फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   The trouble is not to support price of vegetables

मुसीबत है सब्जियों का न्यूनतम समर्थन मूल्य न होना

Wed, 18 May 2016 02:01 AM IST
अविनाशी श्रीवास्तव, अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अविनाशी श्रीवास्तव, अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Wed, 18 May 2016 02:01 AM IST
विज्ञापन
The trouble is not to support price of vegetables
सब्जीमंडी गुलजार हुई। - फोटो : अमर उजाला
सियासी उठापटक का प्रतीक बन चुका प्याज का अधिक उत्पादन अब किसानों को रुला रहा है। महाराष्ट्र में प्याज के किसानों का दर्द एक बार फिर उजागर है। हालांकि, उत्तर प्रदेश के फुटकर बाजार में यह अब भी 14 रुपये किलो बिक रहा है। यही स्थिति आलू और टमाटर को लेकर भी है। पिछले साल प्रदेश में आलू का बंपर उत्पादन हुआ। नतीजा यह रहा कि लागत नहीं मिलने की वजह से किसानों ने आलू कोल्ड स्टोरेज में ही छोड़ दिया। उनका कहना है कि 40 फीसदी तक आलू खराब हो गया। चार साल पहले भी ऐसी ही स्थिति में किसानों ने खेत में ही आलू छोड़ दिया था। इसके विपरीत इस साल अभी से आलू के दाम बढ़ने लगे हैं। एक खास प्रजाति का आलू तो बाजार से गायब होने लगा है।
विज्ञापन


प्याज और आलू का अधिक उत्पादन कभी किसानों के लिए परेशानी का सबब बनता है तो अगले साल ही कम उत्पादन की मार आम जनता को झेलनी पड़ती है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण इन सब्जियों का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय न होना है। किसान लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि गेहूं, धान की तरह इनका भी न्यूनतम मूल्य निर्धारित हो, लेकिन इस बारे में कोई निर्णय नहीं हुआ। इनके उत्पादन को लेकर कोई दीर्घकालीन नीति नहीं है।
विज्ञापन


उद्यान विभाग के अफसरों का ही कहना है, सरकार का ध्यान सिर्फ दाम पर नियंत्रण को लेकर होता है। इससे कोई नीति बन ही नहीं पाती। यह समस्या सभी फसलों की है। अखिल भारतीय आलू उत्पादक संघ के अध्यक्ष बालकृष्ण मिश्रा और उत्पादक आलोक मिश्रा कहते हैं, आलू की खेती बहुत जटिल है। एक बीमारी लग जाए तो नुकसान की भरपाई संभव नहीं है। सरकार भी कोई मदद नहीं करती।
विज्ञापन
विज्ञापन


किसी तरह से फसल तैयार हो जाए तो स्टोरेज की व्यवस्था नहीं है। पिछले वर्षों में कई बार किसानों ने लागत नहीं मिलने की वजह से खेत या कोल्ड स्टोरेज में ही आलू छोड़ दिए। गेहूं, धान, गन्ना की तरह गेहूं तथा अन्य फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित करने के लिए सरकार को कई बार लिखा गया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। हनुमानगंज के किसान शिवाकांत तिवारी कहते हैं, आलू और प्याज का पूरा बाजार बिचौलिए पर निर्भर है। बाजार नहीं है। इसलिए किसान कोल्ड स्टोरेज पर ही आलू बिचौलियों को बेच देते हैं, वह भी उनकी शर्त पर।

प्रदेश में आलू के कुल उत्पादन के लिहाज से 30 फीसदी भंडारण की भी क्षमता नहीं है। शियाट्स के डीन कालेज ऑफ एग्रीकल्चर के मुताबिक इनमें भी सरकारी कोल्ड स्टोरेज की संख्या बहुत कम है। इलाहाबाद मंडल की बात करें तो कुल कोल्ड स्टोरेज की क्षमता तकरीबन सात लाख मीट्रिक टन है। इनमें से अकेले इलाहाबाद में 3.72 लाख मीट्रिक टन आलू भंडारण की क्षमता है। ऐसे में मंडल के अन्य जिलों से आलू का भंडारण भी यहीं करना पड़ता है। इसके अलावा दूसरों जिलों के किसान भी यहां आलू का भंडारण करते हैं। ऐसे में भंडारण की लागत भी बढ़ जाती है। इनसे किसान औने-पौने दाम में आलू बेचने या फेंकने के लिए मजबूर होते हैं। प्याज के भंडारण की तो कोई व्यवस्था ही नहीं है। उसे खुले में ही रखना पड़ता है जबकि, वह बहुत जल्दी सड़ने लगता है।

आलू के भंडारण पर ही प्रति किलोग्राम तीन रुपये खर्च हो जाते हैं। कोल्ड स्टोरेज का एक साल का भंडारण का किराया 220 रुपये प्रति क्ंिवटल है। 24 रुपये प्रति क्विंटल कोल्ड स्टोरेज में रखने और वहां से निकालने का खर्च है। इसके अलावा खेत से कोल्ड स्टोरेज तक ले जाने का खर्च अलग है। यही वजह है कि अधिक उत्पादन पर जब आलू का कीमत कम हो जाती है तो किसान आलू कोल्ड स्टोरेज में ही छोड़ देते हैं। इसलिए भी प्याज को जल्दी बेचना मजबूरी होती है।

‘किसान तो हर तरह से बेचारा है। मौसम में बदलाव की वजह से खेती की चुनौती बढ़ गई है। बीज, खाद, स्टोरेज की व्यवस्था नहीं है। वहीं कीमत निर्धारण की भी कोई नीति नहीं है। इससे किसान आलू फेंकने के लिए मजबूर हैं। सबसे पहला काम भंडारण की समुचित व्यवस्था हो ताकि अधिक उत्पादन पर उन्हें रखा और कम उत्पादन पर आपूर्ति की जा सकेगी। फसलों की न्यूनतम कीमत को लेकर एक पॉलिसी की जरूरत है। समय से भुगतान भी सुनिश्चित होना चाहिए।ऐसी प्रजाति के बीज विकसित करने की भी जरूरत है जो बदलते मौसम को झेल सके और आलू अधिक समय तक टिका भी रहे।’

डॉ.गौतम घोष,
डीन कालेज ऑफ एग्रीकल्चर, शियाट्स

‘इलाहाबाद में कोल्ड स्टोरेज की पर्याप्त व्यवस्था है। कोल्ड स्टोरेज की संख्या बढ़ाने के भी प्रयास किए जा रहे हैं। कई योजनाओं के माध्यम से भी किसानों की मदद की जाती है। उत्पादन और मौसम को लेकर कुछ नहीं किया जा सकता। आलू, प्याज जैसे औद्यानिक फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य का निर्धारण नीतिगत मामला है।’
0 पंकज शुक्ला,
उपनिदेशक, उद्यान
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed