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पुलिस कांस्टेबल भर्ती का परिणाम जारी करने पर रोक

Sat, 28 May 2016 01:26 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Sat, 28 May 2016 01:26 AM IST
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The result of the moratorium on the issuance of police constable recruitment
पु‌लिस - फोटो : file photo
 हाईकोर्ट ने बिना लिखित परीक्षा कराए पुलिस महकमे में 34716 आरक्षियों की भर्ती का परिणाम जारी करने पर रोक लगा दी है। प्रदेश सरकार से पूछा है कि बिना पुरानी नियमावली को समाप्त किए उसने किस प्रकार नए नियम से भर्ती प्रक्रिया प्रारंभ की। कोर्ट ने बाद नियम बदलने की प्रदेश सरकार की दलील को अस्वीकार करते हुए कहा कि चयन प्रक्रिया प्रारंभ होने के बाद नियम नहीं बदले जा सकते हैं। अगले आदेश तक चयन का परिणाम जारी करने पर रोक लगाई है। पुलिस भर्ती के अभ्यर्थी रणविजय सिंह और विवेकानंद यादव समेत दर्जनों लोगों ने भर्ती प्रक्रिया को चुनौती दी है। याचिका पर जस्टिस तरुण अग्रवाल और जस्टिस वीके मिश्र की पीठ सुनवाई कर रही है।
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याची के अधिवक्ता सीमांत सिंह के अनुसार प्रदेश द्वारा बिना लिखित परीक्षा के कांस्टेबलों की सीधी भर्ती की घोषणा के तहत 34716 पदों के लिए 29 दिसंबर 2015 को विज्ञापन निकाला गया था। इसमें 28916 पुरुष और 5800 महिला आरक्षियों की भर्ती होनी है। विज्ञापन जारी करने से पूर्व दो दिसंबर 2015 को हिंदी में जारी नियमावली में कहा गया कि कांस्टेबलों की भर्ती अब नए नियम से की जाएगी। इसके बाद सरकार ने 17 फरवरी 2016 को इसका खंडन प्रकाशित करते हुए संशोधन किया कि ’भर्ती नियमावली 2008 का अतिक्रमण करते हुए’ नई नियमावली लागू की जा रही है।
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याचिका में इस बात पर आपत्ति की गई कि पहले प्रकाशित गजट में 2008 की नियमावली का ‘अतिक्रमण करते हुए’ शब्द नहीं था, इसका अर्थ है कि भर्ती का विज्ञापन 2008 की नियमावली के वजूद में रहते हुए जारी किया गया,  विज्ञापन जारी होने का अर्थ है चयन प्रक्रिया प्रारंभ हो गई है और इसके बाद नियमों में किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं हो सकता। पीठ ने परिणाम जारी करने पर रोक लगाते हुए प्रदेश से पूछा है कि किस प्रकार से उसने पुरानी नियमावली के लागू रहते नए नियम से चयन प्रक्रिया प्रारंभ कर दी। इस मामले पर 22 जुलाई को अंतिम बहस होनी है।
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याचिका में दलील दी गई है कि पुलिस विभाग में सिपाही का पद अत्यंत महत्वपूर्ण है। सिपाही को आम जनता के बीच रहकर काम करना होता है। उसकी शारीरिक दक्षता के साथ ही मानसिक योग्यता का परीक्षण भी जरूरी है। पुलिस विभाग अपनी आवश्यकता के अनुसार योग्यता का परीक्षण करता है। मगर प्रदेश सरकार ने मनमानी करते हुए लिखित परीक्षा समाप्त कर दी। जबकि तार्किक क्षमता को परखने के लिए कम से कम मेंटल एप्टीट्यूट का टेस्ट आवश्यक है। 
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