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शहर के आसमान पर उमड़े टिड्डी दलों को भगाने के लिए फिर बजी थाली-ताली
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tiddi dal attack in prayagaj
- फोटो : CITY DESK
प्रयागराज। जिले में शुक्रवार को टिड्डियों के पांच दल ने एक साथ हमला बोल दिया। तीन करोड़ से अधिक की संख्या में आए टिड्डी गांव से लेकर शहर तक के आसमान पर दिनभर मंडराते रहे। टिड्डी दल को देख शहरियों में कौतुक तो रहा, लेकिन वह सहमे भी रहे। टिड्डियों को देखने के लिए लोग छतों-बार्जों पर लटके रहे और जमकर ताली-थाली व शंख बजाए। कई मोहल्लों में पटाखे पटाखे भी फोड़े गए। आजाद पार्क, कलक्ट्रेट, नया कटरा समेत कई स्थानों पर टिड्डी पेड़ों पर भी उतरे। हालांकि, कुछ देर बाद ही टिड्डी उड़ गए।
टिड्डियों का एक दल बृहस्पतिवार को ही शंकरगढ़ क्षेत्र में रुक गया था। शुक्रवार को चार अन्य दल भी आए गए। उप निदेशक कृषि विनोद कुमार ने बताया कि एक दल चित्रकूट से सीधे शंकरगढ़ में प्रवेश किया तो एक अन्य कौशाम्बी होते हुए आया। दो अन्य दल रीवा से आए। इसका नतीजा रहा कि कोरांव और मेजा को छोड़कर पूरे जिले पर टिड्डियों के दल दिन भर छाए रहे। नैनी, मुट्ठीगंज, चौक, सिविल लाइंस, नया कटरा, मम्फोर्डगंज, तेलियरगंज, फाफामऊ आदि क्षेत्रों में एक साथ लाखों की संख्या में टिड्डियों को देखकर लोग छतों, बारजे पर चले आए। उन्हें जमीन पर उतरने से रोकने के लिए लगातार थाली, पटाखे बजाते रहे। हालांकि, कई बच्चे भय की वजह से घर के भीतर ही रहे। इस दृश्य को कैद करने के लिए ज्यादातर के मोबाइल आसमान की तरफ उठे रहे। उन्होंने फोटो लेने के साथ वीडियो भी बनाई। नया कटरा की अंजली, शेखर सरन, सिविल लाइंस के अजय माथुर आदि का कहना था कि टिड्डियों से इस तरह से हमला उन्होंने पहली बार देखा। मंजू सिन्हा, रीना समेत कई शहरियों ने तो व्हाट्सअप के स्टेटस में भी इसे लगा लिया।
ग्रामीण इलाके में टिड्डियों की साया, सब्जियों को भारी नुकसान
प्रयागराज। जिले में टिड्डियों का कई दिनों से खतरा बना हुआ है लेकिन शुक्रवार का दिन किसानों पर काफी भारी गुजरा। एक साथ पांच दलों के हमले से गंगापार में सब्जियों, उरद, मूंग के अलावा हरे चारे को काफी नुकसान की बात कही जा रही है।
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शंकरगढ़, जसरा, करछना, चाका, बहादुरपुर, होलागढ़, हंडिया, सोरांव, मंसूराबाद समेत तकरीबन पूरे जिले में टिड्डियों के दल मंडराते रहे। टिड्डी आमतौर पर दिन में उड़ान भरते रहते हैं लेकिन दिन में बारिश की वजह से उनके पंख भारी हो गए। इसकी वजह किसानों के लगातार ढोल, थाली आदि बजाने के बावजूद टिड्डी जमीन पर उतर गए। इसकी वजह से सोरांव, बहरिया, बहादुरपुर, होलागढ़, कौड़िहार आदि क्षेत्रों में सब्जियों, उरद, मूंग, ढइंचा, चरी आदि को भारी नुकसान की बात कही जा रही है। हालांकि किसानों के लिए राहत की बात यह जरूर रही कि देर शाम तक सभी दल जिले से बाहर निकल गए थे। अन्यथा, पूरी फसल ही साफ होने का खतरा होता। उप निदेशक ने बताया कि टिड्डियों का दल प्रतापगढ़, जौनपुर, सुलतानपुर, भदोही में प्रवेश कर गया। इससे फिलहाल यहां के किसानों पर से खतरा टल गया है।
नुकसान का कराया जाएगा सर्वे
