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तीन फीसदी वोट बढ़े, फिर भी हाथ से निकली सात सीट

Sun, 12 Mar 2017 02:14 AM IST
विजय सक्सेना, अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
विजय सक्सेना, अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Sun, 12 Mar 2017 02:14 AM IST
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Three percent votes increased, seven seats still out of hand
ईवीएम
पिछले विधानसभा सभा चुनाव में जिले की 12 विधानसभा सीटों में से आठ पर परचम लहराने वाली समाजवादी पार्टी को इस बार के चुनाव में 3.17 फीसदी अधिक वोट मिलने के बावजूद उसके हाथ से सात सीटें निकल गईं। इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लहर ही माना जा रहा है, जिसकी वजह से जिले में आठों सीट पर प्रत्याशी औंधे मुंह गिर गए। हालांकि  पिछली बार करछना विधानसभा सीट से पराजित होने वाले उज्ज्वल रमण सिंह ने इस बार के चुनाव में इलाहाबाद से सपा की लाज कुछ हद तक बचा ली।
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सपा को जिले में जिस तरह से पराजय का मुंह देखना पड़ा है, प्रत्याशियों के साथ वरिष्ठ नेताओं और स्थानीय पदाधिकारियों को भी इसकी कतई उम्मीद नहीं थी। ऐसा इसलिए भी कि पिछले चुनाव में सपा को पूरे जिले में 28.23 फीसदी वोट मिले थे। इसके मुकाबले इस बार मतदाताओं का रुझान सपा की तरफ ज्यादा रहा और उसे 31.40 फीसदी वोट मिले। पिछले वर्ष के मुकाबले इस बार 3.17 फीसदी वोट अधिक मिलने के बाद पार्टी की यह हश्र होगा, यह शायद नेताओं ने सोचा भी नहीं होगा।
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शहर दक्षिणी से हाजी परवेज अहमद, फाफामऊ में अंसार अहमद, प्रतापपुर में विजमा यादव, सोरांव में सत्यवीर मुन्ना अपनी सीट नहीं बचा सके। सपा ने सोरांव से पहले सत्यवीर को ही प्रत्याशी घोषित किया। गठबंधन हुआ तो यह सीट कांग्रेस के लिए छोड़ दी गई, लेकिन अंतिम समय में सपा ने यहां से सत्यवीर को फिर से प्रत्याशी घोषित कर दिया, सो यहां से सत्यवीर के साथ कांग्रेस प्रत्याशी ने भी नामांकन किया। नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद कांग्रेस ने अपने प्रत्याशी को बैठा दिया। माना जा रहा है कि सपा-कांग्रेस के बीच इस उठा-पटक के कारण ही मतदाताओं ने सत्यवीर से मुंह मोड़ लिया।
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प्रतापपुर में विजमा की पराजय की आशंका पहले से जताई जा रही थी। उन पर क्षेत्र में विकास कार्य न कराने, क्षेत्र से गायब रहने आदि के आरोप भी लगे। बीच में उनका टिकट कटने की अफवाह उड़ी, लेकिन नामांकन शुरू होने से कुछ दिन पहले पार्टी ने उनके नाम की घोषणा कर दी। विजमा की पराजय का कारण भी यही माना जा रहा है। शहर दक्षिणी में हाजी परवेज अहमद को तो पराजय का जरा भी आभास नहीं था, लेकिन मोदी की आंधी और नंदी के मैनेजमेंट के आगे परवेज का सारा गणित फेल हो गया। फाफामऊ विधानसभा क्षेत्र में अंसार अहमद भी गच्चा खा गए। फाफामऊ में मुस्लिम मतदाताओं की बड़ी संख्या है, लेकिन मोदी लहर में अंसार भी नहीं टिक सके।

कांग्रेस से गठबंधन के बाद इलाहाबाद में सपा ने तीन विधायकों का पत्ता काट दिया। जिले में पार्टी की इस स्थिति के लिए इसे भी कारण माना जा रहा है। मेजा विधानसभा सीट से विधायक रहे गिरीश चंद्र उर्फ गामा पांडेय की जगह पार्टी ने राम सेवक पटेल को मैदान में उतार दिया तो फूलपुर से सईद अहमद की जगह मंसूर आलम तथा हंडिया में प्रशांत सिंह का टिकट काटकर निधि यादव को प्रत्याशी बना दिया गया। तीनों सीटों पर प्रत्याशी बदलने का निर्णय मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का था। माना जा रहा है कि विधायकों का टिकट काटने से पार्टी के काफी कार्यकर्ताओं में अंदर ही अंदर नाराजगी थी और इसी वजह से उन्होंने दूसरे प्रत्याशियों के समर्थन में खुल कर प्रचार-प्रसार नहीं किया। बाकी काम मोदी की लहर में हो गया।


बारा विधानसभा से सपा के टिकट पर विधायक बने डॉ. अजय कुमार को इस स्थिति का आभास शायद पहले ही हो गया था, सो उन्होंने काफी पहले ही सपा का साथ छोड़कर भाजपा का दामन थाम लिया। उनका यह निर्णय फायदेमंद साबित हुआ और वह भाजपा के टिकट पर फिर से बारा से विधायक चुने गए। सपा ने यहां से पूर्व सांसद अमृत लाल भारतीय के पुत्र अजय कुमार उर्फ मुन्ना भइया को मैदान में उतारा, लेकिन डॉ अजय के सामने वह नहीं टिक सके।
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