फिर शुरू हुई आरक्षण की मांग
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विधानसभा चुनाव में अभी एक साल से भी अधिक समय बाकी है, लेकिन आरक्षण के मुद्दे को गरमाने की तैयारी फिर शुरू हो गई है। सामाजिक न्याय मोर्चा की ओर से रविवार को आयोजित आरक्षण चेतना सम्मेलन में लोक सेवा आयोग की भर्तियाें में त्रिस्तरीय आरक्षण समेत छह सूत्रीय मांग को लेकर राष्ट्रव्यापी आंदोलन की घोषणा की गई। निर्णय लिया गया कि अगला आरक्षण चेतना सम्मेलन वाराणसी में आयोजित होगा।
विज्ञान परिषद में आयोजित सम्मेलन में वक्ताओं ने घोषणा की कि त्रिस्तरीय आरक्षण व्यवस्था लागू करने के लिए प्रदेश सरकार को विधेयक पारित करने के लिए लड़ाई लड़ी जाएगी। वक्ताओं ने जजों की नियुक्ति में आबादी के अनुपात में 85 फीसदी प्रतिनिधित्व, प्रमोशन में आरक्षण, ओबीसी के लिए क्रीमीलेयर का प्रावधान खत्म करने, पिछड़ी जाति के जनगणना के आंकड़े प्रकाशित करने की मांग उठाई।
मुख्य वक्ता न्यायमूर्ति रविंद्र सिंह ने नौकरियों में दलितों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों का प्रतिनिधित्व कम होने का मुद्दा उठाया। न्यायमूर्ति ने त्रिस्तरीय आरक्षण के मुद्दे पर सरकार के फैसले को उचित ठहराया। उन्होंने कहा कि त्रिस्तरीय आरक्षण वापस लेने का सरकार का निर्णय एकदम उचित था, क्योंकि, यदि हाईकोर्ट द्वारा त्रिस्तरीय आरक्षण को रद्द किया जाता तो भविष्य में सरकार कभी भी इस संबंध में कानून नहीं बना पाती, इसलिए सरकार द्वारा स्वयं आयोग के इस फैसले को रद्द करने का फैसला अन्य पिछड़ा वर्ग के हित में है।
बीएचयू के प्रोफेसर ओमशंकर ने दलितों, पिछड़ों के हक के लिए व्यापक रणनीति बनाकर आंदोलन की बात कही। सम्मेलन में हैदराबाद विश्वविद्यालय के छात्र की आत्महत्या प्रकरण की सीबीआई जांच की मांग की गई। साथ में दो मिनट का मौन रखकर मृतक की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की गई। मनोज यादव ने छह सूत्रीय मांग का प्रस्ताव रखा। रमाधार यादव ने सम्मेलन की अध्यक्षता की। संचालन जीपी यादव ने किया। सम्मेलन में डॉ.धनंजय, अजीत यादव, पीसी कुरील, पंचम लाल, धीरेंद्र, अविनाश विद्यार्थी, संदीप यादव, राजेश भारती आदि शामिल रहे।