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ताकते रह गए कुलपति, डीन की कुर्सी पर बैठ गए प्रो. सत्यनारायण
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Fri, 05 May 2017 02:05 AM IST
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इलाहाबाद
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो इलाहाबाद।
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प्रो. ए. सत्यनारायण को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिलने के बाद भी जब इलाहाबाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने उनका पद वापस नहीं दिया तो उन्होंने बृहस्पतिवार को खुद ही डीन आर्ट्स का कार्यभार संभाल लिया। इस पद के लिए दावा कर रहे प्रो. केएस मिश्र को सुप्रीम कोर्ट से झटका मिलने के बाद वह अचानक छुट्टी पर चले गए और सुबह दफ्तर खुलते ही प्रो. सत्यनारायण वहां पहुंच गए। वह डीन आर्ट्स की कुर्सी पर बैठ गए और कामकाज शुरू कर दिया। कुछ फाइलों पर दस्तखत भी किए। इस बीच चीफ प्रॉक्टर वहां सिक्योरिटी एवं पुलिस अफसरों के साथ पहुंचे और हालात का जायजा लेकर लौट गए।
प्रो. सत्यनारायण और कुलपति प्रो. आरएल हांगलू के बीच तनातनी कोई नई बात नहीं है। प्रो. हांगलू ने प्रो. सत्यनारायण से ही कुलपति का चार्ज लिया था। इस बार दोनों खुलकर आमने-सामने आ गए। यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट से मुकदमा जीतने के बाद भी प्रो. सत्यनारायण को उनका डीन आर्ट्स का पद वापस नहीं किया गया जबकि इस माह की 31 तारीख को ही वह रिटायर होने जा रहे हैं। इविवि प्रशासन यही तर्क देता रहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश की प्रमाणित प्रति नहीं मिली है।
प्रो. सत्यनारायण का दावा है कि 27 अप्रैल को उन्होंने कुलपति के पास आदेश की प्रमाणित प्रति भिजवा दी थी। रजिस्ट्रार दफ्तर में भी आदेश की प्रति भेजी, लेकिन इविवि प्रशासन यही कहता रहा कि विधिक राय लेने के बाद ही कोई निर्णय होगा। एक सप्ताह का समय बीत गया। जब कोई कार्यालय आदेश जारी नहीं हुआ तो बृहस्पतिवार को उन्होंने खुद ही चार्ज संभाल लिया।
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हालांकि, यह सूचना मिलते ही इविवि प्रशासन सक्रिय हो गया। कुछ ही देर में मौके पर चीफ प्रॉक्टर, इविवि के सिक्योरिटी अफसर एवं पुलिस के कुछ अफसर मौके पर पहुंचे। वहां उन्हें सुप्रीम कोर्ट के आदेश से अवगत कराया गया। प्रो. सत्यनारायण ने कहा कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ताओं से विधिक राय ली है। उस हिसाब से उनका पद रीस्टोर हो चुका है। ऐसे में विश्वविद्यालय प्रशासन अगर कार्यालय आदेश जारी नहीं करता है तो भी वह इस कुर्सी पर बैठ सकते हैं। यह सुनने के बाद अफसर वहां से लौट गए। प्रो. सत्यनारायण का कहना है कि उन्हें इसलिए चार्ज नहीं दिया जा रहा, क्योंकि विवादों से घिरे कुलपति अगर एमएचआरडी के दबाव में छुट्टी पर चले जाते हैं तो उन्हें कुलपति का चार्ज मिल जाएगा।
उधर, इविवि के पीआरओ प्रो. हर्ष कुमार का कहना है कि प्रो. सत्यनारायण ने अमर्यादित तरीके से चार्ज लिया है। उनके मामले में विधिक राय ली जा रही थी। डीन आर्ट्स के लिए सिर्फ वरिष्ठता ही जरूरी नहीं है, अन्य अर्हताएं भी देखी जाती हैं। वैसे भी एक मामले में उनके खिलाफ जांच चल रही है। जहां तक सुप्रीम कोर्ट के आदेश की प्रमाणित प्रति की बात है तो उन्होंने कोई प्रति उपलब्ध नहीं कराई है। रजिस्ट्रार ऑफिस में सिर्फ फोटोकॉपी दी है, जो पर्याप्त नहीं है। डीन आर्ट्स की कुर्सी पर बैठकर उन्होंने जिन दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए हैं, वे मान्य नहीं होंगे।
डीन आर्ट्स के दफ्तर में पूरा दिन बैठने के बाद प्रो. सत्यनारायण ने शाम को दफ्तर में ताला बंद कराया और चाभी अपने पास रख ली। पीआरओ प्रो. हर्ष कुमार ने बताया कि प्रो. सत्यनारायण चाभी घर लेकर चले गए हैं।