टिड्डियों के आक्रमण से नुकसान का जिला प्रशासन की ओर से सर्वे कराया जाएगा। उप निदेशक कृषि ने बताया कि टिड्डियों की वजह से कई फसलों को नुकसान की आशंका है, जिसका सर्वे कराया जाएगा। विभाग के इस निर्णय से किसानों को आर्थिक मदद मिलने की उम्मीद जगी है।
अपर मुख्य सचिव लगातार लेते रहे जानकारी
इस तरह से टिड्डियों के हमले से शासन के अफसरों की भी नजर प्रयागराज पर रही। मध्य प्रदेश से सटे होने की वजह से प्रयागराज टिड्डियों के लिए पूर्वांचल के जिलों में प्रवेश बिंदु बन गया है। इससे अफसरों की चिंता और बढ़ गई है। अर मुख्य सचिव देवेश चतुर्वेदी फोन पर लगातार जानकारी लेते रहे। वह उपनिदेशक कृषि को लगातार निर्देश भी देते रहे।
फिलहाल एक-दो दिन राहत की उम्मीद
टिड्डियों से फिलहाल एक-दो दिन तक राहत की उम्मीद जताई जा रही है। टिड्डियों से परेशान राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश कई जिलों के अफसर व्हाट्सअप ग्रुप से जुड़े हुए हैं। उप निदेशक कृषि ने बताया कि उनसे प्राप्त जानकारी के अनुसार मध्य प्रदेश और राजस्थान के सीमावर्ती जिलों में फिलहाल टिड्डियों का कोई दल सक्रिय नहीं है। ऐसे में यदि प्रतापगढ़, जौनपुर, भदोही में निकल गया टिड्डियों का दल वापस नहीं आया तो फिलहाल राहत मिलने की बात कही जा रही है। हालांकि , उनका यह भी कहना है कि टिड्डियों का 15 जुलाई तक खतरा बना हुआ है।
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ड्रोन से केमिकल के छिड़काव की मांग
0 टिड्डियों पर ड्रोन की मदद से रसायनों के छिड़काव की मांग उठने लगी है। बारिश हो जाने से वाहन सड़क पर ही रह जा रहे हैं। इसके अलावा रात के अंधेरे में छिड़काव टीम में शामिल कर्मचारियों के लिए भी खेत में प्रवेश कर पाना आसान नहीं रह गया है। ऐसे में ड्रोन की मांग उठने लगी है। हालांकि, यह काफी खर्चीला बताया जा रहा है।
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58 वर्ष के बाद हुआ टिड्डियों का हमला
0 आगरा, मेरठ आदि जिलों में आता रहे हैं टिड्ड्यिों के दल लेकिन प्रयागराज में 1962 बाद दिखा ऐसा खौफनाक नजारा
प्रयागराज। प्रयागराज में टिड्डियों का इस तरह से 58 वर्ष के बाद आक्रमण हुआ है। जानकारों के अनुसार यहां 1962 के बाद टिड्डियों के दल ने हमला बोला है। हालांकि उस समय कितना नुकसान हुआ था इसकी जानकारी कृषि विभाग के अफसरों को भी नहीं है।
सीरिया, ईरान से चलकर टिड्डियों का दल अफगानिस्तान, पाकिस्तान होते अक्सर भारत में प्रवेश कर जाता है लेकिन आगे बढ़ने से पहले ही उन्हें नष्ट कर दिया जाता रहा। अफसरों के अनुसार राजस्थान से सटे आगरा तथा अन्य जिलों में भी इनका विगत वर्षों में हमला हुआ लेकिन मध्य प्रदेश के रास्ते प्रयागराज में प्रवेश से पहले ही उन्हें नष्ट कर दिया गया। इसके विपरीत इस बार टिड्डियों के पश्चिम बंगाल तक पहुंच जाने की बात कही जा रही है। अफसरों के अनुसार ईरान तथा अफगानिस्तान में अधिक बारिश से बनी नमी की वजह से इन्हें प्रजनन का अनुकुल का माहौल मिला। इसके विपरीत कोरोना संकट की वजह से इन्हें नष्ट करने को लेकर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पाई। इसका नतीजा है कि सैकड़ों दल भारत की सीमा में प्रवेश कर गए हैं। उन्होंने नष्ट करने के लिए स्थानीय स्तर के अलावा केंद्रीय टीम भी बनाई गई है लेकिन अभी तक इसमें अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई है और 58 वर्ष के बाद प्रयागराज में 15 दिन के भीतर बृहस्पतिवार को टिड्डियों का दूसरी बाद हमला हुआ। उप निदेशक कृषि ने बताया कि सरकारी दस्तावेजों में इससे पहले 1962 में टिड्डी दल के यहां आने का जिक्र मिलता है। हालांकि इसका बहुत विवरण उपलब्ध नहीं है।
