फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   Thousands of devotees took holy dip in the confluence on Kamika Ekadashi

कामिका एकादशी पर हजारों श्रद्धालुओं ने संगम में लगाई पुण्य की डुबकी

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Thu, 16 Jul 2020 07:53 PM IST
विज्ञापन
Thousands of devotees took holy dip in the confluence on Kamika Ekadashi
प्रयागराज। सावन कृष्ण पक्ष की कामिका एकादशी पर बृहस्पतिवार को संगम समेत गंगा-यमुना के अन्य घाटों पर हजारों श्रद्धालुओं ने पुण्य की डुबकी लगाई। व्रत रखकर गंगा तटों पर अन्न -वस्त्र का दान किया गया। महिलाओं ने गंगा पूजा के साथ ही दीपदान कर घर, परिवार और समाज की सुख, समृद्धि के लिए प्रार्थना की। गंगा केजलस्तर में वृद्धि के बावजूद सावन में कामिका एकादशी पर सुबह से ही तटों पर श्रद्धालु पहुंचने लगे। संगम नोज पर हजारों श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई। हालांकि त्रिवेणी रोड पर बेनी बांध के पास पुलिस ने बैरिकेडिंग गाकर रास्ता बंद कर दिया था, लेकिन श्रद्धालु बड़े हनुमान मंदिर वाले मार्ग से संगम पहुंचे। इस दौरान वीआईपी किला घाट से लेकर संगम नोज तक डुबकी लगती रही। कहीं तीर्थपुरोहितों की चौकियों पर जप -ध्यान तो कहीं दीपदान का सिलसिला चलता रहा। रेती पर शिवलिंग बनाकर भी महिलाओं ने पूजन किया और गंगा की आरती उतारी। इसी तरह दशाश्वमेध घाट पर भी कामदा एकादशी पर हजारों श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई। जगह-जगह तीर्थपुरोहितों की चौकियों पर संकल्प और पूजन किया जाता रहा। पवित्र सावन मास में भगवान शिव और विष्णु की पूजा विशेष फलदायी होती है। मान्यता है कि सावन में भगवान शिव की पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। ज्योतिषाचार्य पं ब्रजेंद्र मिश्र के अनुसार इस मास का महत्व और भी बढ़ जाता है जब भगवान विष्णु की प्रिय सावन मास की कृष्ण पक्ष की कामिका एकदाशी आती है। तीर्थपुरोहित राजमणि तिवारी के अनुसार सावन में कामिका एकदाशी पर व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा करने से जीवात्माओं को जन्म -जन्मातर के पापों से मुक्ति मिल जाती है। साथ ही सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। कोट पुराणों में कामिका एकादशी के महात्म्य का वर्णन मिलता है। पद्मपुराण के मुताबिक भगवान कृष्ण ने कामिका एकादशी के बारे में धर्मराज युद्धिष्ठिर को बताया था। इस एकादशी का व्रत रखने से वाजपेय यज्ञ के बराबर फल की प्राप्ति होती है।- अरुण शुक्ला- तीर्थपुरोहित, दशाश्वमेध घाट। 
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed