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पुलिस उप निरीक्षक पद पर सीधी भर्ती में चयनितों को प्रशिक्षण काल में अवकाश का वेतन पाने का हक

Thu, 16 Sep 2021 09:17 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Thu, 16 Sep 2021 09:17 PM IST
सार

यह आदेश कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एमएन भंडारी तथा न्यायमूर्ति एके ओझा की खंडपीठ ने आलोक कुमार सिंह व अन्य की अपील को स्वीकार करते हुए दिया है। अपील पर अधिवक्ता आलोक मिश्रा ने बहस की। याची का कहना था कि आरक्षी रहते हुए उप निरीक्षक भर्ती में अर्जी दी और सफल घोषित किया गया। उसे प्रशिक्षण पर भेजा गया। किंतु स्टाइपेंड का ही भुगतान किया गया।

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Those selected in direct recruitment on the post of Police Sub-Inspector are entitled to get leave salary during training period.
हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि पुलिस उप निरीक्षक पद पर चयनित उन अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण अवधि के स्टाइपेंड के साथ अवकाश कालीन वेतन पाने का भी हक है। जो पहले से पुलिस में कांस्टेबल थे। कोर्ट ने उन्हें शासनादेश का लाभ देने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि 16 सितंबर 65 के शासनादेश एवं 3 नवंबर 79 के सर्कुलर के मुताबिक सीधी भर्ती से उप निरीक्षक बने कांस्टेबलों को प्रशिक्षण काल में छुट्टी का वेतन पाने का अधिकार है।
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ऐसा इसलिए किया गया कि उप निरीक्षक पद पर चयन के बाद आरक्षी  इस्तीफा दे देते थे। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद नियुक्त होते थे। शासनादेश से इस्तीफा न स्वीकार कर प्रशिक्षण के लिए कार्यमुक्त करने की व्यवस्था की गई और कहा गया कि प्रशिक्षण अवधि को छुट्टी माना जाए। मगर विभाग ने वेतन देने से इंकार कर दिया। जिसे चुनौती दी गई और एकलपीठ ने याचिका खारिज कर दी। इस आदेश को विशेष अपील में चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने एकल पीठ के 15 नवंबर 19 के फैसले को रद्द कर दिया है।
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यह आदेश कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश एमएन भंडारी तथा न्यायमूर्ति एके ओझा की खंडपीठ ने आलोक कुमार सिंह व अन्य की अपील को स्वीकार करते हुए दिया है। अपील पर अधिवक्ता आलोक मिश्रा ने बहस की। याची का कहना था कि आरक्षी रहते हुए उप निरीक्षक भर्ती में अर्जी दी और सफल घोषित किया गया। उसे प्रशिक्षण पर भेजा गया। किंतु स्टाइपेंड का ही भुगतान किया गया।
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याची ने 1965 के शासनादेश व 1979 के सर्कुलर के आधार पर प्रशिक्षण अवधि को छुट्टी मानते हुए इस अवधि का वेतन देने की मांग की। इसे नियम 157 ए (4) के तहत असामान्य अवकाश माना जाएगा। पुलिस विभाग ने सीधी भर्ती में चयनित होने के कारण प्रशिक्षण काल का वेतन देने से इंकार कर दिया था। जिसे कोर्ट ने सही नहीं माना।
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