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टिड्डियों का एक दल बृहस्पतिवार को ही शंकरगढ़ क्षेत्र में रुक गया था। शुक्रवार को चार अन्य दल भी आए गए। उप निदेशक कृषि विनोद कुमार ने बताया कि एक दल चित्रकूट से सीधे शंकरगढ़ में प्रवेश किया तो एक अन्य कौशाम्बी होते हुए आया। दो अन्य दल रीवा से आए। इसका नतीजा रहा कि कोरांव और मेजा को छोड़कर पूरे जिले पर टिड्डियों के दल दिन भर छाए रहे। नैनी, मुट्ठीगंज, चौक, सिविल लाइंस, नया कटरा, मम्फोर्डगंज, तेलियरगंज, फाफामऊ आदि क्षेत्रों में एक साथ लाखों की संख्या में टिड्डियों को देखकर लोग छतों, बारजे पर चले आए। उन्हें जमीन पर उतरने से रोकने के लिए लगातार थाली, पटाखे बजाते रहे। हालांकि, कई बच्चे भय की वजह से घर के भीतर ही रहे। इस दृश्य को कैद करने के लिए ज्यादातर के मोबाइल आसमान की तरफ उठे रहे। उन्होंने फोटो लेने के साथ वीडियो भी बनाई। नया कटरा की अंजली, शेखर सरन, सिविल लाइंस के अजय माथुर आदि का कहना था कि टिड्डियों से इस तरह से हमला उन्होंने पहली बार देखा। मंजू सिन्हा, रीना समेत कई शहरियों ने तो व्हाट्सअप के स्टेटस में भी इसे लगा लिया।
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ग्रामीण इलाके में टिड्डियों की साया, सब्जियों को भारी नुकसान
प्रयागराज। जिले में टिड्डियों का कई दिनों से खतरा बना हुआ है लेकिन शुक्रवार का दिन किसानों पर काफी भारी गुजरा। एक साथ पांच दलों के हमले से गंगापार में सब्जियों, उरद, मूंग के अलावा हरे चारे को काफी नुकसान की बात कही जा रही है।
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शंकरगढ़, जसरा, करछना, चाका, बहादुरपुर, होलागढ़, हंडिया, सोरांव, मंसूराबाद समेत तकरीबन पूरे जिले में टिड्डियों के दल मंडराते रहे। टिड्डी आमतौर पर दिन में उड़ान भरते रहते हैं लेकिन दिन में बारिश की वजह से उनके पंख भारी हो गए। इसकी वजह किसानों के लगातार ढोल, थाली आदि बजाने के बावजूद टिड्डी जमीन पर उतर गए। इसकी वजह से सोरांव, बहरिया, बहादुरपुर, होलागढ़, कौड़िहार आदि क्षेत्रों में सब्जियों, उरद, मूंग, ढइंचा, चरी आदि को भारी नुकसान की बात कही जा रही है। हालांकि किसानों के लिए राहत की बात यह जरूर रही कि देर शाम तक सभी दल जिले से बाहर निकल गए थे। अन्यथा, पूरी फसल ही साफ होने का खतरा होता। उप निदेशक ने बताया कि टिड्डियों का दल प्रतापगढ़, जौनपुर, सुलतानपुर, भदोही में प्रवेश कर गया। इससे फिलहाल यहां के किसानों पर से खतरा टल गया है।
नुकसान का कराया जाएगा सर्वे
टिड्डियों के आक्रमण से नुकसान का जिला प्रशासन की ओर से सर्वे कराया जाएगा। उप निदेशक कृषि ने बताया कि टिड्डियों की वजह से कई फसलों को नुकसान की आशंका है, जिसका सर्वे कराया जाएगा। विभाग के इस निर्णय से किसानों को आर्थिक मदद मिलने की उम्मीद जगी है।
अपर मुख्य सचिव लगातार लेते रहे जानकारी
