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Prayagraj News: मशाल की रोशनी से शुरू हुई रामलीला, आज बिजली की चकाचौंध से सराबोर
Wed, 14 Oct 2026 02:17 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
संवाद न्यूज एजेंसी, प्रयागराज
Updated Wed, 14 Oct 2026 02:17 AM IST
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चित्र परिचय------- पुरानी बाजार रामलीला नाट्य समिति जसरा में सुग्रीव की भूमिका अदा करते अकरम अ
जसरा बाजार की रामलीला 110 वर्षों से अधिक पुरानी है। यह रामलीला क्षेत्र में हिंदू-मुस्लिम एकता की बड़ी प्रतीक मानी जाती है। यह गंगा-जमुनी तहजीब की जीती-जागती मिसाल बनी हुई है।
रामलीला कमेटी के संरक्षक रतन केसरवानी ने बताया कि उनके पूर्वजों ने इसे बाजार के सहयोगियों के साथ शुरू किया था। शुरुआत से ही मुस्लिम समाज का इसमें भरपूर सहयोग रहा है। पहले शमशुल हसन मुख्य पात्र हुआ करते थे। आज अकरम अली बिल्लू बादशाह कमेटी में मंत्री पद पर हैं। वह रामलीला में सुग्रीव और रावण सहित कई भूमिकाएं निभाते हैं। अकरम अली पात्र व्यवस्थापक की भी भूमिका अदा करते हैं।
जसरा बाजार के 85 वर्षीय जगत नारायण केसरवानी ने पुरानी यादें साझा कीं। उन्होंने बताया कि पहले बिजली नहीं थी, रामलीला मशाल की रोशनी में होती थी। बाद में पेट्रोमैक्स का प्रचलन आया। यह रामलीला यमुना पार क्षेत्र में सबसे प्राचीन है। यह नवरात्र की नवमी को शुरू होकर दशहरे के दिन ही समाप्त होती है, जो इसकी एक अनूठी विशेषता है।
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रामलीला कमेटी के संरक्षक रतन केसरवानी ने बताया कि उनके पूर्वजों ने इसे बाजार के सहयोगियों के साथ शुरू किया था। शुरुआत से ही मुस्लिम समाज का इसमें भरपूर सहयोग रहा है। पहले शमशुल हसन मुख्य पात्र हुआ करते थे। आज अकरम अली बिल्लू बादशाह कमेटी में मंत्री पद पर हैं। वह रामलीला में सुग्रीव और रावण सहित कई भूमिकाएं निभाते हैं। अकरम अली पात्र व्यवस्थापक की भी भूमिका अदा करते हैं।
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जसरा बाजार के 85 वर्षीय जगत नारायण केसरवानी ने पुरानी यादें साझा कीं। उन्होंने बताया कि पहले बिजली नहीं थी, रामलीला मशाल की रोशनी में होती थी। बाद में पेट्रोमैक्स का प्रचलन आया। यह रामलीला यमुना पार क्षेत्र में सबसे प्राचीन है। यह नवरात्र की नवमी को शुरू होकर दशहरे के दिन ही समाप्त होती है, जो इसकी एक अनूठी विशेषता है।
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