{"_id":"578be3ac4f1c1b6137c4bd47","slug":"the-real-battle-will-begin-in-2017-then-in-2019","type":"story","status":"publish","title_hn":"2017 तो आगाज असल लड़ाई तो होगी 2019 में ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
2017 तो आगाज असल लड़ाई तो होगी 2019 में
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Mon, 18 Jul 2016 01:59 AM IST
विज्ञापन
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जनता दल यूनाईटेड ने उत्तर प्रदेश में पार्टी को संजीवनी देने के लिए पूरी तरह से कमर कस ली है। इसके लिए पार्टी के शीर्ष नेताओं ने खाका भी तैयार कर लिया है। फूलपुर के भुलई का पुरा गांव स्थित मैदान में रविवार को आयोजित जनसभा में राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार और पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष व राज्यसभा सांसद शरद यादव के निशाने पर भाजपा, समाजवादी पाटी और बहुजन समाज पार्टी रही। कांग्रेस का तो किसी नेता ने नाम तक नहीं लिया। इससे यह साफ है कि जदयू के कार्यकर्ता सम्मेलन का यह एक हिस्सा है। उन्हें पता है कि आगामी विधानसभा में पार्टी भले कुछ खास न कर पाए लेकिन यूपी में पार्टी का आगाज हो जाना चाहिए। यानि 2017 तो आगाज है, असल लड़ाई तो 2019 में होने वाले आम चुनाव में होगी।
सम्मेलन में जुटी पार्टी कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ से गद्गद जदयू अध्यक्ष ने साफ कहा कि पार्टी सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ समान विचारधारा के दलों व नेताओं को एक मंच पर लाने की मुहिम जारी रखेगी। कार्यकर्ता सम्मेलन के जरिए जनता को भी यह बताने की कोशिश की जा रही है कि 2017 ही नहीं बल्कि 2019 में होने वाले आम चुनाव के लिए यूपी में अपनी जमीन तलाशने में हम जुट गए हैं। पार्टी के लोगों की माने तो मिशन यूपी को लेकर नीतीश कुमार काफी संजीदा हैं। पार्टी की ओर से आगामी विधानसभा चुनाव में पूरे यूपी में पार्टी का उम्मीदवार भी उतारने की तैयारी है। बताया जा रहा है कि बिहार इकाई के कुछ वरिष्ठ पदाधिकारियों को यूपी चुनाव की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। सम्मेलन में भारी भीड़ जुटाकर विपक्षी पार्टियों को यह संदेश देने की भी कोशिश हुई। पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव ने अपने संबोधन में यह कहकर कि यहां का चुनाव देश का भविष्य तय करेगा, संकेत भी दे दिया कि हम पूरी मजबूती के साथ यूपी विधानसभा का चुनाव लड़ने जा रहे हैं।
शराब बंदी के बहाने ही सही जदयू के कार्यकर्ता सम्मेलन एवं जनसभा में कई दफे पुराने समाजवादी नेताआें का नाम लिया गया। इससे यह संकेत देने की भी कोशिश की गई पार्टी सभी समाजवादियों को यूपी में एक मंच पर लाने की कोशिश में भी जुटी हुई है। सीएम नीतीश कुमार से लेकर अन्य वरिष्ठ नेताओं ने डॉ. राममनोहर लोहिया, जयप्रकाश नारायण, पंडित जनेश्वर मिश्र, पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय वीपी सिंह का नाम लिया। कहा गया कि हमें समाजवादी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए अपने जीवन में भी उतारना है।
विज्ञापन
असल में तकरीबन चार दशक पहले हुए आम चुनाव में जनता पार्टी ने चुनाव घोषणा पत्र में शराब बंदी को शामिल किया था। उस वक्त की केंद्र सरकार ने शराब बंदी की प्रक्रिया भी शुरू कर दी थी। अब नीतीश कुमार इस मुहिम को आगे बढ़ा रहे हैं। नीतीश कुमार ने अपने संबोधन में भी कहा कि शराब बंदी का मुद्दा तो आजादी के पहले से भारत में था। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और संविधान निर्माता डॉ. बाबा साहेब भीमरॉव अंबेडकर ने भी शराब बंदी का समर्थन किया। गांधी जी के गृह प्रदेश गुजरात में इसे सबसे पहले लागू भी किया गया। इस दफे बिहार में हुए विधानसभा चुनाव से पहले नीतीश कुमार ने सरकार बनने पर शराब बंदी की घोषणा की थी।
