नहीं हुआ। अभी काफी व्यापारियों के पास मैसेज तक नहीं पहुंचे। 31 दिसंबर तक पासवर्ड वितरित होते रहे तो व्यापारी कब रजिस्ट्रेशन कराएंगे। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के लिए 37 पेज का फॉर्म भरना है। विभाग का सरवर धीमा चलता है। दूसरे रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया के पहले कई नए साफ्टवेयर भी अपलोड करने पड़ रहे हैं।
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वाणिज्य कर मुख्यालय के फरमान के बाद स्थानीय स्तर पर व्यापारियों के पैन अपडेशन का काम करीब आठ माह से चल रहा है लेकिन काफी व्यापारियों के पैन अब तक अपडेट नहीं हो सके हैं। काफी व्यापारियों को यह भी नहीं पता कि उनका पैन अपडेट है या नहीं। ऐसे में उन व्यापारियों का जीएसटी में रजिस्ट्रेशन कैसे होगा, बड़ा सवाल है। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के लिए व्यापारियों को डिजिटल सिग्नेचर करने हैं। इसके लिए जो कंपनी अधिकृत है, वह डिजिटल सिग्नेचर देने में एक-एक सप्ताह का समय लगा दे रही है।
प्रदेश में रजिस्टर्ड व्यापारियों की संख्या करीब सात लाख है लेकिन 27 दिसंबर तक जीएसटी में रजिस्ट्रेशन मात्र 865 व्यापारियों ने कराया है। वाणिज्य कर कमिश्नर मुकेश कुमार मेश्राम ने बुधवार को सभी जोनल एडिशनल कमिश्नरों को पत्र जारी कर इस पर नाराजगी जताई है और कुल व्यापरियों में से .01 फीसदी रजिस्ट्रेशन के लिए सीधे तौर पर अफसरों को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने रजिस्ट्रेशन का काम तय तिथि तक युद्ध स्तर पर कराने का आदेश दिया है।
‘जीएसटी में रजिस्ट्रेशन के लिए 31 दिसंबर तक की तिथि केंद्र सरकार ने तय की है। इसमें प्रदेश सरकार या मुख्यालय का कोई हस्तक्षेप नहीं है। जो व्यापारी इस अवधि में रजिस्ट्रेशन नहीं करा पाएंगे, उन पर फैसला केंद्र को ही लेना है।’ एलआर गुप्ता, एडिशनल कमिश्नर ग्रेड-टू वाणिज्य कर विभाग
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वाणिज्य कर विभाग इलाहाबाद में 26000 से ज्यादा व्यापारी रजिस्टर्ड हैं। इन सबको जीएसटी में ट्रांसफर किया जाना है। जीएसटी में रजिस्ट्रेशन के लिए विभाग हर व्यापारी को प्रोविजनल पासवर्ड जारी कर रहा है। यह पासवर्ड उनके मोबाइल पर मैसेज के जरिए भेजे जा रहे हैं। मुख्यालय ने पासवर्ड के जरिए जीएसटी में रजिस्ट्रेशन की समय सीमा 16 से 31 दिसंबर निर्धारित की। पासवर्ड के आधार पर व्यापारियों को स्वयं ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन भी करना है। समय बेहद कम होने के कारण विभाग में आनन-फानन में व्यापारियों को पासवर्ड भेजना शुरू किया। अब अंतिम समय खत्म होने में दो दिन शेष हैं और करीब 60 फीसदी व्यापारियों को पासवर्ड अब तक नहीं मिले हैं।
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विभाग की ओर से इसके लिए प्रचार-प्रसार न होने का नतीजा यह कि करीब 35 फीसदी व्यापारियों ने पासवर्ड को ही जीएसटीएन मान लिया। ऐसा होने के कारण विभाग के सामने नई समस्या खड़ी हो गई। ऐसे में व्यापारियों को जानकारी देने के लिए विभाग को शिविर लगाने पड़ रहे हैं। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार कल्याण समिति के संयोजक संतोष पनामा का कहना है कि वैट लागू होने पर जिस तरह व्यापारियों को समस्या झेलनी पड़ी थी, वैसी ही समस्या जीएसटी में होने वाली है। पासवर्ड के संबंध में विभाग को करीब माहभर पहले से प्रचार-प्रसार करना चाहिए, जो नहीं हुआ। अभी काफी व्यापारियों के पास मैसेज तक नहीं पहुंचे। 31 दिसंबर तक पासवर्ड वितरित होते रहे तो व्यापारी कब रजिस्ट्रेशन कराएंगे। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के लिए 37 पेज का फॉर्म भरना है। विभाग का सरवर धीमा चलता है। दूसरे रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया के पहले कई नए साफ्टवेयर भी अपलोड करने पड़ रहे हैं।
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वाणिज्य कर मुख्यालय के फरमान के बाद स्थानीय स्तर पर व्यापारियों के पैन अपडेशन का काम करीब आठ माह से चल रहा है लेकिन काफी व्यापारियों के पैन अब तक अपडेट नहीं हो सके हैं। काफी व्यापारियों को यह भी नहीं पता कि उनका पैन अपडेट है या नहीं। ऐसे में उन व्यापारियों का जीएसटी में रजिस्ट्रेशन कैसे होगा, बड़ा सवाल है। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन के लिए व्यापारियों को डिजिटल सिग्नेचर करने हैं। इसके लिए जो कंपनी अधिकृत है, वह डिजिटल सिग्नेचर देने में एक-एक सप्ताह का समय लगा दे रही है।
प्रदेश में रजिस्टर्ड व्यापारियों की संख्या करीब सात लाख है लेकिन 27 दिसंबर तक जीएसटी में रजिस्ट्रेशन मात्र 865 व्यापारियों ने कराया है। वाणिज्य कर कमिश्नर मुकेश कुमार मेश्राम ने बुधवार को सभी जोनल एडिशनल कमिश्नरों को पत्र जारी कर इस पर नाराजगी जताई है और कुल व्यापरियों में से .01 फीसदी रजिस्ट्रेशन के लिए सीधे तौर पर अफसरों को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने रजिस्ट्रेशन का काम तय तिथि तक युद्ध स्तर पर कराने का आदेश दिया है।
‘जीएसटी में रजिस्ट्रेशन के लिए 31 दिसंबर तक की तिथि केंद्र सरकार ने तय की है। इसमें प्रदेश सरकार या मुख्यालय का कोई हस्तक्षेप नहीं है। जो व्यापारी इस अवधि में रजिस्ट्रेशन नहीं करा पाएंगे, उन पर फैसला केंद्र को ही लेना है।’ एलआर गुप्ता, एडिशनल कमिश्नर ग्रेड-टू वाणिज्य कर विभाग