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संगम की रेती पर अनूठी ‘परमधर्मसंसद 1008’ भी

Thu, 13 Dec 2018 01:00 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज
अमर उजाला ब्यूरो, प्रयागराज Updated Thu, 13 Dec 2018 01:00 AM IST
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The unique 'Paramdharma Samaj 1008' on the Sangam ki
प्रयागराज - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो,प्रयागराज
कुंभपर्व के दौरान संगम की रेती पर एक अनूठी ‘परमधर्मसंसद’ भी होगी, जिसमें अयोध्या में भव्य राम मंदिर निर्माण और अविरल-निर्मल गंगा के अतिरिक्त विकास के नाम पर काशी और प्रयागराज में तोड़े गए हिन्दू मंदिरों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया जाएगा। ज्योतिष एवं द्वारका शारदा पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती की उपस्थिति में 28 से 30 जनवरी तक होने वाली ‘परमधर्मसंसद 1008’ में सनातन धर्म से जुड़े कुल 43 मुद्दे शामिल होंगे जो काशी में हुई धर्मसंसद में रेखांकित किए गए थे।
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परमधर्मसंसद के लिए संगम की रेती पर ‘संसद भवन’ की अनुकृति बनेगी, जिसकी परिकल्पना काशी और प्रयागराज के शिल्पकारों ने तैयार की है। शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती परमधर्माधीश रहेंगे। इसमें उठाए गए मुद्दों पर चर्चा के बाद त्वरित समाधान निकाला जाएगा। जिन मुद्दों के समाधान के लिए शासन तथा प्रशासन के सहयोग की जरूरत होगी, उनका सहयोग लिया जाएगा। यदि सरकार सनातन धर्म से जुडे़ मुद्दों के समाधान में सहयोग नहीं करती तो ऐसी स्थितियां बनाई जाएंगी, जिससे सरकारों को मानने के लिए बाध्य होना पड़े।
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‘अमर उजाला’ से खास बातचीत में शंकराचार्य के प्रतिनिधि शिष्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा, परमधर्मसंसद का उद्देश्य सनातन धर्म से जुड़े सभी अंगों, आयामों के प्रतिनिधियों के विषयों पर चर्चा और उनका समाधान निकालना है। खास बात यह कि उक्त परमधर्मसंसद में जो कोई भी प्रतिनिधि अनुपस्थित रहेगा, उसकी सीट खाली रहेगी ताकि पता चल सके कि किस पक्ष का प्रतिनिधित्व नहीं हो सका।
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कुंभ पर्व में होने वाली ‘परमधर्मसंसद 1008’ में सनातन धर्म से जुड़े सभी प्रतिनिधि, मनीषी शामिल होंगे। इसके तहत देश की सभी संसदीय क्षेत्रों से 543 धर्मांसदों के अतिरिक्त चारों पीठों के शंकराचार्यों, सातों पुरियों, तेरह अखाड़ों,इक्यावन शक्तिपीठों, द्वादश ज्योतिर्लिंगों के प्रतिनिधि रहेंगे। इसी तरह षडदर्शन, चौदह विद्याओं के मनीषियों सहित सनातनधर्म की सभी प्रमुख विधाओं के प्रतिनिधि भी परमधर्मसंसद में मौजूदगी दर्ज कराएंगे।
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