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लॉकडाउन में इस कारण अब तक नहीं मिली वकीलों को मदद
Thu, 30 Apr 2020 11:57 PM IST
विनोद सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Thu, 30 Apr 2020 11:57 PM IST
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प्रयागराज। लॉकडाउन के दौरान अदालतें बंद होने के कारण आर्थिक तंगी से जूझ रहे वकीलों को उत्तर प्रदेश बार कौंसिल से मदद मिलने की उम्मीद धूमिल होती जा रही है। कौंसिल के सदस्यों के बीच मदद को लेकर खींचतान और राजनीति तेज हो गई है। अध्यक्ष हरिशंकर सिंह ने सरकार की ओर से मदद की एवज में 100 करोड़ रुपये न मिल पाने का ठीकरा पूर्व अध्यक्ष अमरेंद्र सिंह पर फोड़ा है। वहीं अमरेंद्र सिंह ने भी पलटवार करते हुए अध्यक्ष पर अपनी नाकामी छुपाने के लिए राजनीति करने का आरोप लगाया है। वकीलों को मदद के नाम पर सरकार से पैसा मांगने या अपना फंड खर्च करने को लेकर कौंसिल के सदस्यों में पहले से ही खींचतान चल रही थी।
पूर्व अध्यक्ष अमरेंद्र सिंह और कुछ अन्य सदस्य चाहते थे कि कौंसिल अपने फंड से ही वकीलों को मदद करे। बुधवार को लखनऊ में हुई न्यासी समिति की बैठक में अध्यक्ष हरिशंकर सिंह को उस समय तगड़ा झटका लगा, जब महाधिवक्ता और न्यासी समिति के अध्यक्ष राघवेंद्र सिंह ने साफ कह दिया कि कोविड-19 की आपदा में मदद के लिए उनके पास कोई फंड नहीं है, इसलिए 100 करोड़ तो दूर इस मद में कोई मदद नहीं दी जा सकती है। न्यासी समिति की बैठक हाईकोर्ट के निर्देश पर हुई थी। हाईकोर्ट ने न्यासी समिति को मृतक अधिवक्ताओं के परिजनों को पांच लाख की आर्थिक सहायता और तीन वर्ष तक की वकालत वाले अधिवक्ताओं को 5000 रुपये महीने स्टाइपेंड देने का मामला तय करने का निर्देश दिया था। बैठक में अधिवक्ताओं के परिजनों को पांच लाख की मदद देने के 235 मामलों का निस्तारण कर दिया गया, जिस पर 12 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
मगर, युवा अधिवक्ताओं को 5000 रुपये देने का मामला इसलिए टल गया, क्योंकि जारी शासनादेश में यह जिक्र नहीं है कि मदद किस तिथि से दी जानी है। तय किया गया कि इस पर सरकार से निर्देश प्राप्त करके निर्णय लिया जाएगा। अधिवक्ताओं के स्टांप शुल्क से होने वाली आमदनी की रकम पर भी चर्चा हुई। न्यासी समिति का कहना था कि यह रकम सीधी मिलनी चाहिए, क्योंकि अभी यह रकम पहले सरकार के खाते में जाती है और वहां से न्यासी समिति को मिलती है। इसमें करीब साल भर का समय लग जाता है। इस मुद्दे पर सरकार से वार्ता करने का निर्णय लिया गया है।
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अमरेंद्र का बयान बना रोड़ा- हरिशंकर
बार कौंसिल के अध्यक्ष हरिशंकर सिंह ने कहा, ‘अमरेंद्र सिंह ने बयान दिया था कि बार कौंसिल के पास 40 करोड़ रुपये का फंड है, जिसमें से वकीलों को मदद दी जानी चाहिए। यह आंकड़ा उनको कहां से मिला, मैं नहीं जानता, मगर उनके इस बयान की वजह से ही सरकार की ओर से वकीलों को 100 करोड़ों रुपये की सहायता नहीं मिल सकी है। उनका बयान ही राह में रोड़ा बना। उन्होंने जिन दो सदस्यों का समर्थन में नाम लिया है, वह भी उनके साथ नहीं हैं’।
मदद नहीं देना चाहते अध्यक्ष: अमरेंद्र