इस तरह से टिड्डियों के हमले से शासन के अफसरों की भी नजर प्रयागराज पर रही। मध्य प्रदेश से सटे होने की वजह से प्रयागराज टिड्डियों के लिए पूर्वांचल के जिलों में प्रवेश बिंदु बन गया है। इससे अफसरों की चिंता और बढ़ गई है। अर मुख्य सचिव देवेश चतुर्वेदी फोन पर लगातार जानकारी लेते रहे। वह उपनिदेशक कृषि को लगातार निर्देश भी देते रहे।
फिलहाल एक-दो दिन राहत की उम्मीद
टिड्डियों से फिलहाल एक-दो दिन तक राहत की उम्मीद जताई जा रही है। टिड्डियों से परेशान राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश कई जिलों के अफसर व्हाट्सअप ग्रुप से जुड़े हुए हैं। उप निदेशक कृषि ने बताया कि उनसे प्राप्त जानकारी के अनुसार मध्य प्रदेश और राजस्थान के सीमावर्ती जिलों में फिलहाल टिड्डियों का कोई दल सक्रिय नहीं है। ऐसे में यदि प्रतापगढ़, जौनपुर, भदोही में निकल गया टिड्डियों का दल वापस नहीं आया तो फिलहाल राहत मिलने की बात कही जा रही है। हालांकि , उनका यह भी कहना है कि टिड्डियों का 15 जुलाई तक खतरा बना हुआ है।
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ड्रोन से केमिकल के छिड़काव की मांग
0 टिड्डियों पर ड्रोन की मदद से रसायनों के छिड़काव की मांग उठने लगी है। बारिश हो जाने से वाहन सड़क पर ही रह जा रहे हैं। इसके अलावा रात के अंधेरे में छिड़काव टीम में शामिल कर्मचारियों के लिए भी खेत में प्रवेश कर पाना आसान नहीं रह गया है। ऐसे में ड्रोन की मांग उठने लगी है। हालांकि, यह काफी खर्चीला बताया जा रहा है।
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58 वर्ष के बाद हुआ टिड्डियों का हमला
0 आगरा, मेरठ आदि जिलों में आता रहे हैं टिड्ड्यिों के दल लेकिन प्रयागराज में 1962 बाद दिखा ऐसा खौफनाक नजारा
प्रयागराज। प्रयागराज में टिड्डियों का इस तरह से 58 वर्ष के बाद आक्रमण हुआ है। जानकारों के अनुसार यहां 1962 के बाद टिड्डियों के दल ने हमला बोला है। हालांकि उस समय कितना नुकसान हुआ था इसकी जानकारी कृषि विभाग के अफसरों को भी नहीं है।
सीरिया, ईरान से चलकर टिड्डियों का दल अफगानिस्तान, पाकिस्तान होते अक्सर भारत में प्रवेश कर जाता है लेकिन आगे बढ़ने से पहले ही उन्हें नष्ट कर दिया जाता रहा। अफसरों के अनुसार राजस्थान से सटे आगरा तथा अन्य जिलों में भी इनका विगत वर्षों में हमला हुआ लेकिन मध्य प्रदेश के रास्ते प्रयागराज में प्रवेश से पहले ही उन्हें नष्ट कर दिया गया। इसके विपरीत इस बार टिड्डियों के पश्चिम बंगाल तक पहुंच जाने की बात कही जा रही है। अफसरों के अनुसार ईरान तथा अफगानिस्तान में अधिक बारिश से बनी नमी की वजह से इन्हें प्रजनन का अनुकुल का माहौल मिला। इसके विपरीत कोरोना संकट की वजह से इन्हें नष्ट करने को लेकर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पाई। इसका नतीजा है कि सैकड़ों दल भारत की सीमा में प्रवेश कर गए हैं। उन्होंने नष्ट करने के लिए स्थानीय स्तर के अलावा केंद्रीय टीम भी बनाई गई है लेकिन अभी तक इसमें अपेक्षित सफलता नहीं मिल पाई है और 58 वर्ष के बाद प्रयागराज में 15 दिन के भीतर बृहस्पतिवार को टिड्डियों का दूसरी बाद हमला हुआ। उप निदेशक कृषि ने बताया कि सरकारी दस्तावेजों में इससे पहले 1962 में टिड्डी दल के यहां आने का जिक्र मिलता है। हालांकि इसका बहुत विवरण उपलब्ध नहीं है।