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पीड़िताओं से मुलाकात करने वालों पर हाईकोर्ट सख्त

Wed, 22 Aug 2018 01:43 AM IST
अमर उजाला, इलाहाबाद
अमर उजाला, इलाहाबाद Updated Wed, 22 Aug 2018 01:43 AM IST
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To meet the victims High Court strict on those
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हाईकोर्ट ने देवरिया शेल्टर होम की चार पीड़िताओं से रोक के बावजूद मुलाकात करने पर गहरी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने उन तीन लोगों (स्टेट चाइल्ड कमीशन की दो सदस्यों और एक वकील) को नोटिस जारी कर पूछा है कि अदालत के आदेश  की अवहेलना पर क्यों न उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही की जाए। कोर्ट ने 27 अगस्त को सभी को स्पष्टीकरण के साथ तलब किया है। इस मामले में अदालत ने डीएम और जिला प्रोबेशन अधिकारी इलाहाबाद से भी स्पष्टीकरण मांगा है तथा एसएसपी इलाहाबाद को चेतावनी दी है कि भविष्य में पीड़िताओं की सुरक्षा में कोई लापरवाही न होने पाए।
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मामले पर स्वत: संज्ञान लेकर सुनवाई कर रही मुख्य न्यायमूर्ति डीबी भोसले और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की पीठ ने उस शेल्टर  होम की सुरक्षा बढ़ाने का निर्देश दिया है जहां पीड़िताओें को रखा गया है। कोर्ट ने पीड़ित लड़कियों की बाल मनोरोग विशेषज्ञ से जांच कराकर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। कोर्ट के आदेश पर पीड़िताओं को गोपनीय स्थान पर रखा गया है। अदालत ने उन लड़कियों से किसी को भी न मिलने देने का आदेश दे रखा है।
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इससे पूर्व के आदेश में इस मामले में पूरी गोपनीयता बरतने का निर्देश था ताकि पीड़ित लड़कियों को कोई डरा धमका न सके। इसके बावजूद स्टेट चाइल्ड प्रोटेक्शन कमीशन की दो सदस्यों लूकरगंज की शोभा दरबारी, चकनिरातुल की नीता साहू और वकील जार्जटाउन निवासी नरेंद्र साहू ने पीड़िताओं से मुलाकात की। कोर्ट ने इन तीनोें को स्पष्टीकरण के साथ 27 अगस्त को तलब किया है। पीठ का कहना था कि चारों लड़कियां अदालत की अभिरक्षा में हैं। कोर्ट की अनुमति के बिना इनको किसी से भी मिलने या साक्षात्कार लेने की अनुमति नहीं है। एसएसपी ने बताया कि इन लोगों ने लखनऊ से आदेश होने की बात कहकर पीड़िताओं से मुलाकात की। हालांकि सरकारी वकील ने बताया कि लखनऊ से ऐसा कोई विशेष आदेश नहीं था।
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मनोविज्ञानियों से पीड़िताओं की रिपोर्ट तलब
इलाहाबाद। हाईकोर्ट ने बाल मनोविज्ञानी और पुनर्वास मनोवैज्ञानिक को निर्देश दिया है कि वह पीड़िताओं से मुलाकात उनकी स्थिति की रिपोर्ट सील बंद लिफाफे में अदालत में दाखिल करे। कोर्ट ने मामले की सुनवाई अपने चैंबर में की।

सीबीआई-एसआईटी को भी इजाजत नहीं
हाईकोर्ट ने कहा है कि इस मामले की जांच कर रही एजेंसियों एसआईटी या सीबीआई के सदस्य भी इस अदालत की अनुमति ओैर महानिबंधक को सूचित किए बिना पीड़ित लड़कियों का बयान दर्ज नहीं करेंगे।
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