बार कौंसिल के सदस्य और पूर्व अध्यक्ष अमरेंद्र सिंह ने कहा, ‘मैंने 24 मार्च को ही बार कौंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष और बार कौंसिल यूपी के अध्यक्ष को पत्र लिख कर कहा था कि सरकार से सहायता मांगने की बजाय बार कौंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के पास जमा 40 करोड़ रुपये में से 20 करोड़ रुपये और बार कौंसिल ऑफ इंडिया से भी इतनी ही रकम लेकर तथा कुछ रकम सदस्यों द्वारा चंदे से एकत्र कर के फंड बनाया जाय। इससे जरूरतमंद वकीलों को मदद दी जाए, मगर ऐसा नहीं किया गया। दरअसल, अध्यक्ष कौंसिल का फंड खर्च नहीं करना चाहते और अपनी नाकामी छुपाने के लिए राजनीति कर रहे हैं’।
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पूर्व अध्यक्ष अमरेंद्र सिंह और कुछ अन्य सदस्य चाहते थे कि कौंसिल अपने फंड से ही वकीलों को मदद करे। बुधवार को लखनऊ में हुई न्यासी समिति की बैठक में अध्यक्ष हरिशंकर सिंह को उस समय तगड़ा झटका लगा, जब महाधिवक्ता और न्यासी समिति के अध्यक्ष राघवेंद्र सिंह ने साफ कह दिया कि कोविड-19 की आपदा में मदद के लिए उनके पास कोई फंड नहीं है, इसलिए 100 करोड़ तो दूर इस मद में कोई मदद नहीं दी जा सकती है। न्यासी समिति की बैठक हाईकोर्ट के निर्देश पर हुई थी। हाईकोर्ट ने न्यासी समिति को मृतक अधिवक्ताओं के परिजनों को पांच लाख की आर्थिक सहायता और तीन वर्ष तक की वकालत वाले अधिवक्ताओं को 5000 रुपये महीने स्टाइपेंड देने का मामला तय करने का निर्देश दिया था। बैठक में अधिवक्ताओं के परिजनों को पांच लाख की मदद देने के 235 मामलों का निस्तारण कर दिया गया, जिस पर 12 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
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मगर, युवा अधिवक्ताओं को 5000 रुपये देने का मामला इसलिए टल गया, क्योंकि जारी शासनादेश में यह जिक्र नहीं है कि मदद किस तिथि से दी जानी है। तय किया गया कि इस पर सरकार से निर्देश प्राप्त करके निर्णय लिया जाएगा। अधिवक्ताओं के स्टांप शुल्क से होने वाली आमदनी की रकम पर भी चर्चा हुई। न्यासी समिति का कहना था कि यह रकम सीधी मिलनी चाहिए, क्योंकि अभी यह रकम पहले सरकार के खाते में जाती है और वहां से न्यासी समिति को मिलती है। इसमें करीब साल भर का समय लग जाता है। इस मुद्दे पर सरकार से वार्ता करने का निर्णय लिया गया है।
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अमरेंद्र का बयान बना रोड़ा- हरिशंकर
बार कौंसिल के अध्यक्ष हरिशंकर सिंह ने कहा, ‘अमरेंद्र सिंह ने बयान दिया था कि बार कौंसिल के पास 40 करोड़ रुपये का फंड है, जिसमें से वकीलों को मदद दी जानी चाहिए। यह आंकड़ा उनको कहां से मिला, मैं नहीं जानता, मगर उनके इस बयान की वजह से ही सरकार की ओर से वकीलों को 100 करोड़ों रुपये की सहायता नहीं मिल सकी है। उनका बयान ही राह में रोड़ा बना। उन्होंने जिन दो सदस्यों का समर्थन में नाम लिया है, वह भी उनके साथ नहीं हैं’।
मदद नहीं देना चाहते अध्यक्ष: अमरेंद्र
बार कौंसिल के सदस्य और पूर्व अध्यक्ष अमरेंद्र सिंह ने कहा, ‘मैंने 24 मार्च को ही बार कौंसिल ऑफ इंडिया के अध्यक्ष और बार कौंसिल यूपी के अध्यक्ष को पत्र लिख कर कहा था कि सरकार से सहायता मांगने की बजाय बार कौंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश के पास जमा 40 करोड़ रुपये में से 20 करोड़ रुपये और बार कौंसिल ऑफ इंडिया से भी इतनी ही रकम लेकर तथा कुछ रकम सदस्यों द्वारा चंदे से एकत्र कर के फंड बनाया जाय। इससे जरूरतमंद वकीलों को मदद दी जाए, मगर ऐसा नहीं किया गया। दरअसल, अध्यक्ष कौंसिल का फंड खर्च नहीं करना चाहते और अपनी नाकामी छुपाने के लिए राजनीति कर रहे हैं’।