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इस बार भी क्रेट से हिंदी बाहर
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Wed, 02 May 2018 02:01 AM IST
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय की संयुक्त शोध प्रवेश परीक्षा (क्रेट) से लगातार दूसरे साल भी हिंदी विषय बाहर है। इस साल भी हिंदी विभाग में पीएचडी में प्रवेश नहीं होगा। शिक्षकों के मुकाबले शोधार्थियों की संख्या मानक से अधिक होने के कारण विभाग ने प्रवेश प्रकोष्ठ को रिक्तियां नहीं भेजीं।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय में इस बार 41 विषयों में 232 पदों के लिए संयुक्त शोध प्रवेश परीक्षा होनी है। इसके लिए आवेदन शुरू हो चुका है। आवेदन की अंतिम तिथि 16 मई निर्धारित की गई है। आवेदन करने वाले अभ्यर्थी 23 मई से प्रवेश पत्र ऑनलाइन डाउनलोड कर सकेंगे। परीक्षा 30 मई को होनी है। 41 विषयों में हिंदी शामिल नहीं है। दरअसल, हिंदी विभाग में कुछ नौ शिक्षक ही हैं और शोधार्थियों की संख्या 53 है। नौ में से तीन शिक्षक इसी वर्ष रिटायर हो रहे हैं। एक शिक्षक के तहत अधिकतम आठ शोधार्थी हो सकते हैं।
तीन शिक्षकों के रिटायरमेंट के बाद यहमानक आठ से अधिक हो जाएगा। तब छह शिक्षकों के तहत 53 शोधार्थी होंगे। इसके अलावा हिंदी विभाग में एमए में तकरीबन 700 विद्यार्थी और बीए में 4200 विद्यार्थी हैं। बीए के कुल 27 सेक्शन हैं। शिक्षकों को रोज क्लास भी लेनी है। हिंदी के विभागाध्यक्ष प्रो. केएस पांडेय का कहना है कि इन तमाम वजहों से ही इस साल भी हिंदी विभाग में पीएचडी के लिए रिक्तयां नहीं हैं। पिछले साल भी हिंदी विभाग में पीएचडी के लिए प्रवेश नहीं हुआ था।
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय में इस बार 41 विषयों में 232 पदों के लिए संयुक्त शोध प्रवेश परीक्षा होनी है। इसके लिए आवेदन शुरू हो चुका है। आवेदन की अंतिम तिथि 16 मई निर्धारित की गई है। आवेदन करने वाले अभ्यर्थी 23 मई से प्रवेश पत्र ऑनलाइन डाउनलोड कर सकेंगे। परीक्षा 30 मई को होनी है। 41 विषयों में हिंदी शामिल नहीं है। दरअसल, हिंदी विभाग में कुछ नौ शिक्षक ही हैं और शोधार्थियों की संख्या 53 है। नौ में से तीन शिक्षक इसी वर्ष रिटायर हो रहे हैं। एक शिक्षक के तहत अधिकतम आठ शोधार्थी हो सकते हैं।
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तीन शिक्षकों के रिटायरमेंट के बाद यहमानक आठ से अधिक हो जाएगा। तब छह शिक्षकों के तहत 53 शोधार्थी होंगे। इसके अलावा हिंदी विभाग में एमए में तकरीबन 700 विद्यार्थी और बीए में 4200 विद्यार्थी हैं। बीए के कुल 27 सेक्शन हैं। शिक्षकों को रोज क्लास भी लेनी है। हिंदी के विभागाध्यक्ष प्रो. केएस पांडेय का कहना है कि इन तमाम वजहों से ही इस साल भी हिंदी विभाग में पीएचडी के लिए रिक्तयां नहीं हैं। पिछले साल भी हिंदी विभाग में पीएचडी के लिए प्रवेश नहीं हुआ था।
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