अब तक डीन आर्ट्स का पद संभाल रहे प्रो. केएस मिश्र के छुट्टी पर जाने के बाद प्रो. एलआर शर्मा को डीन आर्ट्स का अतिरिक्त प्रभार दिया गया था, लेकिन वह बृहस्पतिवार को दफ्तर नहीं आए और तब तक प्रो. सत्यनारायण डीन आर्ट्स की कुर्सी पर आकर बैठ गए।
बृहस्पतिवार को कुछ छात्रों ने डीन के रूप में प्रो. सत्यनारायण से एनओसी में दस्तखत करा लिए, लेकिन जब इसे स्वीकृत कराने के लिए कुलपति के पास भेजा गया तो कुलपति ने एनओसी वापस कर दी। इसके बारे कुछ छात्रों ने प्रभारी डीन प्रो. एलआर शर्मा से दस्तखत कराए और तब एनओसी स्वीकृत की गई।
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प्रो. सत्यनारायण और कुलपति प्रो. आरएल हांगलू के बीच तनातनी कोई नई बात नहीं है। प्रो. हांगलू ने प्रो. सत्यनारायण से ही कुलपति का चार्ज लिया था। इस बार दोनों खुलकर आमने-सामने आ गए। यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट से मुकदमा जीतने के बाद भी प्रो. सत्यनारायण को उनका डीन आर्ट्स का पद वापस नहीं किया गया जबकि इस माह की 31 तारीख को ही वह रिटायर होने जा रहे हैं। इविवि प्रशासन यही तर्क देता रहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश की प्रमाणित प्रति नहीं मिली है।
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प्रो. सत्यनारायण का दावा है कि 27 अप्रैल को उन्होंने कुलपति के पास आदेश की प्रमाणित प्रति भिजवा दी थी। रजिस्ट्रार दफ्तर में भी आदेश की प्रति भेजी, लेकिन इविवि प्रशासन यही कहता रहा कि विधिक राय लेने के बाद ही कोई निर्णय होगा। एक सप्ताह का समय बीत गया। जब कोई कार्यालय आदेश जारी नहीं हुआ तो बृहस्पतिवार को उन्होंने खुद ही चार्ज संभाल लिया।
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हालांकि, यह सूचना मिलते ही इविवि प्रशासन सक्रिय हो गया। कुछ ही देर में मौके पर चीफ प्रॉक्टर, इविवि के सिक्योरिटी अफसर एवं पुलिस के कुछ अफसर मौके पर पहुंचे। वहां उन्हें सुप्रीम कोर्ट के आदेश से अवगत कराया गया। प्रो. सत्यनारायण ने कहा कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ताओं से विधिक राय ली है। उस हिसाब से उनका पद रीस्टोर हो चुका है। ऐसे में विश्वविद्यालय प्रशासन अगर कार्यालय आदेश जारी नहीं करता है तो भी वह इस कुर्सी पर बैठ सकते हैं। यह सुनने के बाद अफसर वहां से लौट गए। प्रो. सत्यनारायण का कहना है कि उन्हें इसलिए चार्ज नहीं दिया जा रहा, क्योंकि विवादों से घिरे कुलपति अगर एमएचआरडी के दबाव में छुट्टी पर चले जाते हैं तो उन्हें कुलपति का चार्ज मिल जाएगा।
उधर, इविवि के पीआरओ प्रो. हर्ष कुमार का कहना है कि प्रो. सत्यनारायण ने अमर्यादित तरीके से चार्ज लिया है। उनके मामले में विधिक राय ली जा रही थी। डीन आर्ट्स के लिए सिर्फ वरिष्ठता ही जरूरी नहीं है, अन्य अर्हताएं भी देखी जाती हैं। वैसे भी एक मामले में उनके खिलाफ जांच चल रही है। जहां तक सुप्रीम कोर्ट के आदेश की प्रमाणित प्रति की बात है तो उन्होंने कोई प्रति उपलब्ध नहीं कराई है। रजिस्ट्रार ऑफिस में सिर्फ फोटोकॉपी दी है, जो पर्याप्त नहीं है। डीन आर्ट्स की कुर्सी पर बैठकर उन्होंने जिन दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए हैं, वे मान्य नहीं होंगे।
डीन आर्ट्स के दफ्तर में पूरा दिन बैठने के बाद प्रो. सत्यनारायण ने शाम को दफ्तर में ताला बंद कराया और चाभी अपने पास रख ली। पीआरओ प्रो. हर्ष कुमार ने बताया कि प्रो. सत्यनारायण चाभी घर लेकर चले गए हैं।
अब तक डीन आर्ट्स का पद संभाल रहे प्रो. केएस मिश्र के छुट्टी पर जाने के बाद प्रो. एलआर शर्मा को डीन आर्ट्स का अतिरिक्त प्रभार दिया गया था, लेकिन वह बृहस्पतिवार को दफ्तर नहीं आए और तब तक प्रो. सत्यनारायण डीन आर्ट्स की कुर्सी पर आकर बैठ गए।
बृहस्पतिवार को कुछ छात्रों ने डीन के रूप में प्रो. सत्यनारायण से एनओसी में दस्तखत करा लिए, लेकिन जब इसे स्वीकृत कराने के लिए कुलपति के पास भेजा गया तो कुलपति ने एनओसी वापस कर दी। इसके बारे कुछ छात्रों ने प्रभारी डीन प्रो. एलआर शर्मा से दस्तखत कराए और तब एनओसी स्वीकृत की गई।