सरकार बनते ही इस पर अमल भी किया गया। एक अप्रैल 2016 से बिहार में शराब पूरी तरह प्रतिबंधित है। पूरे देश में इस निर्णय का स्वागत भी हो रहा है। यही वजह रही कि तमिलनाडु के विधानसभा चुनाव में भी डीएमके ने शराब बंदी को अपने घोषणा पत्र में शामिल किया। केरल राज्य भी शराब बंदी पर गंभीरता से अमल कर रही है। नीतीश ने अपने संबोधन में भी कहा कि शराब के कारण जिस गरीब के घर में रोज कलह होती थी। वहां शाम को काम से लौटने के बाद आदमी शराब के नशे में नहीं बल्कि हाथ में सब्जी, फल और मिठाई लेकर जा रहा है। महिलाएं बेहद खुश हैं। साथ ही लोग भी स्वस्थ हैं।
विज्ञापन
सम्मेलन में जुटी पार्टी कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ से गद्गद जदयू अध्यक्ष ने साफ कहा कि पार्टी सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ समान विचारधारा के दलों व नेताओं को एक मंच पर लाने की मुहिम जारी रखेगी। कार्यकर्ता सम्मेलन के जरिए जनता को भी यह बताने की कोशिश की जा रही है कि 2017 ही नहीं बल्कि 2019 में होने वाले आम चुनाव के लिए यूपी में अपनी जमीन तलाशने में हम जुट गए हैं। पार्टी के लोगों की माने तो मिशन यूपी को लेकर नीतीश कुमार काफी संजीदा हैं। पार्टी की ओर से आगामी विधानसभा चुनाव में पूरे यूपी में पार्टी का उम्मीदवार भी उतारने की तैयारी है। बताया जा रहा है कि बिहार इकाई के कुछ वरिष्ठ पदाधिकारियों को यूपी चुनाव की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। सम्मेलन में भारी भीड़ जुटाकर विपक्षी पार्टियों को यह संदेश देने की भी कोशिश हुई। पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव ने अपने संबोधन में यह कहकर कि यहां का चुनाव देश का भविष्य तय करेगा, संकेत भी दे दिया कि हम पूरी मजबूती के साथ यूपी विधानसभा का चुनाव लड़ने जा रहे हैं।
विज्ञापन
शराब बंदी के बहाने ही सही जदयू के कार्यकर्ता सम्मेलन एवं जनसभा में कई दफे पुराने समाजवादी नेताआें का नाम लिया गया। इससे यह संकेत देने की भी कोशिश की गई पार्टी सभी समाजवादियों को यूपी में एक मंच पर लाने की कोशिश में भी जुटी हुई है। सीएम नीतीश कुमार से लेकर अन्य वरिष्ठ नेताओं ने डॉ. राममनोहर लोहिया, जयप्रकाश नारायण, पंडित जनेश्वर मिश्र, पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय वीपी सिंह का नाम लिया। कहा गया कि हमें समाजवादी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए अपने जीवन में भी उतारना है।
विज्ञापन
असल में तकरीबन चार दशक पहले हुए आम चुनाव में जनता पार्टी ने चुनाव घोषणा पत्र में शराब बंदी को शामिल किया था। उस वक्त की केंद्र सरकार ने शराब बंदी की प्रक्रिया भी शुरू कर दी थी। अब नीतीश कुमार इस मुहिम को आगे बढ़ा रहे हैं। नीतीश कुमार ने अपने संबोधन में भी कहा कि शराब बंदी का मुद्दा तो आजादी के पहले से भारत में था। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और संविधान निर्माता डॉ. बाबा साहेब भीमरॉव अंबेडकर ने भी शराब बंदी का समर्थन किया। गांधी जी के गृह प्रदेश गुजरात में इसे सबसे पहले लागू भी किया गया। इस दफे बिहार में हुए विधानसभा चुनाव से पहले नीतीश कुमार ने सरकार बनने पर शराब बंदी की घोषणा की थी।
सरकार बनते ही इस पर अमल भी किया गया। एक अप्रैल 2016 से बिहार में शराब पूरी तरह प्रतिबंधित है। पूरे देश में इस निर्णय का स्वागत भी हो रहा है। यही वजह रही कि तमिलनाडु के विधानसभा चुनाव में भी डीएमके ने शराब बंदी को अपने घोषणा पत्र में शामिल किया। केरल राज्य भी शराब बंदी पर गंभीरता से अमल कर रही है। नीतीश ने अपने संबोधन में भी कहा कि शराब के कारण जिस गरीब के घर में रोज कलह होती थी। वहां शाम को काम से लौटने के बाद आदमी शराब के नशे में नहीं बल्कि हाथ में सब्जी, फल और मिठाई लेकर जा रहा है। महिलाएं बेहद खुश हैं। साथ ही लोग भी स्वस्थ हैं।