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Prayagraj : बालिग दंपती के शांतिपूर्ण वैवाहिक जीवन में हस्तक्षेप न हो, जरूरत पड़ने पर पुलिस दे सुरक्षा
Wed, 03 Jun 2026 07:01 PM IST
विनोद सिंह
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
Published by: विनोद सिंह
Updated Wed, 03 Jun 2026 07:01 PM IST
सार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक बालिग विवाहित जोड़े को राहत देते हुए कहा है कि उन्हें पति-पत्नी के रूप में साथ रहने की स्वतंत्रता है। किसी को भी उनके शांतिपूर्ण वैवाहिक जीवन में हस्तक्षेप करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक बालिग विवाहित जोड़े को राहत देते हुए कहा है कि उन्हें पति-पत्नी के रूप में साथ रहने की स्वतंत्रता है। किसी को भी उनके शांतिपूर्ण वैवाहिक जीवन में हस्तक्षेप करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। दंपती को किसी प्रकार की धमकी, उत्पीड़न या सुरक्षा संबंधी समस्या का सामना करना पड़ता है तो वे संबंधित पुलिस अधिकारियों से संपर्क कर सकते हैं, जो मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करेंगे। यह आदेश न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र ने अंकिता एवं अन्य की याचिका पर दिया है।
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प्रयागराज निवासी याचियों ने 11 मई 2026 को अपनी मर्जी से हिंदू रीति-रिवाज से विवाह किया था। आरोप है कि उनके विवाह से परिवार को लोग खुश नहीं हैं और उन्हें धमका रहे हैं। उनके वैवाहिक जीवन में हस्तक्षेप कर रहे हैं। दंपती ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर सुरक्षा प्रदान करने तथा प्रतिवादियों को हस्तक्षेप से रोकने का अनुरोध किया था।
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कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद कहा कि लता सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले में सर्वोच्च न्यायालय स्पष्ट किया है कि बालिग होने के बाद प्रत्येक व्यक्ति को अपनी पसंद के व्यक्ति से विवाह करने का अधिकार है। यदि परिवारजन ऐसे विवाह से सहमत नहीं हैं तो वे सामाजिक संबंध समाप्त कर सकते हैं। उन्हें दंपती को धमकाने, परेशान करने का अधिकार नहीं है।
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कोर्ट ने याचियों को साथ रहने की स्वतंत्रता देने के साथ ही यह भी निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता दो माह के भीतर उत्तर प्रदेश विवाह पंजीकरण नियम, 2017 के तहत अपने विवाह का पंजीकरण कराएं। यदि निर्धारित अवधि में विवाह का पंजीकरण नहीं कराया गया तो न्यायालय की ओर से दी गई सुरक्षा स्वतः समाप्त हो जाएगी।