दावेदारी : अध्यक्ष पद न मिलने पर वैरागियों ने दी अखाड़ा परिषद से अलग होने की धमकी
अखाड़ा परिषद अध्यक्ष पद पर संन्यासियों-वैरागियों में दावेदारी, जूना अखाड़ा भी अध्यक्ष पद की दौड़ में शामिल, निरंजनी अखाड़े में 25 को हो सकता है नए अध्यक्ष का फैसला।
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बाघंबरी गद्दी मठ के महंत नरेंद्र गिरि की संदिग्ध परिस्थिति में मौत के बाद रिक्त हुए अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष पद के लिए दावेदारी शुरू हो गई है। महंत नरेंद्र गिरि निरंजनी अखाड़े से थे, इसलिए इसी अखाड़े से ही अध्यक्ष चुनने की दिशा में संतों का एक तबका किलेबंदी में जुटा है, जबकि वैरागी अखाड़े इस पद को किसी भी कीमत पर संन्यासियों की झोली में नहीं जाने देना चाहते।
वैरागी अखाड़ों ने धमकी दी है कि अगर अध्यक्ष पद उन्हें नहीं मिला, तो वह अखाड़ा परिषद से अलग होने पर भी विचार कर सकते हैं। परिषद के अध्यक्ष पद पर चुनाव के लिए 25 अक्तूबर को बाघंबरी मठ में अखाड़ों की बैठक होगी।
हरिद्वार कुंभ में भूमि आवंटन से शुरू हुई संन्यासी और वैरागी अखाड़ों के बीच की खींचतान अध्यक्ष पद के चुनाव के एलान के बाद और भी बढ़ गई है। वैष्णव संप्रदाय के तीन वैरागी अखाड़े चाहते हैं कि अध्यक्ष उनके बीच से चुना जाए। इसके पीछे तर्क दिया जा रहा है कि अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और महामंत्री के दोनों पद पिछले 10 वर्ष से संन्यासी परंपरा के संतों के ही पास हैं। जबकि, इसमें से एक पद वैरागियों को दिया जाना चाहिए।
अब बदले परिदृश्य में कुछ संतों का कहना है कि चूंकि नरेंद्र गिरि निरंजनी अखाड़े से थे, इसलिए इस बार सहानुभूति के आधार पर निरंजनी से ही नया अध्यक्ष चुना जाना चाहिए। इस आधार पर निरंजनी अखाड़े के ताकतवर संतों में शामिल महंत रवींद्र पुरी का नाम आगे चल रहा है। कहा जा रहा है कि रवींद्र पुरी को अध्यक्ष बनाने के लिए सात से अधिक अखाड़े समर्थन में आ गए हैं। जबकि, महानिर्वाणी अखाड़े ने अपने पक्ष में समर्थन जुटाना शुरू कर दिया है।
जूना अखाड़ा भी अध्यक्ष पद की दौड़ में शामिल है। उधर, वैष्णव अखाड़ों ने पहले ही साफ कर दिया है कि अध्यक्ष पद उन्हें नहीं दिया गया तो वे अखाड़ा परिषद से अलग हो जाएंगे। आपस की दूरी इस कदर बढ़ती जा रही है कि हाल में ही महंत नरेंद्र गिरि के षोडशी भंडारे से भी वैरागी अखाड़ों ने दूरी बना ली थी। दिगंबर अनी, निर्मोही अनी और निर्वाणी अनी अखाड़े के संत षोडशी में हिस्सा न लेकर अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं।
संन्यासी और बैरागी अखाड़ों के बीच अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष और महामंत्री पदों में बंटवारा होता रहा है। एक पद संन्यासियों के पास तो दूसरा बैरागियों के खाते में दिए जाने की बात होती रही है। 13 अखाड़ों को मिलाकर बने अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद में इस बार अध्यक्ष पद को लेकर टकराव को लेकर पुरानी नाराजगी बताई जा रही है।
हरिद्वार कुंभ के दौरान नरेंद्र गिरि को परिषद का दोबारा अध्यक्ष और महंत हरि गिरि को दोबारा महामंत्री बनाकर दोनों पदों पर संन्यासियों को बैठाए जाने को लेकर बैरागी संप्रदाय के संतों में नाराजगी रही है। बनती है। उल्लेखनीय है कि 13 अखाड़े चार संप्रदायों में बंटे हैं। इन 13 अखाड़ों में 7 संन्यासी और 3 बैरागी और तीन उदासीन संप्रदाय के अखाड़े हैं।
ये हैं 13 अखाड़े
संन्यासी पंरपरा: जूना अखाड़ा, पंचायती निरंजनी अखाड़ा, महानिर्वाणी, अग्नि, अटल, आवाहन और आनंद अखाड़ा।
वैष्णव परंपरा: दिगंबर अनी, निर्वाणी अनी और निर्मोही अनी।
उदासीन परंपरा: बड़ा उदासीन, नया उदासीन और निर्मल अखाड़ा।
अध्यक्ष पद पर दावेदारी करने के लिए सभी 13 अखाड़ों के संत स्वतंत्र हैं। 25 अक्तूबर को अध्यक्ष पद के लिए बैठक बुलाई गई है। आम सहमति बनाने की कोशिश की जाएगी। जिस तरह से कुछ अखाड़े अलग लगने की बात कर रहे हैं, अगर ऐसा हुआ तो कोरम पूरा न होने की दशा में इस बैठक के निलंबित भी किया जा सकता है। महंत हरि गिरि, महामंत्री-अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद।