गजब : ठग ने लिखा, फर्जी वेबसाइट और फेसबुक वालों से सावधान रहें, हजारों युवाओं को लगा चुका है चूना
पत्राचार शिक्षा संस्थान को राज्य मुक्त विद्यालय परिषद बनाने का प्रस्ताव 2008 में लाया गया था। 2014 में इसका गजट जारी हुआ, लेकिन अब तक धरातल पर नहीं आया। इसके प्रति सरकार और शिक्षा विभाग के अफसरों की उदासीनता का फायदा ठग ने उठाया। उसने 2016 में राज्य मुक्त विद्यालय परिषद बना दिया।
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राज्य मुक्त विद्यालय परिषद की फर्जी वेबसाइट बनाकर ठगी करने वाला ही लोगों को फर्जीवाड़ा से बचने की सलाह दे रहा है। उसने वेबसाइट पर ऊपर ही लिखा है कि फर्जी वेबसाइट एवं फेसबुक वालों से सावधान रहें। ठगी का धंधा वह आठ वर्ष से चला रहा है। अब तक हजारों युवाओं को 10वीं और 12वीं का फर्जी अंकपत्र बेच चुका है। वह अंकपत्र सत्यापन के लिए पत्राचार शिक्षा संस्थान आए तो मामले का खुलासा हुआ।
पत्राचार शिक्षा संस्थान को राज्य मुक्त विद्यालय परिषद बनाने का प्रस्ताव 2008 में लाया गया था। 2014 में इसका गजट जारी हुआ, लेकिन अब तक धरातल पर नहीं आया। इसके प्रति सरकार और शिक्षा विभाग के अफसरों की उदासीनता का फायदा ठग ने उठाया। उसने 2016 में राज्य मुक्त विद्यालय परिषद बना दिया। इसका मुख्यालय प्रयागराज के फाफामऊ में गोहरी रोड पर कोल्ड स्टोर के निकट आजाद नगर शांतिपुरम में कार्यालय बनाया।
दूसरा कार्यालय लखनऊ के 5- रहेजा हाउस विमलकुंज फरीदीनगर पिकनिक स्पाट रोड मानस तिराहे के पास बनाया। वेबसाइट में मुक्त विद्यालय का गजट और प्रस्ताव अपलोड कर दिया। पीएम नरेंद्र मोदी, सीएम योगी आदित्यनाथ का मुस्कुराता चेहरा और माध्यमिक शिक्षा मंत्री गुलाब देवी की फोटो लगाई। स्वामी विवेकानंद का विचार भी लिख दिया। माध्यमिक शिक्षा के प्रमुख सचिव दीपक कुमार, महानिदेशक विजय किरण आनंद का फोटो लगाने के साथ ही शिक्षा निदेशक का संदेश भी अंग्रेजी और हिंदी में लगा दिया। बच्चों और अफसरों के बैठक की फोटो लगा दी।
इस तरह की चार वेबसाइट बनाई। वह वेसाइटें upsosp.org.in, upsosb.ac.in, upsos.in और upsos.co.in हैं। इसी में कई सरकारी वेबसाइटों का लिंक दिया। संपर्क करने के लिए तीन फोन नंबर और पांच मोबाइल नंबर दिए। अंक पत्र वैरीफिकेशन के लिए फोन नंबर और अफसरों के सीयूजी के क्रम वाला नंबर दिया है। इस संस्था से दिए गए अंक पत्र वैरीफिकेशन के लिए पिछले दिनों पत्राचार शिक्षा संस्थान के कार्यालय मनोविज्ञानशाला परिसर प्रयागराज आए तो अफसर सक्रिय हुए। अब उसकी वेबसाइट और कार्यालय बंद करवाने के लिए साबइर क्राइम को पत्र भेजा गया है।
2018 में हुई थी सात की गिरफ्तारी
फर्जी राज्य मुक्त विद्यालय परिषद बनाकर अंक पत्र बेचने का धंधा 2016 से चल रहा है। 2018 में शिकायत हुई तो 5- रहेजा हाउस विमलकुंज फरीदीनगर लखनऊ से राजमन गाैड़, जितेंद्र गाैड़ समेत सात लोग गिरफ्तार हुए थे। जेल से छूटने के बाद इन लोगों ने फिर से वही धंधा शुरू कर दिया है।
सरकारी वेबसाइट की पहचान
सरकारी वेबसाइट में gov या nic.in लिखा होता है। इसलिए सरकारी योजनाओं के लिए gov और nic.in वाली वेबसाइट पर ही भरोसा करें। साइबर एक्सपर्ट ने बताया कि वेबसाइट का बंद होना और खुलना सिम की तरह है। बंद करवाने के छह महीने बाद दूसरे नाम उसे फिर से एक्टीवेट करवा सकते हैं। इसलिए ऐसी ठगी से बचने के लिए लोगों को जागरूक होना होगा।
अब तक राज्य मुक्त विद्यालय परिषद का गठन नहीं हुआ है। कई वर्ष से इसके लिए मंथन चल रहा है। इसके नाम पर चल रही वेबसाइट फर्जी है। जो भी इसे चल रहा है, उसके खिलाफ कार्रवाई करवाई जाएगी। साथ ही वेबसाइट बंद करवाई जाएगी। इसकी प्रक्रिया चल रही है। - अजय द्विवेदी, अपर शिक्षा निदेशक, पत्राचार शिक्षा संस्थान